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Papmochani Ekadashi 2020:पापों का नाश करने वाली एकादशी: पापमोचिनी एकादशीजानिए एकादशी व्रत की महिमा और व्रत कथा

Papmochani Ekadashi 2020:पापों का नाश करने वाली एकादशी: पापमोचिनी एकादशीजानिए एकादशी व्रत की महिमा और व्रत कथा

Papmochani Ekadashi 2020 Date: जो एकादशी होलिका दहन और चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के बीच में आती है उसे पापमोचिनी एकादशी कहा जाता है। यह हिंदी वर्ष की आखिरी एकादशी है और युगादी से पहले पड़ती है। जैसा कि इस एकादशी के नाम से ही समझ आता है पापों का नाश करने वाली एकादशी। इस दिन व्रत रखने से जाने अनजाने में हुए पापों नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस व्रत में भगवान विष्णु की अराधना की जाती है। जानिए एकादशी व्रत की महिमा और व्रत कथा…

अर्जुन ने कहा- “हे कमलनयन! मैं ज्यों-ज्यों एकादशियों के व्रतों की कथाएँ सुन रहा हूँ, त्यों-त्यों अन्य एकादशियों के व्रतों की कथाएँ सुनने की मेरी जिज्ञासा बढ़ती ही जा रही है। हे मधुसूदन! अब कृपा कर आप चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी के विषय में बतलाइये। इस एकादशी का नाम क्या है? इसमें कौन-से देवता का पूजन किया जाता है तथा इस व्रत का क्या विधान है? हे श्रीकृष्ण! यह सब आप मुझे विस्तारपूर्वक बताने की कृपा करें।”

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भगवान श्रीकृष्ण ने कहा- “हे अर्जुन! एक बार यही प्रश्न पृथ्वीपति मान्धाता ने लोमश ऋषि से किया था, जो कुछ लोमश ऋषि ने राजा मान्धाता को बताया था, वही मैं तुमसे कह रहा हूँ। राजा मान्धाता ने धर्म के गुह्यतम रहस्यों के ज्ञाता महर्षि लोमश से पूछा- ‘हे ऋषिश्रेष्ठ! मनुष्य के पापों का मोचन किस प्रकार सम्भव है? कृपा कर कोई ऐसा सरल उपाय बतायें, जिससे सहज ही पापों से छुटकारा मिल जाए।’

महर्षि लोमश ने कहा- ‘हे नृपति! चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम पापमोचिनी एकादशी है। उसके व्रत के प्रभाव से मनुष्यों के अनेक पाप नष्ट हो जाते हैं। मैं तुम्हें इस व्रत की कथा सुनाता हूँ, इसकी कथा के अनुसार प्राचीन समय में चित्ररथ नामक एक रमणिक वन था। इस वन में देवराज इन्द्र गंधर्व कन्याओं तथा देवताओं सहित स्वच्छंद विहार करते थे।

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