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14 सितंबर को ऐसे बैठाएं गणपति! शुभ मुहूर्त से विसर्जन तक पूरी पूजा विधि 🚩

14 सितंबर को ऐसे बैठाएं गणपति! शुभ मुहूर्त से विसर्जन तक पूरी पूजा विधि 🚩

गणेश चतुर्थी 2026: बप्पा की स्थापना से विसर्जन तक संपूर्ण पूजा विधि

गणेश चतुर्थी 2026 इस बार 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी। चतुर्थी तिथि 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे से 15 सितंबर सुबह 7:44 बजे तक रहेगी। Raipur में गणपति स्थापना और मध्यान्ह पूजा का शुभ समय लगभग सुबह 11:15 बजे से दोपहर 1:43 बजे तक है। अलग-अलग पंचांग और स्थान के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर संभव है।

इस बार गणेश चतुर्थी पर रवि योग, ब्रह्म योग और इंद्र योग जैसे शुभ संयोग बताए जा रहे हैं। साथ ही 14 सितंबर को हरतालिका तीज और गणेश चतुर्थी का एक ही दिन आना भी विशेष और दुर्लभ संयोग माना जा रहा है।

गणपति की मूर्ति कैसी हो?

घर के लिए सामान्यतः वाममुखी गणपति, यानी भक्त की ओर से देखने पर सूंड बाईं तरफ मुड़ी हुई, सरल और शुभ मानी जाती है। दाईं ओर मुड़ी सूंड वाली प्रतिमा को अधिक विशेष नियमों वाली माना जाता है, इसलिए उसे घर में रखने से पहले योग्य आचार्य से विधि समझना बेहतर है। मूर्ति अखंड, सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल मिट्टी की हो तो उत्तम। मूषक और मोदक का होना भी पारंपरिक रूप से शुभ माना जाता है।

स्थापना के लिए कौन-सा आसन?

एक साफ और ऊंची लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला स्वच्छ वस्त्र बिछाएं। उस पर स्वास्तिक बनाकर अक्षत रखें और गणपति को सम्मानपूर्वक विराजित करें। पूजा स्थान साफ, शांत और व्यवस्थित रखें।

बप्पा को कौन-सा भोग लगाएं?

गणपति को मोदक, लड्डू, गुड़, नारियल, फल और दूर्वा अर्पित कर सकते हैं। 21 दूर्वा अर्पित करने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है। भोग सात्विक और श्रद्धा से तैयार होना चाहिए।

कौन-सा मंत्र जपें?

सबसे सरल और व्यापक रूप से जपा जाने वाला मंत्र है:

“ॐ गं गणपतये नमः।”

इसे 108 बार श्रद्धा से जप सकते हैं। गणेश अथर्वशीर्ष का पाठ भी परंपरागत रूप से किया जाता है। मंत्रों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण है श्रद्धा, उच्चारण की शुद्धता और मन की एकाग्रता।

आरती कब और कैसे करें?

स्थापना के दिन पूजा पूर्ण होने के बाद आरती करें। इसके अलावा प्रतिदिन सुबह और शाम अपनी परंपरा के अनुसार आरती की जा सकती है। “जय गणेश देवा” जैसी प्रचलित आरती श्रद्धा से करें। आरती के समय पूरा परिवार साथ खड़ा होकर बप्पा का स्मरण करे। दीप को श्रद्धा से घुमाएं और अंत में सभी को आरती दें।

क्या जरूर करें?

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