धनतेरस 2026: पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, खरीदारी, यम दीपदान और कथा – संपूर्ण जानकारी
धनतेरस कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है, जो दिवाली से दो दिन पहले आती है। “धनतेरस” शब्द “धन” और “तेरस” (त्रयोदशी) से मिलकर बना है। इस दिन को “धनत्रयोदशी” और “धन्वंतरि जयंती” भी कहा जाता है।
पंचांग के अनुसार 2026 में धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को पड़ने की संभावना है। त्रयोदशी तिथि कभी-कभी दो दिनों में बंटी होती है, इसलिए सही तारीख अपने स्थानीय पंचांग से अवश्य जांच लें।
धनतेरस 2026 का अनुमानित मुहूर्त
नीचे दिया गया समय केवल एक अनुमान है। यह पक्का समय नहीं है, और आपके शहर में यह आगे-पीछे हो सकता है।
अपनी कुंडली पर जवाब चाहिए?
AstroShrine ऐप पर अनुभवी ज्योतिषियों से चैट या कॉल करें — हिंदी और English में।
| विवरण | अनुमानित समय |
|---|---|
| धनतेरस पूजा का संभावित मुहूर्त | शाम लगभग 6:00 से 8:00 बजे के बीच |
| प्रदोष काल | सूर्यास्त के बाद लगभग ढाई घंटे तक |
| यम दीपदान का संभावित समय | प्रदोष काल में, सूर्यास्त के बाद |
| खरीदारी का शुभ समय | दिनभर, विशेष रूप से प्रदोष काल में |
सही और सटीक मुहूर्त जानने के लिए अपने शहर का पंचांग या अपने पंडित जी से अवश्य पुष्टि करें।
धनतेरस का महत्व
भगवान धन्वंतरि: पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी के दिन भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे आयुर्वेद के जनक और देवताओं के वैद्य माने जाते हैं। इसलिए इस दिन उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु के लिए उनकी पूजा की जाती है। उनके हाथ में कलश होने के कारण ही इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है।
माता लक्ष्मी और कुबेर जी: धनतेरस पर धन की देवी माता लक्ष्मी और धन के देवता कुबेर जी की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इससे घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।
यमराज: इस दिन शाम को मृत्यु के देवता यमराज के नाम से दीपदान किया जाता है। मान्यता है कि इससे परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा होती है।
धनतेरस की कथाएं
राजा हिम के पुत्र और यमराज की कथा
प्राचीन समय में राजा हिम के पुत्र की कुंडली में लिखा था कि विवाह के चौथे दिन सांप के डसने से उसकी मृत्यु हो जाएगी। जब उस राजकुमार का विवाह हुआ, तो उसकी पत्नी को यह बात पता चली। चौथे दिन की रात उसने अपने पति को सोने नहीं दिया। उसने कमरे के द्वार पर अपने सारे गहने, सोने-चांदी के सिक्कों का ढेर लगा दिया और चारों ओर दीपक जला दिए। फिर वह रातभर पति को कहानियां और गीत सुनाती रही।
जब यमराज सांप के रूप में वहां पहुंचे, तो दीपकों और गहनों की चमक से उनकी आंखें चौंधिया गईं। वे कमरे में प्रवेश नहीं कर सके और गहनों के ढेर पर बैठकर रातभर गीत सुनते रहे। सुबह होने पर वे चुपचाप लौट गए, और राजकुमार के प्राण बच गए। तभी से धनतेरस की शाम यमराज के लिए दीपदान करने की परंपरा शुरू हुई।
माता लक्ष्मी और किसान की कथा
एक बार माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ पृथ्वी पर आईं। भगवान विष्णु ने उन्हें एक स्थान पर रुकने और दक्षिण दिशा की ओर न देखने को कहा। लेकिन माता लक्ष्मी उत्सुकता में उनके पीछे चल पड़ीं और एक किसान के खेत में पहुंचकर वहां के फूल और गन्ने तोड़ लिए।
भगवान विष्णु ने इस भूल के दंड के रूप में उन्हें बारह वर्ष तक उस गरीब किसान के घर रहने को कहा। माता लक्ष्मी के रहने से किसान का घर धन-धान्य से भर गया। बारह वर्ष बाद जब भगवान विष्णु उन्हें लेने आए, तो किसान ने उन्हें जाने नहीं दिया। तब माता लक्ष्मी ने कहा कि जो व्यक्ति त्रयोदशी के दिन घर को साफ करके, रात में घी का दीपक जलाकर उनकी पूजा करेगा, उसके घर वे सदा वास करेंगी।
धनतेरस पर क्या खरीदें
- सोना और चांदी: गहने, सिक्के या लक्ष्मी-गणेश की छपाई वाले चांदी के सिक्के सबसे शुभ माने जाते हैं।
- पीतल और तांबे के बर्तन: भगवान धन्वंतरि के कलश से जुड़े होने के कारण पीतल के बर्तन खरीदना विशेष शुभ है।
- झाड़ू: मान्यता है कि नई झाड़ू घर से दरिद्रता को बाहर करती है और माता लक्ष्मी का स्वागत करती है।
- साबुत धनिया: इसे पूजा में चढ़ाकर बाद में गमले या खेत में बोया जाता है, जो धन वृद्धि का प्रतीक है।
- लक्ष्मी-गणेश की नई प्रतिमा: दिवाली पूजन के लिए इसी दिन लाई जाती है।
- गोमती चक्र और कौड़ियां: इन्हें पूजा के बाद तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखा जाता है।
- मिट्टी के दीये: दिवाली के लिए नए दीये इसी दिन खरीदे जाते हैं।
- नया वाहन, इलेक्ट्रॉनिक सामान या संपत्ति: आज के समय में कई लोग शुभ मुहूर्त में ये भी खरीदते हैं।
आप इस लेख का आधा भाग पढ़ चुके हैं
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें। खाता बनाना पूरी तरह निःशुल्क है – Google या मोबाइल OTP से, एक मिनट में।
लॉगिन करें और आगे पढ़ें नया यूज़र? निःशुल्क खाता बनाएँआगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें
इस लेख का 50% भाग आपने निःशुल्क पढ़ लिया। बाकी लेख, और Future For You के सभी ज्योतिष, वास्तु व राशिफल लेख पढ़ने के लिए बस एक बार लॉगिन करें।
- पूरी तरह निःशुल्क – कोई शुल्क नहीं
- Google से एक क्लिक, या मोबाइल OTP
- लॉगिन के बाद सीधे इसी लेख पर वापस