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हनुमान जी कि उपासना के नियम: क्या करें, क्या न करें? जानिए पूरी गाइड…!

हनुमान जी कि उपासना के नियम: क्या करें, क्या न करें? जानिए पूरी गाइड…!

हनुमान जी की पूजा के नियम ?

श्रीरामदूत हनुमान” भारतीय संस्कृति में शक्ति, साहस, बुद्धि, भक्ति और संकटमोचन का प्रतीक माने जाते हैं। हनुमान जी की पूजा करने से न सिर्फ भय, बाधाएँ और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैं, बल्कि जीवन में आत्मविश्वास, साहस और स्थिरता भी आती है। हनुमान जी की कृपा से शनि, राहु, केतु और मंगल संबंधी दोष भी शांत होते हैं।

परंतु हनुमान जी की पूजा के लिए कुछ विशेष नियम और मर्यादाएँ बताई गई हैं। इन नियमों का पालन न करने पर पूजा का पूर्ण लाभ नहीं मिलता। इसी के साथ कुछ लोगों को हनुमान पूजा न करने या संभलकर करने की सलाह दी गई है।

1. हनुमान जी की पूजा का महत्व

हनुमान जी की भक्ति इतनी शक्तिशाली मानी गई है कि उन्हें सजीव देवता कहा गया है। मान्यता है कि वह आज भी पृथ्वी पर विद्यमान हैं और अपने भक्तों की रक्षा करते हैं।
हनुमान पूजा से—

  • भय और असुरक्षित भाव दूर होता है

  • आत्मबल और मानसिक शक्ति बढ़ती है

  • ग्रह दोष शान्त होते हैं

  • बाधाएँ और संकट दूर होते हैं

  • शत्रु बाधा खत्म होती है

  • धन, कार्य में रुकावट और तनाव कम होता है

  • जीवन में स्थिरता और सफलता मिलती है

इसलिए हनुमान पूजा को विशेष फलदायी माना गया है।

2. हनुमान जी की पूजा के प्रमुख नियम

(1) शुद्धता और स्वच्छता अनिवार्य है

हनुमान जी ब्रह्मचारी देवता हैं, इसलिए पूजा करने वाला व्यक्ति—

  • शारीरिक रूप से स्वच्छ

  • मन से पवित्र

  • घर साफ-सुथरा

  • पूजा स्थान शुद्ध
    रखे, तभी पूजा का फल मिलता है।

सुबह स्नान के बाद ही हनुमान पूजा करनी चाहिए।

(2) मंगलवार और शनिवार को विशेष पूजन

हनुमान जी की विशेष पूजा मंगलवार और शनिवार को की जाती है। इन दिनों—

  • हनुमान चालीसा

  • सुंदरकांड

  • बजरंग बाण

  • हनुमानाष्टक
    का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है।

(3) लाल या नारंगी वस्त्र पहनना शुभ माना गया है

भक्त चाहें तो—

  • लाल

  • केसरी

  • नारंगी
    रंग के वस्त्र पहनकर पूजा करें। यह रंग शक्ति और उत्साह का प्रतीक है।

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(4) हनुमान जी को तेल और सिंदूर का चोला चढ़ाना

हनुमान जी को—

  • चमेली का तेल

  • लाल सिंदूर
    से चोला चढ़ाने की परंपरा है।
    मान्यता है कि यह मंगल दोष, शनि बाधा और नज़र दोष को दूर करता है

(5) भूले से भी टांके वाले या अशुद्ध स्थान से सिंदूर न लें

हनुमान जी का सिंदूर मंदिर के विग्रह से ही लेना चाहिए।
बाजार का सिंदूर या नकली सिंदूर चढ़ाना मना है।

(6) हनुमान जी की पूजा में तामसिक वस्तुओं का प्रयोग वर्जित

पूजा में कभी भी—

  • शराब

  • मांस

  • अंडा

  • सिगरेट

  • प्याज़-लहसुन
    का स्पर्श नहीं होना चाहिए।
    इनका सेवन करने वाला व्यक्ति पूजा से पहले स्नान और शुद्धिकरण करे।

(7) श्रीराम का नाम अवश्य लें

हनुमान जी “रामभक्त” हैं।
उनकी पूजा में हमेशा—
“जय श्रीराम”
का स्मरण जरूरी माना गया है।
हनुमान जी की आरती के साथ श्रीराम की आरती करने से पूजा पूर्ण होती है।

(8) दीपक बाएँ ओर और धूप दाएँ ओर

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार—

  • दीपक: भगवान के बाएँ

  • धूप: भगवान के दाएँ
    रखना चाहिए।
    इससे पूजा ऊर्जा संतुलित रहती है।

(9) पूजा रात में न करें—संभव हो तो शाम की संध्या पूजा करें

शाम को दीपक या हनुमान चालीसा पढ़ना शुभ माना गया है।
रात 9 बजे के बाद हनुमान पूजा वर्जित मानी जाती है।

(10) स्त्रियाँ मासिक धर्म में पूजा न करें

सनातन परंपरा के अनुसार माहवारी के दिनों में पूजा करना निषेध है।
इन दिनों हनुमान चालीसा सुन सकती हैं, परंतु पूजन नहीं करना चाहिए।

(11) हनुमान मंदिर में प्रवेश से पहले लौंग-इलायची का सेवन न करें

कुछ परंपराओं के अनुसार—

  • पान

  • तंबाकू

  • इलायची

  • गुटखा
    का सेवन करके मंदिर जाना वर्जित है।
    मुँह साफ करके ही मंदिर में प्रवेश करें।

(12) हनुमान जी के सामने कभी झूठ, छल या अपवित्र विचार न लाएँ

हनुमान जी “सत्य और पवित्रता” के देवता हैं।
अशुद्ध विचार और छल-कपट पूजा का प्रभाव कम कर देते हैं।

3. हनुमान जी की पूजा में क्या-क्या चढ़ाएँ?

1. लाल पुष्प (गेंदा, गुड़हल)

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