सहस्रनाम उपासना हेतु इष्ट-देव के सहस्र अर्थात् हजार नामों का संकल्प इस स्तोत्र में होता है।ये हजार नाम ही विविध प्रकार की पूजाओं में एकत्रित पाठ के रूप् में प्रयोग में लाए जाते हैं। ये हजार नाम मन्त्रों से युक्त होते हैं तथा इनमें देवता के गुण, कर्म, स्वभाव का वर्णन आता है। अतः इनकी स्वतन्त्र उपासना भी होती है। ये मन्त्ररूप् में होते हैं।
पटल
इसमें देवता का महत्व, इच्छित कार्य की सिद्धि के हेतु जप सूचना एवं उपयोगी सामग्री का निर्देश होता है।
स्तोत्र
देवता की आराधना की जाती है उसकी स्तुति का संग्रह ही स्तोत्र होता है। प्रधान रूप से स्तोत्रों में देवता का गुणगान और प्रार्थना होती है। स्तोत्रों में यंत्र बनाने का विधान, औषधि प्रयोग, मन्त्र प्रयोग आदि भी होते है।
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