हथेली का रंग एवं पर्वतों का महत्व

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सामुद्रिक ज्योतिष महासागर की तरह गहरा है। इसमें हाथ की रेखाओं, हाथ का आकार, नाखून, हथेली का रंग एवं पर्वतों को काफी महत्व दिया गया है। हमारी हथेली पर जितने भी ग्रह हैं उन सबके लिए अलग-अलग स्थान निर्धारित किया गया है। ग्रहों के लिए निर्घारित स्थान को ही पर्वत कहा गया है। ये पर्वत हमारी हथेली पर चुम्बकीय केन्द्र हैं, जो अपने ग्रहों से उर्जा प्राप्त कर मस्तिष्क और शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंचाते हैं। ऐसे ही सर्वगुण दर्शाने वाले हथेली के क्षेत्र के बारे में नीचे वर्णन किया गया है:
1 प्रबुद्ध क्षेत्र :
(तर्जनी)- इस अंगुली के गुरु पर्वत, शुभ मंगल पर्वत, शुक्र पर्वत तथा अंगूठे का संपूर्ण भाग को प्रबुद्ध क्षेत्र कहते हैं। यदि यह सभी क्षेत्र उन्नत हो तो व्यक्ति प्रबुद्ध, ज्ञानवान, अध्ययन का शौकीन व यशस्वी जीवन जीता है।
2 सामाजिक क्षेत्र :
शनि की अंगुली, शनि पर्वत, नेपच्यून पर्वत, यूरेनस पर्वत तथा राहु व केतु पर्वतों के प्रभाव को बताने वाला यह क्षेत्र सामाजिक क्षेत्र कहलाता है।
3 अर्ध चेतन क्षेत्र :
अर्ध चेतन क्षेत्र में बुध की अंगुली, बुध पर्वत, निम्न मंगल, चन्द्र पर्वत व अपोलो पर्वत का प्रभाव होता है।
हम जानते हैं कि ग्रहों की कुल संख्या 9 है। इन नवग्रहों का हमारे जीवन पर प्रत्यक्ष प्रभाव होता है। ग्रह हमारे जीवन को दिशा देते हैं और इन्हीं के प्रभाव से हमारे जीवन में उतार-चढ़ाव, सुख-दुख और यश-अपयश प्राप्त होता है। हमारी हथेली पर भी ग्रहों की स्थिति होती है, हम अपनी अथवा किसी अन्य की हथेली देखकर भी विभिन्न ग्रहों के प्रभाव का अनुमान लगा सकते हैं।
हम सबसे पहले हथेली में बृहस्पति ग्रह के स्थान यानी गुरू पर्वत की स्थिति और उससे प्राप्त प्रभाव पर दृष्टि डालते हैं।
गुरू पर्वत : गुरू पर्वत का स्थान हथेली पर तर्जनी उंगली के ठीक नीचे होता है। जिनकी हथेली पर यह पर्वत अच्छी तरह उभरा होता है उनमें नेतृत्व एवं संगठन की अच्छी क्षमता पायी जाती है। जिनकी हथेली में ऐसी स्थिति होती है वे धार्मिक प्रवृति के होते हैं, ये लोगो की मदद करने हेतु सदैव तत्पर रहते हैं। हस्त रेखा विज्ञान के अनुसार यह पर्वत उन्नत होने से व्यक्ति न्यायप्रिय होता है और दूसरों के साथ जान बूझ कर अन्याय नहीं करता है। शारीरिक तौर पर उच्च गुरू पर्वत वाले व्यक्ति का शरीर मांसल होता है यानी वे मोटे होते हैं।
यह पर्वत जिनमें बहुत अधिक विकसित होता है वैसे व्यक्ति स्वार्थी व अहंकारी होते हैं। जिनके हाथों में यह पर्वत कम विकसित होता है वे शरीर से दुबले पतले होते हैं। अविकसित गुरू के होने से व्यक्ति में संगठन एवं नेतृत्व की क्षमता का अभाव पाया जाता है। इस स्थति में व्यक्ति मान सम्मान हासिल करने हेतु बहुत अधिक उत्सुक रहता है। ऐसे व्यक्ति धन से बढ़कर मान सम्मान और यश के लिए ललायित रहते हैं।
गुरू पर्वत का स्थान जिस व्यक्ति की हथेली में सपाट होता है वे व्यक्ति असामाजिक लोगों से मित्रता रखते हैं, इनकी विचारधारा निम्न स्तर की होती है ये अपने बड़ों को सम्मान नहीं देते हैं।
शनि पर्वत : हथेली में शनि पर्वत का स्थान मध्यमा उंगली के ठीक नीचे माना जाता है। सामुद्रिक ज्योतिष कहता है जिस व्यक्ति के हाथ में यह पर्वत विकसित होता है वे बहुत ही भाग्यशाली होते हैं, इन्हें अपनी मेहनत का पूरा लाभ मिलता है। ये एक दिन अपनी मेहनत के बल पर श्रेष्ठ स्थिति को प्राप्त करते हैं। जिनकी हथेली पर भाग्य रेखा बिना कटे हुए इस पर्वत को छूती है वे जीवन में अपने भाग्य से दिन ब दिन कामयाबी की सीढिय़ां चढ़ते जाते हैं। उन्नत शनि पर्वत होने से व्यक्ति अपने कर्तव्य के प्रति सजग और जिम्मेवार होता है।
