सौभाग्य योग की पूजा देगा सौभाग्य और समृधि –
कार्तिक कृष्ण पक्ष अमावस्या रात्रि 09:32 तक दिन बुधवार, स्वाति नक्षत्र शाम 07:37 तक, आयुष्मान योग संध्या 05:57 तक उसके बाद सौभाग्य योग रात्रि भर, चंद्रमा तुला राशि के –
अभिजित मुहूर्त – 11:59 – 12:22 तक शुभ और पूजन में ग्राह्य
राहू काल – 12:22 से 13:47
चौघडिया –
दिन –
लाभ- 06:43 – 08:07
अमृत- 08:07 – 09:32
शुभ- 10:57 – 12:22
चर- 15:12 -16:37
लाभ- 16:37 – 18:01
संध्या-
शुभ- 19:37 – 21:12
अमृत- 21:12 – 22:47
शुभ- 22:47 – 12:22 रात्रि
स्थिर लग्न –
वृषभ- 17:41 से 19:37
सिंह- रात्रि 12:09- 02:23 रात्रि
वृश्चिक- सुबह 06:55 – 09:12
कुम्भ- 13:03 – 14:35 (13:47 से 14:35 तक शुभ और पूजन में ग्राह्य)
नोट – 13:47 तक राहुकाल के कारण अशुभ.
पूजन सामग्री :-
• लक्ष्मी एवं गणेश जी की मूर्ति – मिट्टी या धातु की
• रोली 10 ग्राम (Roli 10 gm)
• मौली 2 गोला (Mauli 2 pieces)
• लौंग 10 ग्राम (Clove 10 gm)
• इलायची 10 ग्राम (Cardamon 10 gm)
• साबुत सुपारी 11 पीस (Areca nut(Supari) 11 pieces)
• इत्र 1 शीशी (Scent 1 small bottle )
• देशी घी 250 ग्राम (Ghee 250 gm)
• आम के पत्ते (एक पल्लो) (Mango Leaves (in a bunch) )
• खील 250 ग्राम (Kheel (made up from rice) 250 gm)
• बताशा 250 ग्राम (Bataasha (type of sweet made from sugar in different shape) 250 gm )
• सिंदूर 10 ग्राम (श्री हनुमान जी वाला ) (Vermillion (sindoor) 10 gm (orange colour) )
• लाल सिंदूर की डिब्बी–1 (Red vermillion(Lal sindoor) – 1 small box)
• कपूर 10 ग्राम (Camphor (kapur) 10 gm )
• रुई की बत्ती (Cotton lint( cotton batti))
• माचिस (Matchstick – 1)
• कमल गट्टा 10 ग्राम(Kamal Gatta 10 gm )
• साबुत धनिया (Coriander whole – 5gm)
• तोरण (Festoon of ashok leaves (ashok leaves toran))
• साबुत चावल 1 किलो (Whole rice 1 kg)
• पंच पात्र या 1 गिलास (plate or glass- 1 )
• आचमनी या एक चम्मच (spoon -1)
• अर्धा या जलपात्र कलश ढ़क्कन सहित (Finial with cover( earthen pot with coverlid) – 1 )
• दीप पात्र (utensil for lamp -1)
• धूप पात्र (utensil for dhoop -1 )
• एक पानी वाला नारियल(Coconut( with water) – 1 )
• लाल कपड़ा 2.5 मीटर (चौकी पर बिछाने के लिये एवं नारियल पर लपेटने के लिये ) (Red Cloth 2 (2.5 meter each) (one for small stool and one to cover coconut))
• केसर 2 ग्राम (Saffron (Kesar) 2 gm )
• कुशासन या लाल कम्बल –आसन के लिये (Mat made up with grass/kush or red blanket – for sitting)
• सफेद कपड़ा (White cloth – 2 (2.5 meter each) )
• सफेद चंदन (White Sandalwood – 1 packet)
• लाल चंदन (Red Sandalwood- 1 packet)
• मिट्टी के 5, 11, 21 या अधिक छोटे दीपक (Small earthen lamp – 5 ,11,21 or more )
• मिट्टी का एक बडा दीपक (Big earthen lamp – 1 )
• पान के 11 पत्ते डंडी सहित (Betel leaves with stem – 11 )
• फल (ऋतु फल) (Seasonal Fruits )
• पंचमेवा (panchmeva( mix of cashew,raisins,date palm,coconut and peanuts )- 10 gm)
• दूब या दुर्बा (Grass )
• फूल (Flower)
• फूल माला (Garland )
• गणेश जी के लिये ळड्डू (Laddu for God Ganesh)
