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Category: Spirituality and Mythodology

बढ़ते सामाजिक अपराध का ज्योतिष कारक

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह समाज का एक सदस्य है और समाज के अन्य सदस्यों के प्रति प्रतिक्रिया करता है, जिसके फलस्वरूप समाज के सदस्य उसके प्रति प्रक्रिया करते हैं। यह प्रतिक्रया उस समय प्रकट होती है जब समूह के सदस्यों के जीवन मूल्य तथा आदर्श ऊंचे हों, उनमें…

मेरी तो किस्मत ही खराब है

पुरूषार्थ का महत्व भाग्य से अधिक है साथ ही अधिकांश लोगो की मान्यता होती है कि भाग्य नाम की कोई चीज नहीं होती जितना कर्म किया जाता है उसी के अनुरूप फल मिलता है किंतु जीवन की कई अवस्थाओं पर नजर डाले तो भाग्य की धारणा से इंकार नहीं किया…

पितृ ऋण, देव ऋण,आचार्य ऋण, मातृ ऋण

 वैदिक काल से मान्यता है कि किसी भी मानव के जीवन में पितृ ऋण, देव ऋण, आचार्य ऋण, मातृऋण के कारण जीवन में असफलता तथा हानि बीमारी का सामना करना पड़ता है। माना जाता है कि इंसान को अपनी जिंदगी में कर्ज, फर्ज और मर्ज को कभी नहीं भूलना चाहिए।…

इस संसार से पलायन करने के दो मार्ग हैं- एक प्रकाश का और दूसरा अंधकार का…

इस संसार से पलायन करने के दो मार्ग हैं- एक प्रकाश का और दूसरा अंधकार का। जब मनुष्य प्रकाश मार्ग से जाता है तो वह वापस नहीं आता और अंधकार मार्ग से जाने वाले को पुन: लौट कर आना होता है। (गीता – 8/26) हम इंसानों के पास गीता के…

सामाजिक विकास से संबंधित ज्योतिष कारक

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है। वह समाज का एक सदस्य है और समाज के अन्य सदस्यों के प्रति प्रतिक्रिया करता है, जिसके फलस्वरूप समाज के सदस्य उसके प्रति प्रक्रिया करते हैं। यह प्रतिक्रया उस समय प्रकट होती है जब समूह के सदस्यों के जीवन मूल्य तथा आदर्ष ऊॅचे हों, उनमें…

कृष्णमूर्ति पद्धति

 भौतिक जगत की तरह मानव ने अध्यात्म और दर्शन में भी कई महत्वपूर्ण अनुसंधान किये हैं। अध्यात्म और दर्शन से ही जुड़ा हुआ विषय है ज्योतिष। मानव के अनुसंधानात्मक प्रवृति से ज्योतिष भी अछूता नहीं रहा है। ज्योतिषशास्त्रियों ने अपने ज्ञान और अनुसंधान से इसमें कई नई चीजों को शामिल…

गर्भाधारण संस्कार

हमारे शास्त्रों में मान्य सोलह संस्कारों में गर्भाधान पहला है। गृहस्थ जीवन में प्रवेश के उपरान्त प्रथम कर्तव्य के रूप में इस संस्कार को मान्यता दी गई है। ग्रहस्थ्य जीवन का प्रमुख उद्देश्य श्रेष्ठ सन्तानोत्पत्ति है। उत्तम संतति की इच्छा रखनेवाले माता-पिता को गर्भाधान से पूर्व अपने तन और मन…

बुधवार को गणेश जी बरसाएंगे कृपा, अगर सुनेंगे उनके भाव विभोर कर देने वाले ये भजन और आरती

Ganesha bhagwaan bhajan aarti: हफ्ते का हर दिन किसी ना किसी देवी देवता को समर्पित होता है। आज बुधवार है तो ऐसे में यह दिन गणपति जी की पूजा का है। भगवान गणेश दुखों का नाश और संकट दूर करने वाले देवता माने गए हैं। इनकी पूजा सभी देवी देवताओं…

कैसे बनते हैं अंधविश्वास

आदिकाल में मनुष्य का क्रिया क्षेत्र संकुचित था इसलिए अंधविश्वासों की संख्या भी अल्प थी। ज्यों ज्यों मनुष्य की क्रियाओं का विस्तार हुआ त्यों-त्यों अंधविश्वासों का जाल भी फैलता गया और इनके अनेक भेद-प्रभेद हो गए। अंधविश्वास सार्वदेशिक और सार्वकालिक हैं। विज्ञान के प्रकाश में भी ये छिपे रहते हैं।…

इन गलतियों को करने से घर में होता है दरिद्रता का वास

शुक्र ग्रह और चंद्रमा की पूजा करने से महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है. लेकिन कुछ कार्यों के करने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं और घर में दरिद्रता का वास होने लगता है, इसलिए भूलकर भी इन कार्यों को ना करें. जन्म कुंडली में शुक्र ग्रह और…

मोर पंख में है नवग्रह का वास, जानें इससे किस्‍मत के दरवाजे खोलने के अचूक उपाय

मोर पंख को एक पवित्र और आध्यात्मिक चीज माना जाता है। हिंदुओं के पवित्र धर्मग्रंथों में भी मोर पंख का उल्लेख किया गया गया। मोर पंख सिर्फ सजावट में ही काम नहीं आता है बल्कि जिंदगी में आने वाली समस्याओं से बचने के लिए भी टोटके के रूप में मोरपंख…

