Know Today Plan Tomorrow Live Better
Home Articles Curiosity
Curiosity

शांति की चाह और हिंसा की राह ये किसके सपनो का पाकिस्तान

शांति की चाह और हिंसा की राह ये किसके सपनो का पाकिस्तान

पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र या सिर्फ पाकिस्तान, भारत के पश्चिम में स्थित एक इस्लामी गणराज्य है। यहाँ की प्रमुख भाषाएँ उर्दू, पंजाबी, सिंधी, बलूची और पश्तो हैं। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद और अन्य महत्वपूर्ण नगर कराची व लाहौर हैं। पाकिस्तान के चार सूबे हैं पंजाब, सिंध, बलोचिस्तान और ख़ैबर-पख्तूनख्वा। कबाइली इलाके और इस्लामाबाद भी पाकिस्तान में शामिल हैं। पाकिस्तान का जन्म सन् 1947 में भारत के विभाजन के फलस्वरूप हुआ था। सर्वप्रथम सन् 1930 में कवि (शायर) मुहम्मद इकबाल ने द्विराष्ट्र सिद्धान्त का जिक्र किया था। उन्होंने भारत के उत्तर-पश्चिम में सिन्ध, बलूचिस्तान, पंजाब तथा अफगान (सूबा-ए-सरहद) को मिलाकर एक नया राष्ट्र बनाने की बात की थी। सन् 1933 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के छात्र चौधरी रहमत अली ने पंजाब, सिन्ध, कश्मीर तथा बलोचिस्तान के लोगों के लिए पाक्स्तान (जो बाद में पाकिस्तान बना) शब्द का सृजन किया। सन् 1947 से 1972 तक पाकिस्तान दो भागों में बंटा रहा- पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान। दिसम्बर, सन् 1971 में भारत के साथ हुई लड़ाई के फलस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना और पश्चिमी पाकिस्तान, पाकिस्तान रह गया।
अब बात करे यदि भारत की तो, भारत के अधिकतर देशों के साथ औपचारिक राजनयिक सम्बन्ध हैं। जनसंख्या की दृष्टि से यह दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्रात्मक व्यवस्था वाला देश भी है और इसकी अर्थव्यवस्था, विश्व की बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। बात की जाए अगर भारत और पाकिस्तान के आपसी संबंध की तो, ज्यादा बेहतर नहीं रहे हैं। दोनों देशों के संबंध हमेशा से ही ऐतिहासिक और राजनैतिक मुद्दों कि वजह से तनाव में रहे हैं। इस तनाव की मूल वजह भारत से पाकिस्तान का विभाजन है। ”कश्मीर-विवाद इन दोनों देशों को आज तक उलझाए हुये है और दोनों देश कई बार इस विवाद को लेकर सैनिक कार्रवाई कर चुके हैं। इन देशों में सीमा को लेकर निरंतर तनाव मौजूद रहता है, हालांकि दोनों ही देश एक दूजे के इतिहास, सभ्यता, भूगोल और अर्थव्यवस्था से जुड़े हुए हैं।
”एक बड़े क्षेत्र के बहुसंख्यकों को उनकी इच्छा के विपरीत एक ऐसी सरकार के शासन में रहने के लिए बाध्य नहीं किया सकता, जिसमें दूसरे समुदाय के लोगों का बहुमत हो और इसका एकमात्र विकल्प है विभाजन…। यह कथन था अंतिम अंग्रेज वायसराय, लॉर्ड माउंटबेटन का। इन शब्दों के साथ ही भारत में ब्रिटेन के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन ने घोषणा की थी कि ब्रिटेन एक देश को नहीं बल्कि दो देश को स्वतंत्रता देने जा रहा है। यह बात उस समय की है जब भारत आजाद नहीं हुआ था। १९४० के बाद जब आजादी पुख्ता होने लगी, हिन्दुओं और मुस्लिमों के आपसी स्वार्थ आपस में टकराने लगे। इसके बाद गुटबाजियाँ शुरू हो गईं और अपने-अपने समुदाय के नेता चुन लिये गए। परिणाम यह हुआ कि १९४७ के आते-आते यह मुद्दा इस मुकाम पर आ गया कि भारत और पाकिस्तान का अलग होना समय की मांग हो गई। माउंटबेटन ने अपना यह बयान 3 जून 1947 को दिया था और उसके 10 सप्ताह बाद ही उन्होंने दोनों देशों के स्वतंत्रता दिवस समारोह में भाग भी लिया।
