OFFICE AS PER VASTU RULES : आजकल हर छोटे-मोटे नागरिक के सरकारी, अर्धसरकारी, सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिष्ठानों, सार्वजनिक या निजी क्षेत्रों के बैंकों, प्राइवेट कम्पनियों के कार्यालयों में किसी न किसी कारण चक्कर लगते ही रहते हैं। आपने ऐसे कार्यस्थलों का यदि बारीकी से निरीक्षण किया हो तो सरकारी दफ्तरों और निजी दफ्तरों के रखरखाव, साज-सज्जा, वहां के कर्मचारियों, उनके व्यवहार, कार्यकुशलता में जमीन-आसमान का अंतर पाया होगा।कुछ तो कारण होंगे जो एक कार्यालय को दूसरे से भिन्न बनाते हैं। यदि किसी ऑफिस का वास्तु प्रकृति के अनुरूप है, वहां की कार्यक्षमता बढ़ती है, धन-लाभ भी बढ़ता है।
“ऑफिस में किसी भी कर्मचारी की पीठ मुख्य द्वार की ओर नहीं होनी चाहिए। ऑफिस में किचन या कैंटीन दक्षिण-पूर्व दिशा में रखना शुभ माना जाता है। बाथरूम कभी भी ईशान कोण या उत्तर-पूर्व दिशा में नहीं रखना चाहिए क्योंकि ये दिशाएं वास्तु में सबसे शुभ मानी जाती है। ऑफिस में दीवारें, पर्दे, टेबल सब हल्के रंग के होने चाहिएं”
कार्यालय ऐसा होना चाहिए वास्तु के हिसाब से
चाहे दुकान हो, घर हो या कार्यालय हो, वहां कार्य आरंभ करने से पूर्व अपने धर्म एवं आस्था के अनुसार ईश्वर को याद करने से कार्य कुशलता बढ़ती है। सरकारी कार्यालयों में आज भी कर्मचारी लेट-लतीफी और अपने कार्यालय के प्रति पूर्णत: समर्पित न होने के कारण विभाग को कार्यक्षमता की दृष्टि से पीछे ले जाते हैं।
एक राष्ट्रीयकृत बैंक की कई शाखाओं में आज भी प्रबंधक पूरे स्टाफ के साथ बैंक का कार्य आरंभ करने से पहले सामूहिक प्रार्थना करते हैं।आपके ऑफिस में कम्प्यूटर और कोई भी इलैक्ट्रॉनिक उपकरण हो तो उसे हमेशा आग्नेय कोण में ही लगाना चाहिए। यह दिशा अग्नि देव की दिशा है। अगर आप ऑफिस में कोई भी वेटिंग या मीटिंग रूम बनाते हैं तो उसे हमेशा वायव्य कोण में ही बनाएं। वास्तु के अनुसार वायव्य कोण शुभ माना जाता है। एक टेबल पर सिर्फ एक कर्मचारी को बैठना चाहिए। एक से अधिक कर्मचारियों को बैठाने से काम बाधित होता है।
महापुरुष, बहते हुए पानी, खिलाड़ी आदि की तस्वीर लगनी चाहिए
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