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इशान कोण में क्या होना चाहिए व् महत्त्व

इशान कोण में क्या होना चाहिए व् महत्त्व
वास्तु का अर्थ हमारी भाषा में सिर्फ इतना ही है की वास्तव में ऊर्जा का प्रवाह सही दिशा में हो; क्योंकि पंच तत्वों में निर्मित शरीर को यतिपिंडे तत्व्ब्रह्मंडे के सिधांत के अनुसार देखें तो जो कुछ इस ब्रह्माण्ड में है, वह इस शरीर में मौजूद है| खगोल के अनुसार ब्रह्माण्ड अग्नि,पृथ्वी,वायु,जल व् आकाश तत्व से निर्मित है| जब वही पांच तत्व शरीर के अनुरूप हो तोह व्यक्ति का मन,मष्तिष्क व् शरीर रोगग्रस्त हो सकता है व् व्यक्ति अनेकानेक कारणों के लिए कर्ज लेता है| हम मुख्य दिशायों के दोष से देखें की व्यक्ति किस कार्य हेतु कर्ज लेगा|

इशान कोण

इशान कोण के देवता इश्वर व स्वामी ग्रह बृहस्पति को माना जाता है| गुरु ज्ञान,कोष विद्या एवं परिवार का कारक कहा जाता है| यदि इशान कोण में कही दोष आ जाये तो उपरोक्त कारकों में कमी होगी, व्यक्ति आर्थिक सम्पन्नता आभाव से पीड़ित होगा व् उसके कन्या संतति अतिस्तिक होगी| व्यवसाय में लगातार कार्य करने के उपरांत भी वांछित परिणाम प्राप्त नहीं होगा,इन कारकों की पूर्ति हेतु व्यक्ति कर्ज लेता है|

यदि हम स्थूलता से देखें तोह इस दोष के कारणवश व्यक्ति कन्या के विवाह के लिए,धार्मिक अनुष्ठान हेतु,शिक्षा के लिए,भाई बहनों के कारणवश,व्यवसाय में उन्नति के कारण या आपूर्ति हेतु अथवा कई बार सामाजिक दिखावे के कारण कर्ज लेता है| हमने अनुभव से यह भी महसूस किया है की कई बार इस कोण के दोष से वंश वृद्धि नहीं होती| संतान कहने में नहीं होती,पत्नी रोगिणी होती है या अनावश्यक कलह होती है| व्यक्ति ज्योतिषियों या तांत्रिकों में भी व्यय करने हेतु कर्ज लेता है|

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