14 अगस्त को कराची में वे, स्पष्ट मुस्लिम पहचान के साथ गठित राष्ट्र के गवाह बने और इसके अगले दिन दिल्ली में भारत के पहले स्वतंत्रता दिवस समारोह में हिस्सा लिया। भारत की आबादी पाकिस्तान की तीन गुनी थी और ज़्यादातर लोग हिंदू थे। ब्रिटिश जज रैडक्लिफ को दोनों देशों के बीच सीमा का निर्धारण करने का दायित्व सौंपा गया था। रैडक्लिफ न तो इससे पहले भारत आए थे और न ही इसके बाद कभी आए। इसके बावजूद उन्होंने दोनों देशों के बीच जो सीमारेखा खींची उससे करोड़ों लोग अंसतुष्ट हो गए। जल्दबाजी में किए गए इस विभाजन ने 20वीं शताब्दी की सबसे बड़ी त्रासदियों में से एक को जन्म दिया। करोड़ों मुस्लिम सीमा के एक तरफ और हिंदू-सिख दूसरी तरफ पहुँच गए। भारी संख्या में दोनों तरफ के लोगों को सीमा के पार जाना पड़ा। तनाव बढ़ा और सांप्रदायिक संघर्ष शुरू हो गए इसमें कितने लोग मारे गए इसका सही आँकड़ा कोई नहीं बता सकता। किंतु आजादी के दो दिन बाद ही जब यह घोषणा हो गई कि सीमाएं कहाँ होंगी तो पंजाब हिंसा की आग में जल उठा। इसके बाद से वर्षों से यह सीमा विवाद बहस का विषय बना हुआ है।
जम्मू-कश्मीर भारत और पाकिस्तान की सीमा पर मुस्लिम बहुल राज्य था लेकिन यह किस देश के साथ जुड़े ये फैसला जम्मू-कश्मीर के हिंदू शासक को करना था। आजादी के कुछ ही महीनों बाद कश्मीर को लेकर भारत-पाकिस्तान में युद्ध शुरू हो गया लेकिन इस विवाद का अब तक कोई हल नहीं निकल पाया। पाकिस्तान के भूगोल को लेकर भी गंभीर समस्या थी। इसके पूर्वी हिस्से में बंगाली बोलने वाले लोगों का बहुमत था और पश्चिमी हिस्से में पंजाबी बहुल लोग थे। पूर्वी हिस्से की जनसंख्या अधिक थी लेकिन सत्ता और प्रभाव पश्चिमी पाकिस्तान का अधिक था। वर्ष 1971 में भारतीय सेना ने पश्चिमी पाकिस्तान से आजादी के संघर्ष में पूर्वी पाकिस्तान के लोगों का साथ दिया और एक नए देश बांग्लादेश का जन्म हुआ।
भारत और पाकिस्तान में लगातार प्रतिद्वंद्विता बनी रही और इसकी वजह से दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय सहयोग कभी पनप नहीं पाया। भारत में आज भी बड़ी संख्या में मुस्लिम अल्पसंख्यक हैं, कुल आबादी का लगभग सातवां हिस्सा। इस वजह से पाकिस्तान से तनाव के कारण भारत की धर्मनिरपेक्ष जीवन पद्धति और धार्मिक सहिष्णुता झुलसती रही। 1980 के दशक के अंत में कश्मीर में अलगाववादी गतिविधि शुरू होने के बाद से दोनों देशों के बीच रिश्ते और भी खऱाब हो गए। पाकिस्तान लगातार कहता रहा है कि वह कश्मीर के अलगाववादियों को सिर्फ नैतिक समर्थन दे रहा है जबकि सच यह है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान, मुस्लिम चरमपंथियों को संगठित करने के साथ ही हथियार मुहैया करा रहा और प्रशिक्षण भी दे रहा है।