ज्यों-ज्यों मन शांत होता जायेगा, त्यों-त्यों उसमें परमात्मा का सुख उभरता जायेगा

ज्यों-ज्यों मन शांत होता जायेगा, त्यों-त्यों उसमें परमात्मा का सुख उभरता जायेगा जन्म-मरण मन की चंचलता और आसक्ति का फल है। दुःख-क्लेश का मूल है, मन की चंचलता और आसक्ति। गीता में अर्जुन कहता है श्रीकृष्ण सेः चंचलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद् दृढ़म्। तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्।। ʹहे…

नकारात्मक विचार मन में क्यों आते हैं – कारण एवं उपाय

आधुनिक भागदौड़ के इस जीवन में प्रायः सभी व्यक्तियों को चिंता सताती रहती है। हर आयुवर्ग तथा हर प्रकार के क्षेत्र से संबंधित अपनी-अपनी चिंता होती हैं। चिंता को भले ही हम आज रोग ना माने किंतु इसके कारण कई प्रकार के लक्षण ऐसे दिखाई देते हैं जोकि सामान्य रोग…

Farmer and his daughter- short story

There is one farmer he had to borrow some money from the money lender. The money lender was very cunning person he had a close watch on the daughter beautiful daughter.Then he place a deal infront of a farmer. The deal was that “if farmer’s daughter get married to the…

आपके कर्म से निर्धारित होता भाग्य –

पुरूषार्थ का महत्व भाग्य से अधिक है साथ ही अधिकांष लोगो की मान्यता होती है कि भाग्य नाम की कोई चीज नहीं होती जितना कर्म किया जाता है उसी के अनुरूप फल मिलता है किंतु जीवन की कई अवस्थाओं पर नजर डाले तो भाग्य की धारणा से इंकार नहीं किया…

Rays of hope

There was once a king. One day he got angry with his vizier and imprisoned over a huge tower. It was very annoying to the point of death. He could not bring any food or jumping from the high-rise tower was no possibility of his escape. By the time he…

दत्तात्रेय पूजन विधि एवं स्तोत्र

दत्तात्रय याने अत्रि ऋषि और अनुसूया की तपस्या का प्रसाद … ” दत्तात्रय ” शब्द , दत्त + अत्रेय की संधि से बना है। त्रिदेवों द्वारा प्रदत्त आशीर्वाद “ दत्त “ … अर्थात दत्तात्रय ! मार्गशीर्ष (अगहन) मास की पूर्णिमा को दत्त जयंती मनाई जाती है। शास्त्रानुसार इस तिथि को…

रिष्तों में बाधक अहंकार:दूर करने के ज्योतिषीय उपाय

किसी व्यक्ति का व्यवहार मधुर होने के लिए उसका लग्नेष तथा तृतीयेष की बलवान और शुभ स्थान पर स्थिति होना चाहिए, जिससे पारस्परिक आनंद का कारण बनता है। किसी दो व्यक्ति का लग्नेष, तृतीयेष एवं सप्तमेष का जन्म कुंडली में शुभ भावों में युति या दृष्टि संबंध हो अथवा दोनों…

कहीं आप अपने सयम जल्दी खो देते है: ज्योतिष उपाय

आधुनिक भागदौड़ के इस जीवन में प्रायः सभी व्यक्तियों को चिंता सताती रहती है। हर आयुवर्ग तथा हर प्रकार के क्षेत्र से संबंधित अपनी-अपनी चिंता होती हैं। चिंता को भले ही हम आज रोग ना माने किंतु इसके कारण कई प्रकार के लक्षण ऐसे दिखाई देते हैं जोकि सामान्य रोग…

कालसर्प दोष का ज्योतिषीय यथार्थ और निवारण क्यों महतवपूर्ण

ज्योतिषीय आधार पर कालसर्प दो शब्दों से मिलकर बना है ‘‘काल’’ और ‘‘सर्प’’ । काल का अर्थ समय और सर्प का अर्थ सांप अर्थात् समय रूपी सांप। ज्योतिषीय मान्यता है कि जब सभी ग्रह राहु एवं केतु के मध्य आ जाते हैं या एक ओर हो जाते हैं तो कालसर्प…

कर्म और प्रारब्ध का स्थान ज्योतिष रूप

पुरूषार्थ का महत्व भाग्य से अधिक है साथ ही अधिकांष लोगो की मान्यता होती है कि भाग्य नाम की कोई चीज नहीं होती जितना कर्म किया जाता है उसी के अनुरूप फल मिलता है किंतु जीवन की कई अवस्थाओं पर नजर डाले तो भाग्य की धारणा से इंकार नहीं किया…

धर्म-अर्थ-काम जीवन के तीन लौकिक पुरुषार्थ

भारतीय संस्कृति का मूल धर्म ही है। बल्कि कहना चाहिए कि भारतीय संस्कृति का प्राण धर्म है। दूसरे देशों की संस्कृति में जहां भौतिक तत्व की प्रधानता है, वहीं भारतीय संस्कृति में धर्म की प्रधानता है। इसलिए वह आध्यात्मिक संस्कृति है। धर्म शब्द को परिभाषा में बांधना कठिन ही नहीं…