धनतेरस पर ना करें ये गलती,वरना रुठ जाएंगी लक्ष्मी मां
धनतेरस के दिन यम देव की पूजा जरुर करनी चाहिए। मान्यता है कि इससे अकाल मृत्यु का खतरा टल जाता है। इसलिए धनतेरस की रात्रि में घर के दरवाजे पर यम का दीया जलाया जाता है। इसकी सही दिशा का भी ध्यान रखें।हिंदू पंचांग के मुताबिक कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी वाले दिन धनतेरस मनाया जाता है।
इस दिन भगवान धन्वतरि, भगवान कुबेर और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है। दीपावली का त्योहार इसी दिन से शुरु हो जाता है। धनतेरस के दिन खास तौर पर यमराज की पूजा का विशेष महत्व होता है। परिवार के सदस्यों की लंबी आयु और आकस्मिक घटनाओं से बचने के लिए इस दिन यमराज की पूजा की जाती है और उनके लिए दीपदान किया जाता है। इस साल धनतेरस 22 अक्टूबर और 23 अक्टूबर, दोनों ही दिन मनाया जा रहा है।
विधि और महत्व
बहुत प्राचीन काल से धनतेरस के दिन यम के नाम से दीपदान की परंपरा चली आ रही है। इस दिन यमराज के लिए आटे का चौमुखा दीपक बना जाता है। रात के समय उसमें चार बत्तियां और तेल डालकर जलाया जाता है और घर के मुख्य द्वार पर रखा जाता है। ध्यान रहे, इस दीपक की दिशा दक्षिण की ओर होनी चाहिए। दरअसल यम दक्षिण दिशा के स्वामी होते हैं और इसी दिशा से प्रवेश करते हैं। दरवाजे पर दीया उन्हें प्रसन्न करता है और वो लंबी आयु प्रदान करते हैं। धनतेरस के दिन यमराज के नाम से दीपदान किया जाता है. इस परंपरा के पीछे एक पौराणिक कथा जुड़ी हुई है जिसके अनुसार एक बार यमदूत ने यमराज से पूछा कि ‘क्या अकाल मृत्यु से बचने का कोई उपाय नहीं है?’ इस पर यमराज बोले – एक उपाय है। अकाल मृत्यु से छुटकारा पाने के लिए व्यक्ति को धनतेरस के दिन विधिपूर्वक पूजा और दीपदान करना चाहिए। इससे अकाल मृत्यु का खतरा टल जाता है। तभी से धनतेरस पर यमराज के नाम से दीपदान करने की परंपरा है।
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