इतिहास के पन्नों में झाका जाए तो देखेंगे, भारत और पाकिस्तान, उस हिंसा के साए से निकलने के लिए निरंतर कोशिश करते रहे हैं जिसके कारण दोनों देशों का जन्म हुआ था। कश्मीर अधूरे विभाजन का एक पहलू भर है। दोनों देशों के बीच राष्ट्रीय पहचान बिल्कुल अलग हैं। इन सबके बावजूद भारत और पाकिस्तान थोड़ी झिझक और कभी-कभी दर्द के साथ ही रिश्तों में मिठास घोलने की कोशिश करते हैं। अगर यह सफल हो गया तो दक्षिण एशिया में 1947 के विभाजन की कड़वी यादें हमेशा के लिए ख़त्म हो जाएगी। इतिहास गवाह है कि भारत और पाकिस्तान को तीन युध्दों से बरबादी के अलावा कुछ और हासिल नहीं हुआ। भारत में रक्षा आवंटन पिछले साल की तुलना में करीब 12.5 फीसदी बढ़ाकर 2,29,000 करोड़ रुपये किया गया है। जबकि वहीं पिछले वर्ष के वित्तीय बजट में पाक का रक्षा बजट 627 अरब रुपए था और वर्ष 2014-15 के वित्तीय बजट में इसकी राशि बढ़ाकर 700 अरब रुपए कर दी गई है। सुरक्षा के नाम पर दोनों देशों का रक्षा बजट हर साल बढ़ता जा रहा है। दोनों देश सम्पन्न राष्ट्रों की श्रेणी में नहीं आते। रक्षा बजट पर खर्च होने वाली राशि यदि शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर खर्च हो तो दोनों देशों की तस्वीर बदलते देर नहीं लगेगी।
भारत-पाक विभाजन में जिन्ना की भूमिका:
मोहम्मद अली जिन्ना का जन्म 20 अक्टूबर 1875 को हुआ था। वे बीसवीं सदी के एक प्रमुख राजनीतिज्ञ थे जिन्हें पाकिस्तान के संस्थापक के रूप में जाना जाता है। वे मुस्लिम लीग के नेता थे जो आगे चलकर पाकिस्तान के पहले गवर्नर जनरल बने। पाकिस्तान में, उन्हें आधिकारिक रूप से क़ायदे-आज़म यानी महान नेता और बाबा-ए-कौम यानी राष्ट्रपिता के नाम से नवाजा जाता है। 1896 में जिन्ना भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गये। तब तक कांग्रेस भारतीय राजनीतिक का सबसे बड़ा संगठन बन चुका था। मुस्लिम लीग की स्थापना 1906 में हुई। शुरु-शुरू में जिन्ना अखिल भारतीय मुस्लिम लीग में शामिल होने से बचते रहे, लेकिन मुस्लिम लीग का अध्यक्ष बनते ही जिन्ना का यह विचार बिल्कुल पक्का हो गया कि हिन्दू और मुसलमान दोनों अलग-अलग देश के नागरिक हैं अत: उन्हें अलहदा कर दिया जाये। उनका यही विचार बाद में जाकर जिन्ना के द्विराष्ट्रवाद का सिद्धान्त कहलाया। इन्हीं वजह से 1947 ई. में भारत का विभाजन और पाकिस्तान की स्थापना हुई। पाकिस्तान के पहले गवर्नर-जनरल बनकर उन्होंने पाकिस्तान को एक इस्लामी राष्ट्र बनाया। भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर का मुद्दा भी उन्होंने ही खड़ा किया।
11 सितंबर 1948 को मौत से पहले उन्होंने अपने डॉक्टर कर्नल इलाही बख्श से गहरी उदासी के आलम में कहा था- ”डॉक्टर! पाकिस्तान मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल है। पाकिस्तान में मौजूदा मार-काट बताती है कि मुसलमानों को एक राष्ट्र बताकर आधुनिक, लोक-तांत्रिक और धर्म-निरपेक्ष पाकिस्तान बनाने का जिन्ना का सपना दम तोड़ चुका है।
ज्योतिषीय आंकड़ो में भारत और पाकिस्तान संबंध:
