वाराह चतुदर्शी व्रत –
आष्विन मास की शुक्ल पक्ष की चतुदर्शी को वाराह चतुर्दषी व्रत किया जाता है। भूत-प्रेत, पाप मुक्ति तथा सुख ऐष्र्वय प्राप्ति हेतु वाराह चतुर्दशी का व्रत भगवान विष्णु के वाराह स्वरूप की प्रियता के लिए किया जाता है। इस दिन निराहर रहते हुए भगवान वाराह की प्रतिष्ठा कर विधिवत पूजा कर धतूरा, बेलपत्र, धूप, दीप चंदन आदि पदार्थो से आरती उतारकर भोग लगायें।
आष्विन मास में चतुर्दषी को प्रेत बाधा अथवा आकस्मिक हानि या कष्ट जिसका कारण भूत-प्रेत की छाया को माना जाता है हेतु जो नर-नारी इस व्रत का पालन करते हुए भक्तिपूर्वक मेरी पूजा करेंगे उनको स्वर्ग प्राप्त होगा। इस दिन जो भी किंचित मात्र भी मुझे स्मरण करेगा, उसे नजरदोष अथवा आकस्मिक हानि से राहत प्राप्त होकर सुख तथा शांति प्राप्त होगी।
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