मौलिक विचारो के कारण उर्वर मस्तिष्क के होते हैं मूलांक ७ वाले

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मूलांक सात का स्वामी ग्रह केतु है. और इस कारण मूलांक 7 के जातक केतु ग्रह से प्रभावित रहते हैं यह जातक जल की भांति सभी स्थिति से समझौता करने वाले होते हैं यह शांत स्वभाव के होते हैं. केतु के प्रभाव के कारण इनके स्वभाव में रहस्यात्मकता का भाव भी निहित होता है
इस मूलांक के बालक निर्भीक प्रवृत्ति के होते हैं। ये बेहद आत्मविश्वासी होते हैं। इनकी याददाश्त क्षमता बेहतर होती है लेकिन विचारों में अस्थिरता के कारण अक्सर इनको बाद में करियर चयन में परेशानी होती है।
इस मूलांक वाले जातक सरल ह्वदय व दार्शनिक प्रवृत्ति के होते हैं। कल्पनशीलता के मामले में ये काफी आगे रहते हैं। दूसरे की मन की बात जानने में समय नहीं लगते यह मौलिकता से युक्त स्वतंत्र विचारों वाले होते हैं.
मूलांक 7 के व्यक्ति सदैव परिवर्तनशील होते हैं तथा काल्पनिक एवं भावुक स्वभाव के होते हैं. है। इनके व्यक्ति में अनेकानेक खूबियां होती हैं। इनका व्यक्तित्व सैकड़ों- हजारों लोगों में पहचाना जा सकता है। परिवर्तन इनको प्रिय है। ये नित्य नवीनता के समर्थक होते हैं। इनकी निर्मित योजनाएं शायद ही कभी असफल हों।
साहित्य, संगीत, ललित कला या चित्र कला में ये ख्याति अर्जित करते हैं। मौलिकता इनका अनन्य गुण है। धन की अपेक्षा मान-सम्मान का ये ज्यादा ख्याल रखते हैं। इनमें अद्भुत गुणों का समावेश होता है। ये धर्मभीरु, परोपकारी, स्नेही, ठंडे मिजाज वाले, सहिष्णु, सौम्य, सरलचित्त, साहसी, कल्पनाप्रिय, दार्शनिक, अच्छे विचारक और विज्ञान प्रेमी होते हैं। योगसिद्धि, साधना, चिंतन, मनन ही इनका उद्देश्य होता है।
मूलांक सात वाले अपनी विशिष्ट अभिव्यक्ति एवं अभिरूचि के लिए जाने जाते हैं. यह दुनिया को अपने नज़रिये से देखते हैं ऐसे लोग कवि, लेखक या कला प्रेमी होते हैं तथा इन्हे इस क्षेत्र में सफलता भी मिलती है.
मूलांक सात वाले धार्मिक प्रवृत्ति के होते हैं पर रूढ़ियों एवं पूरानी रीतियों से दूर रहते हैं, धर्म के क्षेत्र में ये परिवर्तनशील विचारधारा रखते हैं, इन्हें धर्म में आडंबर पसंद नहीं है जैसे कबीर और गैलीलियो जैसे महान विचारक थे.
ये किसी ऐसे धर्म का अविष्कार करते है जो भावनाओ या कल्पनाओ पे आधारित होते है. ये स्वतंत्र प्रवृति के होते है.
ये स्वाभावत: मौलिक प्रवृति के होते है. विचारों मे मौलिकता के कारण ही छवि, लेखक, या अच्छे पत्रकार भी हो सकते है. समय होने पर ये ग्रंथ लिख डालते है जो की इनको ख्याति देता है.मौलिक विचारो के कारण इनका मस्तिष्क उर्वर होता है. ये इसी के आधार पर हर चीज मे परिवर्तन सोचते है, जो सामाज के लिये उपयोगी हो. अगर ये सोच अध्यात्म की ओर लगा दें तो आप दार्शनिक, योगी, या उच्च विचारक बन सकते है.
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