Know Today Plan Tomorrow Live Better
Home Articles Astrology
Astrology

अपने नशे की आदत से कैसे मुक्ति पाएं?? जानते है ज्योतिष से!!!!

अपने नशे की आदत से कैसे मुक्ति पाएं?? जानते है ज्योतिष से!!!!

नशा व्यक्ति की बुरी आदतों में से एक है फिर चाहे वह सिगरेट का हो या शराब का नशा, ‘नशा’ नशा होता है। शराब पीना व्यक्ति की बुरी आदतों में शामिल है साथ ही यह उसका असामान्य व्यवहार भी है। अक्सर देखा जाता है कि शादी-विवाह, पार्टी, पारिवारिक माहौल, बुरी संगत, व्यावसायिक पार्टी, खुशी का माहौल या दुख की स्थिति अथवा यार-दोस्तों के कारण व्यक्ति को शराब का व्यसन ही लग जाता है। प्रसिद्ध ज्योतिष ग्रंथ ‘जातक तत्व’ के अनुसार मदिरापान के निम्नलिखित लग्न से संबंधित कारण है-
लग्न में मकर राशि का गुरु हो।
लग्नेश नीच राशिगत हो, निर्बल हो।
लग्न का स्वामी मंगल से युक्त हो।
लग्न पर पाप ग्रहों की दृष्टि अधिक हो।
लग्न का स्वामी शुभ राशिगत या जलीय राशि में पापी ग्रहों से पीड़ित हो।
लग्न में शनि एवं लग्नेश पाप ग्रहों के साथ तथा गुरु के साथ राहू हो तो जातक शराब पीता है।
लग्न में नीच ग्रह हो और पाप ग्रह निर्बल हो, बारहवें स्थान में शनि राहू हो तो जातक शराबी होता है।
लग्न का स्वामी निर्बल, अस्त हो, बुध, गुरु, शुक्र, वक्री हों और पाप ग्रहों के साथ हों तो जातक शराब-मांस का शौकीन होता है।

ALSO READ  AstroShrine ऐप अब Google Play Store पर उपलब्ध – अब अपने फ़ोन से जुड़िए प्रमाणित वैदिक ज्योतिषियों से

इसके विपरीत यदि लग्नेश बलवान हो, लग्न को देखता हो, लग्न नवम भाव में शुभ हो, जो जातक निर्व्यसनी होता है।

द्वितीय भाव से संबंधित कारण
द्वितीय भाव भोजन तथा पेय वस्तुओं से संबंध रखता है। चंद्रमा भी पेय पदार्थों के कारक का प्रतिनिधित्व करता है।
द्वितीय भाव में जलीय राशि ग्रह हो और राहु तथा शनि का प्रभाव हो, तो जातक शराब पीने के व्यसनी होगा।
द्वितीय भाव में शनि अन्य दोषों के साथ-साथ कड़वी भाषा और शराब की आदत भी देता है।

द्वादश भाव से संबंधित कारण
द्वादश भाव व्यय का कारक होता है। मदिरापान जैसी बुरी आदत पर व्यय करने वाला जातक वह होगा जिसके-
बारहवें भाव में पाप ग्रह हो।
बारहवें भाव का स्वामी नीच राशिगत हो।

वृश्चिक राशि से संबंधित कारण
वृश्चिक राशि नशे की आदत को दर्शाती है। इस राशि से संबंधित मदिरापान के निम्नलिखित कारण हैं-
जब यह राशि तृतीय भाव या अष्टम भाव में हो और शुक्र, शनि, मंगल इसमें स्थित होकर पाप ग्रहों से दृष्ट हों तो जातक नशे का आदी हो जाता है।
वृश्चिक लग्न भी शराब की ओर आकर्षित करता है।
वृश्चिक राशि में नेपच्यून हो तो जातक शराब का आदी होता है।
लग्न में जलीय राशि में नेपच्यून भी इसी प्रकार के परिणाम देता है। चंद्रमा-मंगल, चंद्रमा-नेपच्यून, शुक्र-नेपच्यून का अशुभ संबंध या दृष्टि भी शराब का आदी बनाती है।

You have read half of this article

Log in to keep reading. Creating an account is completely free – with Google or mobile OTP, in a minute.

Log in & read more New here? Create a free account

Have a question about your life?

Get personal guidance on kundli, marriage, career and Vastu from experienced astrologers.

Consult Now