गले के स्वर यंत्र के कैंसर में आवाज भारी हो जाती है। गले की लसिका ग्रंथियों में सूजन भी आ जाती है। इसके अतिरिक्त सांस लेने एवं निगलने में तकलीफ होती है, खांसी के साथ रक्त मिश्रित बलगम आ जाता है।
गले एवं कान में तीव्र दर्द होता है। गले की ग्रास नलिका अथवा ग्रसनी के कैंसर में निगलने की तकलीफ होती है साथ ही स्वर यंत्र पर दबाव के कारण आवाज में बदलाव आ जाता है। रोगी को सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है, गले में दर्द भी हो सकता है।
गले के कैंसर के कारण
अत्यधिक तंबाकू का सेवन और धूम्रपान करना तथा अधिक शराब पीना गले में कैंसर पैदा पर सकते हैं। कई रासायनिक पदार्थ जैसे कोलतार, एस्बेस्टस, विनाइल क्लोराइड, बेंजीन, कैडमियम, आर्सेनिक जैसे पदार्थ भी कैंसर उत्पन्न करने में सक्षम होते हैं। कई कारखानों में इन पदार्थों के संपर्क में प्रतिदिन आने से कैंसर होने की संभावना बढ़ जाती है। इसी तरह से खाद्य पदार्थ, जो गले में जलन पैदा करते हैं या तीक्ष्ण लगते हैं, कैंसर पैदा कर सकते हैं। अधिक मात्रा में प्रदूषण भी गले एवं कई प्रकार के अन्य कैंसर पैदा करते हैं। डिब्बा बंद खाद्य और कृत्रिम रंग तथा रसायनों के सेवन में भी कैंसर होने की संभावना हो जाती है। शीतल पेय, पेप्सी, कोक आदि का अधिक सेवन भी गले का कैंसर पैदा कर सकता है।
आनुवांशिक लक्षण भी कैंसर होने में सहायक हो सकते हैं यह देखा गया है कि यदि मां को किसी प्रकार का कैंसर है, तो बेटी को भी हो जाता है। पिता को कैंसर है, तो बेटे को भी होने की संभावना बढ़ जाती है।
रोग निदान और इलाज
आधुनिक युग में रोग की पहचान शुरुआती लक्षणों में संभव है। यदि ऊपर लिखे लक्षणों में कोई मिले, तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें, जांच करवाएं। कैंसर की पहचान जितनी जल्दी होगी, चिकित्सा से उतना ही अधिक लाभ होगा। थोड़ी-सी शंका होने पर तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें। कैंसर का शीघ्र निदान और इलाज ठीक से होने पर रोगी लंबी आयु जीता है। कैंसर के शीघ्र निदान के बाद शल्य-क्रिया कर दी जाए, तो रोगी सामान्य आयु तक जिंदा रहता है। शल्य क्रिया के अतिरिक्त विकिरण (रेडिएशन) द्वारा भी इलाज करते हैं जिससे रोगी को बहुत फायदा होता है। विशेष स्थितियों में कैंसर रोगी को दवाईयां भी दी जाती हैं।
गले के कैंसर से बचाव
गले के कैंसर से बचने के लिए आवश्यक है खान-पान की आदतों में सुधार लाना। हानिकारक नशे का सेवन छोड़कर इस रोग से बचा जा सकता है। कैंसर पैदा करने वाले सभी पदार्थों का सेवन छोड़ना अच्छा होता है। किसी भी रूप में तंबाकू का सेवन छोड़ देना चाहिए। इसके अतिरिक्त पान-मसाला, कच्ची सुपारी आदि का उपयोग भी बंद कर देना चाहिए। तंबाकू युक्त मंजन भी न करें। कैंसर से बचने के लिए शराब का सेवन भी छोड़ना उचित होगा। इसके अतिरिक्त ज्यादा तले, भुने, मिर्च-मसाले युक्त आहार प्रतिदिन नहीं खाना चाहिए। अधिक चर्बीयुक्त खाद्य पदार्थों से भी परहेज करें। इसके अतिरिक्त मोटापे पर नियंत्रण भी कैंसर से बचाव के लिए लाभकारी है क्योंकि यह पाया गया है कि मोटे लोगों को कैंसर होने की संभावना अधिक होती है।
भोजन में विटामिन ‘सी’ और ‘बी’ से भरपूर पदार्थों जैसे- गाजर, आंवला, अमरूद, नींबू, हरी सब्जियां सलाद इत्यादि को पर्याप्त मात्रा में शामिल कर इस रोग से बचा जा सकता है। प्रयोगों द्वारा यह सिद्ध हो चुका है कि विटामिन ‘सी’ और ‘बी’ तथा भोजन में रेशों की मात्रा शरीर को कई तरह के कैंसर से बचाती है। रेशायुक्त खाद्य लेने से आंतों के कैंसर से सुरक्षा मिलती है।
उम्र के 40 वर्ष के पश्चात् या दो वर्षों के अंतराल में कैंसर के लिए शरीर की जांच करवाना भी कैंसर की रोक-थाम में सहायक होता है। केवल गले के कैंसर से ही नहीं, अपितु कई तरह के अन्य कैंसरों से भी इन उपायों द्वारा बचा जा सकता है।
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