दरिद्रता एक अभिशाप है……..

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  • क्या आप भी कष्ट से जीवन-यापन कर रहे हैं??????????
  • जीवन में धन की कमी या निर्धनता को दरिद्रता कहते हैं। यह एक ऐसा दोष है, जो न केवल मानव जीवन में पग-पग पर कठिनाइयां पैदा करता है, बल्कि यह व्यक्तित्व एवं व्यक्ति की छवि को विकृत भी कर देता है।
  • रिदद्रता की मानसिकता का सबसे बड़ा लक्षण आत्मविश्वास का अभाव है, जो दरिद्री की दुविधा, असुविधा, किंकर्तव्यविमूढ़ता एवं निष्क्रियता के भंवरजाल में फंसा होता है। वस्तुत: दरिद्रता के दर्द की टीस संसार में सबसे अधिक दुखदाई है।
  • आइये देखें उन कारणों को यदि प्रवेश द्वार जमीन से रगड खाता हुआ खुले या बंद हो तो बहुत कष्ट के बाद धन आगमन होता है।
  • आग्नेय कोण में धन रखने से आमदनी से ज्यादा खर्चे बढ़ जाते हैं तथा क़र्ज़ की स्थिति बनती है
  • दो उचे भवनों घिरा हुआ भवन या भारी भवनों के बीच दबा हुआ भवन भूखण्ड खरीदने से बचें क्योंकि दबा हुआ भवन भूखंड गरीबी एवं कर्ज का सूचक है। दक्षिण-पश्चिम व दक्षिण दिशा में भूमिगत टैंक, कुआँ या नल होने पर घर में दरिद्रता का वास होता है। पूर्व तथा उत्तर दिशा में भूलकर भी भारी वस्तु न रखें अन्यथा कर्ज, हानि व घाटे का सामना करना पड़ेगा। कोई भी कोना कटा हुआ न हो, न ही कम होना चाहिए। गलत दीवार से धन का अभाव हो जाता है। भवन के मध्य भाग में अंडर ग्राउन्ड टैंक या बेसटैंक न बनवाएँ।
  • घर में टूटे बर्तन व टूटी हुई खाट नहीं होनी चाहिए, न ही टूटे-फूटे बर्तनों में खाना खाएँ। इससे दरिद्रता बढ़ती है।वास्तुशास्त्र के अनुसार ईशान ऊंचा हो और नैऋत्य कोण नीचा हो तो निर्धनता रहती है, इशान दिशा में सीढियाँ न हों उत्तर-पूर्व कटा हुआ या बाधित नहीं होना चाहिए
  • यदि केवल पश्चिमी दिशा में ही निर्माण हो अर्थात् – दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम में निर्माण नहीं हो तो घर में महालक्ष्मी का आगमन तो शुरू होगा परंतु गृहस्वामी लक्ष्मी प्राप्ति के अनुरूप सम्मान प्राप्त नहीं कर पायेगा। यदि दक्षिण व दक्षिण-पश्चिम म सबसे भारी निर्माण कराया जाये तो नेतृत्व व अधिकार भी मिल जाता है। केवल पश्चिम में भारी निर्माण से जो धन आता है, उसमें धन का अपव्यय भी बहुत तेज गति से होता है।
  • उत्तर दिशा की ओर ढलान जितनी अधिक होगी संपत्ति में उतनी ही वृद्धि होगी।
  • यदि कर्ज से अत्यधिक परेशान हैं तो ढलान ईशान दिशा की ओर करा दें, कर्ज से मुक्ति मिलेगी।
  • उत्तर-पूर्व भाग में भूमिगत टैंक या टंकी बनवा दें। टंकी की लम्बाई, चौड़ाई व गहराई के अनुरूप आय बढ़ेगी। मकान का मध्य भाग थोड़ा ऊँचा रखें। इसे नीचा रखने से बिखराव पैदा होगा। यदि उत्तर दिशा में ऊँची दीवार बनी है तो उसे छोटा करके दक्षिण में ऊँची दीवार बना दें। इस प्रकार कुछ वास्तु उपायों को अपनाकर आप लक्ष्मी की कृपा प्राप्त कर सकते है
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