विकसित शनि पर्वत होने से व्यक्ति में अकेले रहने की प्रवृति होती है, अर्थात वह लोगों से अधिक घुला-मिला नहीं रहता है। इनमें अपने लक्ष्य के प्रति विशेष लगन होती है जिसके कारण आस पास के परिवेश से सामंजस्य नहीं कर पाते हैं। जिनकी हथेली में शनि पर्वत बहुत अधिक उन्नत होता है वे अपने आस-पास से बिल्कुल कट कर रहना पसंद करते हैं और आत्महत्या करने की भी कोशिश करते हैं।
हस्तरेखीय ज्योतिष कहता है जिनकी हथेली में शनि पर्वत सपाट होता है वे जीवन को अधिक मूल्यवान नहीं समझते हैं। इस प्रकार की स्थिति जिनकी हथेली में होता है वे विशेष प्रकार की सफलता और सम्मान प्राप्त करते हैं। यह भी मान्यता है कि जिनकी हथेली में यह पर्वत असामान्य रूप से उभरा होता है वे अत्यंत भाग्यवादी होते हैं और अपने भाग्य के बल पर ही जीवन में तरक्की करते हैं। अगर इस पर्वत पर कई रेखाएं है तो यह कहा जाता है कि व्यक्ति में साहस की कमी रहती है और वह काम-वासना के प्रति आकृष्ट रहता है।
सूर्य पर्वत : सूर्य पर्वत अनामिका उंगली के जड़ में स्थित होता है इसे बुद्धिमानी , दयालुता, उदारता और सफलता का स्थान माना जाता है। जिनकी हथेली में यह पर्वत उभरा होता है उनका दिमाग तेज होता है। वे लोगों की सहायता और मदद करने के लिए तत्पर रहते हैं व जीवन में सफलता हासिल करते हैं। उभरा हुआ सूर्य पर्वत यश और प्रसिद्धि को भी दर्शाता है। उन्नत सूर्य पर्वत होने से लोगों के साथ कदम से कदम मिलाकर काम करने वाले होते हैं। खुशमिज़ाज और आत्मविश्वासी होते हैं। यह पर्वत अविकसित होने पर सौन्दर्य के प्रति लगाव रखते हैं परंतु इस क्षेत्र में सफलता नहीं मिलती है।
अपोलो पर्वत अत्यंत उन्नत होने पर कहा जाता है कि खुशामद पसंद होते हैं और अपने आप पर जरूरत से अधिक गर्व महसूस करते है जिससे लोग घमंडी समझते हैं। इस पर्वत का सपाट या धंसा होना शुभ संकेत नहीं माना जाता है इस स्थिति में इनकी सोच सीमित होती है जिससे ये मूर्खतापूर्ण कार्य कर जाते हैं। इनका जीवन स्तर भी सामान्य रहता है।
बुध पर्वत : सबसे छोटी उंगली यानी कनिष्ठा की जड़ में बुध ग्रह का स्थान होता है यानी यहां बुध पर्वत स्थित होता है। बुध पर्वत को भौतिक सुख, खुशहाली और धन सम्पत्ति का स्थान कहा जाता है। जिनकी हथेली में बुध पर्वत उच्च स्थिति में होता है वे अविष्कार व नई चीजो की तलाश के प्रति उत्सुक रहते हैं। हथेली में बुध उभरा होने से व्यक्ति मनोविज्ञान समझने वाला होता है जिससे लोगों को आसानी से प्रभावित कर पाता है। बुध पर्वत उन्नत होने से व्यक्ति यात्रा का शौकीन होता है और काफी यात्राएं करता है। जिनकी हथेली में यह पर्वत बहुत अधिक उभरा होता है वे काफी चालाक, धूर्त और छल कपट में उस्ताद होता हैं।
बुध पर्वत अगर असामान्य रूप से उभरा हुआ है साथ ही इस पर सम चतुर्भुज का चिन्ह दिख रहा है तो यह संकेत है कि व्यक्ति कानून का उलंघन करेगा और अपराध की दुनियां में नाम कमाएगा। अविकसित बुध पर्वत के होने से भी व्यक्ति जुर्म की दुनिया से रिश्ता कायम कर सकता है। जिनकी हथेली में यह पर्वत अस्पष्ट या सपाट है उन्हें गरीबी का मुंह देखना पड़ता है।