पाकिस्तान का जन्म 14 अगस्त, 1927 को रात्रि 11 बजकर 28मिनट पर कराची में हुआ। इसका जन्म लग्र मेष और राशि कर्क हुआ। इस देश की राजनीति के केंद्र में बुलेट है, क्योंकि लग्रेश मंगल तृतीय स्थान पर है। स्वतंत्रता के बाद से इस देश में लगातार तानाशाह हुए या सेना हावी रही। सप्तमेश, तृतीयेश और दशमेष सभी शनि से आक्रांत यानि इस देश की राजनीति के केंद्र में ही घृणा है। इसके ठीक इतर आवाम में ऐसी बातें नहीं देखने को मिलती मगर सत्ता की दीवारें बड़ी सख़्त और उंची है। शनि के वृश्चिक राशि में प्रवेश के बाद से पाकिस्तान में भी बदलाव की बयार बहनी शुरू होगी। जब वृश्चिक के शनि अपना असर दिखाना शुरू करेंगे तब ४ नवंबर २०१४ के गोचर के अनुसार पाकिस्तान की कुंडली में दशम स्थान का मंगल एवं भाग्यस्थ शनि साथ ही तृतीयेश शुक्र के अष्टमस्थ होने के कारण विवादित क्षेत्रों को लेकर पाकिस्तान सरकार को बड़े कठिन समय देखने होंगे जो कि पूरे ढाई साल चलने वाला है। इसी समय आईएसआईएस, मुस्लिम बाहुल्य देशों में अपना वर्चस्व कायम रखने का पूरा प्रयास करेगा, जिसका मकसद है पैसा और ताकत हथियाना। अर्थात् आने वाले ढाई साल पाकिस्तान के राजनेताओं और अवाम दोनों को परेशान करने वाला है। पाकिस्तान इस समय गम्भीर आर्थिक संकटों से घिरा हुआ है। सन 2008के बाद से ही वहाँ की अर्थव्यवस्था पटरी से उतरी हुई है। चूंकि वर्तमान गोचर के अनुसार चतुर्थेश बुध, राहु से पापाक्रांत होकर सप्तमस्थ है, अत: पाकिस्तान की जनता इन भीषण परिस्थितियों का शिकार है। यहां की अवाम एक ओर वह आर्थिक संकटों से जूझ रही है तो दूसरी ओर कट्टरपंथियों और आतंकियों का दंश भी बर्दाश्त कर रही है। आने वाले ढाई साल वहां आर्थिक स्थिति बदहाली की ओर पहुंच जायेगी ऐसी स्थिति में सैन्य पर बढ़ता खर्चा सत्ता के खिलाफ बगावत भी करा सकता है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्वतंत्रता की आवाज भी उंची हो सकती है। ४ नवंबर २०१४ के ही गोचर के अनुसार भारत की कुंडली में भाग्येश शनि, सप्तमस्थ और तृतीयेश चंद्रमा के एकादशेश होकर केतु के साथ होने से भारत में चहुं ओर विकास होगा। रहीं बात भारत और पाकिस्तान के आपसी रिश्तों की तो ज्योतिष के हिसाब से अभी ये बेहतर होते नहीं दिख सकते हैं। संकेत यह भी है कि अगर पाक के नापाक इरादे यहीं नहीं रुके तो गंभीर परिणाम देखने को मिल सकते हैं। एक बात और गौरतलब है कि जैसा कि पिछले कुछ दिनों से पाकिस्तानी सीमा से सीज फायर का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है और उस पर ‘बिलावल जैसे नौसिखिया नेताओं की बयानबाजी हो रही है, उससे लगता नहीं है कि पाकिस्तान किसी तरह की शांति और अमन की चाहत अब भी रख रहा है। ज्योतिषीय आंकड़े बताते हैं कि पाकिस्तान का आने वाला निकटतम भविष्य ज्यादा अच्छा नहीं रहने वाला है, एवं उसे वैश्विक दवाब का सामना भी करना पड़ सकता है।

You have read half of this article

Log in to keep reading. Creating an account is completely free – with Google or mobile OTP, in a minute.

Log in & read more New here? Create a free account

Have a question about your life?

Get personal guidance on kundli, marriage, career and Vastu from experienced astrologers.

Consult Now