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Category: व्रत एवं त्योहार

Jaya Ekadashi 2019: जया एकादशी आज, जानें पूजा विधि और व्रत कथा

आज माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते हैं। जानें पूजा विधि और व्रत कथा के बारें में। आज माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि है। माघ शुक्ल पक्ष की एकादशी को जया एकादशी कहते हैं। अतः आज जया एकादशी व्रत…

शनिवार को तिल द्वादशी मनाएं, बढ़ेगा मान-सम्मान

16 फरवरी शनिवार को तिल द्वादशी मनाएं. इस दिन लोगों को तिल, कंबल, घी, मिष्ठान आदि का दान करना चाहिए. तिल द्वादशी पर दान करने से आपके मान-सम्मान में वृद्धि होगी. 16 फरवरी शनिवार को तिल द्वादशी मनाएं. धन, संपत्ति और मान सम्मान बढ़ेगा. लोगों को इस दिन तिल, कंबल,…

बैकुंठ चतुदर्शी व्रत

कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की चतुदर्शी को पाप मुक्ति तथा बैकुण्ठ प्राप्ति हेतु बैकुंठ चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु की प्रियता के लिए किया जाता है। इस दिन निराहर रहते हुए भगवान विष्णु की प्रतिष्ठा कर कमल के फूल से विधिवत पूजा कर धूप, दीप चंदन आदि पदार्थो से…

शाकंभरी पूर्णिमा

पौष शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को प्रदोषव्यापिनी उत्सव विधान से मनाने का आदि काल से महत्व है। पूर्णिमा का व्रत गृहस्थों के लिए अति शुभ फलदायी होता है। प्रायः स्नान कर व्रत के साथ भगवान सत्यनारायण की पूजा कथा कर दिनभर उपवास करने के उपरांत चंद्रोदय के समय चंद्रमा को…

मासशिवरात्रि व्रत

मासषिव रात्रि व्रत कृष्णपक्ष की चतुर्दषी को किया जाता है। इस दिन एक दिन पूर्व भोजन कर दिनभर निराहार रहकर पत्रपुष्प तथा सुंदर वस्त्रों से मंडल तैयार करके वेदी पर कलष की स्थापना कर गौरी शंकर की स्वर्णमूर्ति तथा नंदी की चाॅदी की मूर्ति रखकर अथवा सामान्य रूप से उपयोग…

दिवाली पूजन विधि एवं मुहूर्त

सौभाग्य योग की पूजा देगा सौभाग्य और समृधि – कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या रात्रि 09:32 तक दिन बुधवार, स्वाति नक्षत्र शाम 07:37 तक, आयुष्मान योग संध्या 05:57 तक उसके बाद सौभाग्य योग रात्रि भर, चंद्रमा तुला राशि के – अभिजित मुहूर्त – 11:59 – 12:22 तक शुभ और पूजन में…

” धनतेरस ” भगवान धन्वन्तरि की पूजा से होती है सुख-समृद्धि व आरोग्य की प्राप्ति

धनतेरस खरीदी एवम पूजा मुहूर्त धनतेरस मुहूर्त 05 नवम्बर, 2018   कार्तिक कृष्ण पक्ष त्रयोदशी रात्रि 01:47 तक सोमवार, हस्त नक्षत्र रात्रि 08:37 तक, विष्कुंभ योग रात्रि 10:11 तक उसके बाद प्रीत योग, चंद्रमा कन्या राशि में.   राहुकाल – प्रात: 08:07 – 09:32 अभिजीत मुहूर्त –   11:59 AM से  12:45 PM अमृत- 06:42 से 08:07 शुभ- 09:32 से 10:57 चर- 13:47 से  15:12 लाभ- 15:12 से 16:37 अमृत…

सफला एकादशी –

सफला एकादषी का व्रत पौष माह की कृष्णपक्ष की एकादषी को मनाया जाता है। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा का विधान है। एकादषी का व्रत रखने वाले दषमी के सूर्यास्त से भोजन नहीं करते। एकादषी के दिन ब्रम्हबेला में भगवान कृष्ण की पुष्प, जल, धूप, अक्षत से पूजा की…

 करवा चौथ व्रत

 करवा चौथ व्रत – पति की लंबी आयु के लिए किया जाता है व्रत – संकल्प शक्ति का प्रतीक है करवा चौथ व्रत – अखंड सौभाग्य की कामना का व्रत है करवा चौथ – कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है व्रत ————————————————————-  पूजन सामग्री…