चन्द्र पर्वत : चन्द्र पर्वत का स्थान हथेली में अंगूठे के दूसरी ओर कलाई के नीचे होता है। इसे हस्तरेखीय ज्योतिष में कल्पना, कला, उदारता और उत्साह का स्थान माना जाता है। जिनकी हथेली में चन्द्र पर्वत विकसित होता है वे सौन्दर्योपासक होते हैं इनका हृदय कोमल और संवेदनशील होता है। ये नित नई कल्पना और ख्वाबो के ताने बाने बुनते रहते हैं। ये कला के किसी भी क्षेत्र जैसे लेखन, चित्रकारी, संगीत आदि में पारंगत होते हैं।
चन्द्रपर्वत अत्यधिक उन्नत होने से मन की चंचलता अधिक रहती है, जिसके कारण व्यक्ति में उतावलापन अधिक देखा जाता है। चन्द्र पर्वत की यह स्थिति व्यक्ति को शंकालु और मानसिक तौर पर बीमार बना देती है। यह स्थिति जिनकी हथेली में पायी जाती है वे अक्सर सिर दर्द से परेशान रहते हैं। समुद्रिक शास्त्र के मुताबिक अविकसित चन्द्र पर्वत होने से व्यक्ति हवाई किले बनाने वाला होता है। जिनकी हथेली में चन्द्र की ऐसी स्थिति होती है उनमें बहुत अधिक भावुकता पायी जाती है और कल्पना लोक में खोये रहने के कारण इनका कोई भी काम पूरा नहीं हो पाता है।
जिनकी हथेली में चन्द्र पर्वत सपाट होता है वे भावना रहित होते हैं, ये धन और भौतिक सुख के पीछे भागते हैं। इस तरह की हथेली जिनकी होती है वे जीवन में प्रेम को गौण समझते हें और लड़ाई झगड़े में आगे रहते हैं।
शुक्र पर्वत : अंगूठे के नीचे जीवन रेखा से घिरा हुआ भाग शुक्र का स्थान होता है जिसे शुक्र पर्वत कहते हैं। यह पर्वत विकसित होने पर सम्मान की प्राप्ति होती है और जीवन में आनन्द एवं खुशहाली बनी रहती है। सामुद्रिक ज्योतिष के अनुसार उन्नत शुक्र पर्वत होने से व्यक्ति सुखी होता है। ये ईश्वर पर यकीन नहीं करते हैं। अविकसित शुक्र होने से व्यक्ति में कायरता रहती है और ये काम वासना से पीडि़त रहते हैं।
आमतौर पर दूसरे पर्वत अगर जरूरत से अधिक विकसित हों तो नुकसान होता है परंतु शुक्र के बहुत अधिक विकसित होने पर नुकसान नहीं होता है। यह पर्वत अत्यधिक उन्नत होने से व्यक्ति साहसी होता है एवं स्वस्थ रहता है। यह स्थिति जिनकी हथेली में पायी जाती है वह सभ्य होते हैं और अपने गुणों से दूसरों को प्रभावित करते हैं। शुक्र पर्वत हथेली में सपाट होने से व्यक्ति अकेला रहना पसंद करता है व पारिवारिक जीवन से लगाव नहीं रखता है। इस तरह की स्थिति जिस हथेली में होती है वे कठिनाईयों भरा जीवन जीते हैं और धन की कमी से परेशान रहते हैं।
मंगल पर्वत : हथेली में दो स्थान पर मंगल पर्वत होता है। एक उच्च का पर्वत होता है और दूसरा नीच का होता है। उच्च मंगल पर्वत हृदय रेखा जहां से शुरू होती उसके ऊपर स्थित होता है जबकि नीच का मंगल जहां से जीवन रेखा शुरू होती है वहां से कुछ ऊपर होता है। जिनकी हथेली में मंगल उभरा होता है वे साहसी, बेखौफ और शक्तिशाली होते हैं। मंगल पर्वत उन्नत होने पर व्यक्ति दृढ़ विचारों वाला होता है और इनके जीवन में संतुलन देखा जाता है। यही पर्वत जिनकी हथेली में बहुत अधिक उन्नत होता है वे मार पीट, लड़ाई-झगड़े में उस्ताद होते हैं। मंगल की यह स्थिति व्यक्ति को अत्याचारी बनाता है और जुर्म की दुनियां की ओर ले जाता है।
वैसे व्यक्ति जिनकी हथेली में मंगल पर्वत सामान्य रूप से उभरा होता है व लालिमा लिये होता है वे जीवन में अच्छी सफलता प्राप्त करते हैं और उच्च पद पर आसीन होते हैं। जिनकी हथेली पर मंगल पर्वत का स्थान सपाट होता है वह कायर और डरपोक होते हैं ऐसा हस्त रेखीय ज्योतिष कहता है। मंगल पर्वत पर गुणा का चिन्ह होना यह संकेत देता है कि व्यक्ति की मौत किसी संघर्ष के दौरान होगी जबकि टेढ़ी मेढ़ी रेखा बताती है कि व्यक्ति किसी दुर्घटना का शिकार होगा।
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