दिवाली 2026: दीये कितने और कहां-कहां जलाएं? जानिए पूरी जानकारी
दिवाली 2026 कब है
दिवाली कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। पंचांग के अनुसार 2026 में दिवाली 8 नवंबर, रविवार को पड़ने की संभावना है। अमावस्या तिथि कभी-कभी दो दिनों में बंटी होती है, इसलिए सही तारीख अपने स्थानीय पंचांग से अवश्य जांच लें।
दिवाली 2026 का अनुमानित मुहूर्त
नीचे दिया गया समय केवल एक अनुमान है। यह पक्का समय नहीं है, और आपके शहर में यह आगे-पीछे हो सकता है।
| विवरण | अनुमानित समय |
|---|---|
| लक्ष्मी पूजा का संभावित मुहूर्त | शाम लगभग 5:30 से 8:00 बजे के बीच (प्रदोष काल) |
| दीये जलाने का शुभ समय | सूर्यास्त के बाद, लक्ष्मी पूजा के समय या उसके तुरंत बाद |
सही और सटीक मुहूर्त जानने के लिए अपने शहर का पंचांग या अपने पंडित जी से अवश्य पुष्टि करें।
अपनी कुंडली पर जवाब चाहिए?
AstroShrine ऐप पर अनुभवी ज्योतिषियों से चैट या कॉल करें — हिंदी और English में।
दिवाली पर कितने दीये जलाएं
शास्त्रों में दीयों की कोई एक तय संख्या नहीं बताई गई है, और अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में अलग परंपराएं हैं। फिर भी लोक मान्यताओं में कुछ संख्याओं को शुभ माना जाता है:
- विषम संख्या: आमतौर पर दीयों की संख्या विषम (odd) रखना शुभ माना जाता है, जैसे 5, 7, 9, 11, 13, 21, 51 या 108।
- कम से कम 5 दीये: अगर आप कम दीये जला रहे हैं, तो कई लोग कम से कम पांच दीये जलाने की सलाह देते हैं – पूजा स्थल, मुख्य द्वार के दोनों ओर, तुलसी के पास और रसोई में।
- 11, 21 या 51 दीये: बहुत से परिवार इन संख्याओं में दीये जलाते हैं, ताकि घर के सभी मुख्य स्थान रोशन हो सकें।
- एक अखंड दीया: लक्ष्मी पूजा के स्थान पर एक बड़ा घी का दीया जलाया जाता है, जिसे कई परिवार पूरी रात जलाए रखते हैं। इसे अखंड दीपक कहते हैं।
असल में दीयों की संख्या से ज़्यादा ज़रूरी है श्रद्धा और यह कि घर का कोई भी कोना अंधेरा न रहे। अपने परिवार की परंपरा के अनुसार ही दीयों की संख्या तय करें।
दिवाली पर कहां-कहां दीये जलाएं
मान्यताओं के अनुसार दिवाली की रात घर के इन स्थानों पर दीया जलाना शुभ माना जाता है:
- पूजा स्थान: माता लक्ष्मी और गणेश जी के सामने सबसे पहले घी का दीया जलाएं। यही मुख्य दीपक होता है।
- मुख्य द्वार के दोनों ओर: घर के प्रवेश द्वार पर दोनों तरफ दीये रखें। माना जाता है कि इससे माता लक्ष्मी का स्वागत होता है।
- तुलसी के पास: तुलसी के पौधे के पास दीया जलाना बहुत शुभ माना जाता है।
- रसोई: रसोई में अन्नपूर्णा माता के नाम से एक दीया जलाएं, ताकि घर में अन्न की कभी कमी न हो।
- पानी के स्थान के पास: घड़े, पानी की टंकी या नल के पास एक दीया रखने की परंपरा है।
- आंगन और छत: आंगन, बालकनी और छत की मुंडेर पर दीयों की पंक्ति सजाएं।
- तिजोरी या धन रखने का स्थान: जहां धन या ज़रूरी कागज़ रखते हैं, उसके पास एक दीया रखें।
- घर के मंदिर या पास के मंदिर में: पास के किसी मंदिर में भी दीया जलाकर आना शुभ माना जाता है।
- पीपल के पेड़ के नीचे: कई लोग दिवाली की रात पीपल के पेड़ के नीचे दीया जलाते हैं।
- दुकान या कार्यस्थल: व्यापारी अपनी दुकान, गल्ले और बही-खातों के पास दीया जलाते हैं।
- गाड़ी और गौशाला: कई परिवार अपनी गाड़ी के पास और गौशाला में भी दीया रखते हैं।
- घर का कोई अंधेरा कोना: सीढ़ियां, स्टोर रूम या कोई ऐसा कोना जहां रोशनी कम रहती हो, वहां भी दीया रखें।
दीया जलाने की सही विधि
- दीये जलाने से पहले मिट्टी के दीयों को कुछ घंटे पानी में भिगोकर सुखा लें, इससे वे कम तेल सोखते हैं।
- सबसे पहले पूजा स्थान पर लक्ष्मी-गणेश के सामने घी का मुख्य दीया जलाएं।
- फिर इसी दीये की लौ से बाकी दीये जलाएं।
- इसके बाद मुख्य द्वार, तुलसी, रसोई और घर के बाकी स्थानों पर दीये रखें।
- दीया रखते समय मन में माता लक्ष्मी का स्मरण करें और घर की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
कौन सा तेल और बाती इस्तेमाल करें
घी: पूजा स्थान के मुख्य दीये के लिए गाय का घी सबसे शुभ माना जाता है।
आप इस लेख का आधा भाग पढ़ चुके हैं
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें। खाता बनाना पूरी तरह निःशुल्क है – Google या मोबाइल OTP से, एक मिनट में।
लॉगिन करें और आगे पढ़ें नया यूज़र? निःशुल्क खाता बनाएँआगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें
इस लेख का 50% भाग आपने निःशुल्क पढ़ लिया। बाकी लेख, और Future For You के सभी ज्योतिष, वास्तु व राशिफल लेख पढ़ने के लिए बस एक बार लॉगिन करें।
- पूरी तरह निःशुल्क – कोई शुल्क नहीं
- Google से एक क्लिक, या मोबाइल OTP
- लॉगिन के बाद सीधे इसी लेख पर वापस