श्री कृष्ण जन्माष्टमी –

श्री कृष्ण जन्माष्टमी – भाद्रपद कृष्णपक्ष की अष्टमी को मध्यरात्रि में भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में श्री विष्णु की सोलह कलाओं से पूर्ण अवतरित हुए थे। श्री कृष्ण का प्राकट्य आततायी कंस एवं संसार से अधर्म का नाष करने हेतु हुआ था। भविष्योत्तर पुराण में कृष्ण ने…

हलषष्ठी व्रत

हिन्दु कैलेण्डर के अनुसार प्रत्येक वर्ष भाद्रपद माह में कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यह व्रत किया जाता है. इस दिन भगवान कृष्ण के बडे़ भाई बलराम जी की जन्म हुआ था. इसे हर षष्ठ और ललही षष्ठ के नाम से भी जाना जाता है. हल और मूसल बलराम…

तुलसी विवाह

::::::तुलसी विवाह::::: तुलसी विवाह से सं‍बंधित महत्वपूर्ण बातें जानिए देवउठनी एकादशी पर होता है तुलसी विवाह ! सनातन धर्म में धार्मिक कार्यों का आधार धर्मशास्त्र एवं ज्योतिष की कालगणना दोनों ही हैं। शास्त्रों में कहा है देवताओं का दिन मानव के छह महीने के बराबर होता है और रात्रि छह…

शनि प्रदोष व्रत से पायें कैरियर में सफलता-

कालपुरूष के जन्मांग में सूर्य हैं राजा, बुध हैं मंत्री, शनि हैं जज, राहु और केतु प्रशासक हैं, गुरू हैं मार्गदर्शक, चंद्रमा हैं मन और शुक्र है वीर्य। जब कभी भी कोई व्यक्ति अपराध करता है तो राहु और केतु उसे दण्डित करने के लिए तत्पर हो जाते हैं। पर…

बुधाष्टमी व्रत से पायें सफलता और सुख

व्यक्ति के जीवन में कई बार आकस्मिक हानि प्राप्त होती है साथ ही कई बार योग्यता तथा सामथ्र्य होने के बावजूद जीवन में वह सफलता प्राप्त नहीं होती, जिसकी योग्यता होती है। इस प्रकार का कारण ज्योतिषषास्त्र द्वारा किया जा सकता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में प्रथम, द्वितीय,…

चतुर्थी तिथि के स्वामी श्री गणेष

तिथीषावहिनकौगौरी अर्थात् मूहुर्तचिंतामणि नामक ग्रंथ में उल्लेखित श्लोक के अनुसार प्रत्येक चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेष भगवान हैं परंतु प्रत्येक चतुर्थी को भगवान के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। मार्गषीर्ष माह के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को भगवान वैनायकी के रूप में पूजे जाते हैं। अमरकोष नामक ग्रंथ में उल्लेख…

वैनायकी गणेष चतुर्थी व्रत –

तिथीषावहिनकौगौरी अर्थात् मूहुर्तचिंतामणि नामक ग्रंथ में उल्लेखित श्लोक के अनुसार प्रत्येक चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेष भगवान हैं परंतु प्रत्येक चतुर्थी को भगवान के अलग-अलग रूपों की पूजा होती है। पौष माह के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को भगवान वैनायकी के रूप में पूजे जाते हैं। अमरकोष नामक ग्रंथ में उल्लेख…

पुत्रदा एकादशी

पौष मास की शुक्लपक्ष की एकादषी को पुत्रदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। पद्यपुराण के अनुसार श्री कृष्ण ने इस व्रत का वर्णन युधिष्ठिर से किया था। चराचर प्राणियों सहित त्रिलोक में इससे बढ़कर दूसरी कोई तिथि नहीं है, जो संतान कष्ट से संबंधित दुखों को हर सके।…

पाप मोचनी एकादशी व्रत

पाप मोचनी एकादशी व्रत चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को किया जाता है. पापमोचनी एकादशी व्रत व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्त कर मोक्ष के मार्ग खोलती है. इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु जी का पूजन करना चाहिए. इस पूजा को षोडशोपचार के रुप में करने…

श्री स्कंद षष्ठी अथवा चम्पाषष्ठी व्रत

मार्गषीर्ष के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को श्री स्कंदषष्ठी या चम्पाषष्ठी व्रत किया जाता है। इस व्रत के संबंध में मान्यता है कि एक बार मुनिवर दुर्वासा युधिष्ठिर को राज्य मिलने के उपरांत उनका हाल-चाल जानने गए। युधिष्ठिर मुनिवर को देखकर अत्यंत प्रसन्नतापूर्वक उनकी सेवा-सत्कार करने के बाद धमनन्दन…