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कुंडली से मिलते है भाग्यशाली होने का संकेत

इस संसार में कुछ लोग अपने जीवन में जल्दी तरक्की कर जाते हैं जबकि कुछ लोगों को इसके लिए बहुत संघर्ष करना पड़ता है। कई बार इतना संघर्ष करने के बावजूद सफलता नहीं मिल पाती है। कुछ बहुत ही अमीर घर में पैदा होते हैं और कुछ लोग बहुत ही गरीब घर में। कुछ अमीर घर में पैदा होकर धीरे-धीरे गरीब हो जाते हैं और कुछ लोग गरीब घर में पैदा होकर धीरे-धीरे अमीर हो जाते हैं। कुछ लोग बहुत अच्छा पढ़ लिखकर बेरोजगार रहते हैं और कुछ लोग थोड़ा पढ़े लिखे होने पर भी अच्छे काम काज में लग जाते हैं। कुछ लोग कहते हैं कि बच्चे के जन्म के बाद घर में बहुत तरक्की हुई और सब कुछ अच्छा हो गया जबकि कुछ लोग कहते हैं कि जब से बच्चा पैदा हुआ मां बाप बीमार रहते हैं और घर में परेशानी आ गई है। कुछ लोग कहते हैं कि शादी के बाद पत्नी के आने से तरक्की और उन्नति होती गई जबकि कुछ लोग कहते हैं कि शादी के बाद दिन प्रतिदिन काम खराब हो रहा है। इस संसार में अधिकतर लोग चढ़ते हुए सूर्य को नमस्कार करते हैं। अगर आप अच्छे पद पर हंै या आपको सब प्रकार की सुख सुविधा है तो आपके अनेक मित्र होंगे, अगर कुछ नहीं तो आपको कोई पूछने वाला नहीं होगा। ज्योतिष में नवम स्थान को भाग्य एवं धर्म स्थान माना जाता है। जन्मपत्री देखते समय सभी विषयों पर विस्तार पूर्वक विचार करना चाहिए। सबसे पहले लग्न को देखें, वह एक अंश से कम और 29 अंश से अधिक नहीं होना चाहिए। अगर लग्न कमजोर हो या संधि में हो तो कुंडली कमजोर होती है। लग्नेश के अस्त होने पर कुंडली में बहुत ही खराबी आ जाती है। ऐसे में ग्रह कितने भी अच्छे हों, कुछ न कुछ परेशानी बनी रहेगी। लग्नेश वक्री हो और अपने स्थान से छठे, आठवें या बारहवें, चला गया हो तो कंुडली कमजोर होगी। ज्योतिष में गुरु, शुक्र, बुध और पक्षबली चंद्रमा को शुभ माना गया है। अगर ये ग्रह केंद्र या त्रिकोण में हों, तो कुंडली में अरिष्ट भंग करते हैं अर्थात अच्छा योग बनाते हैं। जन्मकुंडली में त्रिकोण स्थान 1, 5, 9 और केंद्र स्थान 1, 4, 7, 10 को अच्छा माना गया है लग्न। (प्रथम स्थान) को केंद्र और त्रिकोण दोनों माना गया है। जन्मकुंडली में आमदनी और धन के लिए दूसरा और ग्यारहवां स्थान दोनों अच्छे हंै, लेकिन तंदुरस्ती के लिए नहीं क्योंकि दूसरा स्थान मारक है और ग्यारहवां छठे से छठा है। जन्मकुंडली में 6, 8, 12 स्थानों को खराब माना जाता है। इसलिए अगर लग्नेश, भाग्येश, नवमेश, लाभेश और धनेश केंद्र या त्रिकोण में हों, तो कुंडली में अच्छा योग बन जाता है। अगर कोई अच्छा ग्रह नवम में हो, तो अच्छा फल देता है। चंद्रमा पक्ष बली हो और उस पर किसी पापी ग्रह का प्रभाव नहीं हो, तो जन्मपत्री में बहुत ही शक्ति आ जाती है। कुंडली में चंद्रमा की स्थिति बहुत अच्छी होने से आधी कुंडली स्वतः ही शुभ है और खराब होने से अशुभ होती है।

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