• खुले पैसे (Change rupees)
• मिठाई (sweets)
• सरसो का तेल ( Mustard oil)
• साबुत हल्दी 20 ग्राम (Whole turmeric 20 gm)
• कुमकुम या गुलाल 10 ग्राम (Gulaal 10gm)
• कलम (Ink Pen)
• स्याही की दवात (Ink bottle )
• बही खाता (Leedger Account book)
• तिज़ोरी या गुल्लक (Safe)
• एक थाली आरती के लिये (Plate – for aarati)
• कटोरी दूध दही पंचामृत के लिये (Bowl (for milk, curd, panchamrit) – 5)
• पंचामृत – दूध,दही, शहद,घी ,शक्कर (चीनी) मिलाकर बनाये (Panchamrit – (mixture of milk, curd, honeey, ghee & sugar) )
• धूप का एक पैकेट (Dhoop – 1pkt )
• पिसी हल्दी (Turmeric powder)
• कमल का फूल (Lotus flower )
• आभूषण वस्त्र (Jwellery, clothes )
• गंगाजल (Holy water (Ganga Jal))
• घंटी (Bell )
• गुड़ 100 ग्राम (Molasses 100 gm )
• चांदी का सिक्का (Silver coin)
• 2 थाली या चौकी (Plate or stool – 2 (थाली या चौकी–२))
पूजा से पूर्व की तैयारी –
- पूजा प्रारम्भ करने से पहले जलपत्र एवं कलश मे गंगा जल मिला लें ।
• ताम्बूल बनाने के लिये पान के पत्ते को उल्टा करके उस पर लौंग इलायची सुपारी एवं कुछ मीठा रखें ।
• घी का दीपक भगवान की मूर्ति के दाई ओर एवं तेल का दीपक बाई ओर रखे। धूप जल पात्र बाई ओर ही स्थापित करें। - दो चौकी लें। यदि चौकी उपलब्ध ना हो तो थाली प्रयोग कर सकते हैं। पहले चौकी पर सफेद वस्त्र बिछायें। चौकी के ऊपरी भाग के मध्य में 卐 (स्वास्तिक या सतिया) बनायें। स्वास्तिक के बायीं ओर अर्थात् ईशाणकोण में ॐ एवं दायीं ओर अर्थात् अग्निकोण में श्री: चावल से बनायें अथवा रोली घोल कर लिखें।
• स्वास्तिक के नीचे ब्रह्मा, विष्णु एवं शिव के निमित्त तीन लम्बी ( खड़ी लकीर) लकीर ऊपर से नीचे की ओर खीचें।
• चौकी के निचले भाग में– वायव्यकोण में नवग्रह– मण्डल हेतु चावलों के नौ पुंज या रोली से नौ बिंदु बनायें। - नैऋत्यकोण के ऊपरी भाग में सप्तमातृका हेतु चावल से त्रिकोण में सात–सात पुंज या रोली से बिंदु बना लें।
• निचले भाग में षोडशमातृका हेतु चावल अथवा रोली घोलकर सोलह बिंदु बनायें।
• स्वास्तिक के ऊपर, दोने या एक छोटी कटोरी में, दो सुपारी को अलग–अलग लाल मौली लपेट कर रखें। - दूसरी चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर गणेश–लक्ष्मी की मूर्ति या तस्वीर रखकर सामने वाली चौकी के दायीं ओर रखें( लक्ष्मी की मूर्ति सदैव गणेश जी के दाहिनें ओर स्थापित की जाती है)।
- चाँदी के सिक्के को स्थापित करने के लिये एक लाल चावल की ढेरी या अष्टदल (आठ दल / खाने) बनाकर रख सकते हैं।
- सामने वाली चौकी के बायीं ओर अर्थात् ईशानकोण (उत्तर–पूर्व) में चावल से अष्टदल (आठ दल / खाने) बनाकर, जल से पूर्ण कलश रखें।
- कलश में दुर्बा, गंगाजल, सुपारी, हल्दीगांठ, द्र्व्य(सिक्का) डालें। उसमें आम का पल्लव(पत्ता) डालें। कलश में कलावा बांधे। पुन: उसके ऊपर चावल से भरा पात्र रखें। पात्र पर, लाल वस्त्र में लपेट कर या कलावा बांधकर नारियल रखें। कलश पर स्वास्तिक/सतिया बना दें।
- तस्वीर अथवा मूर्तियों के बाईं ओर (अर्थत् पूजक के दाईं ओर) तेल का दीपक, धूपबत्ती तथा दाईं ओर घी का दीपक रखें।
- प्रसाद, वस्त्र, फल, मिठाई, खील, बतासे, दीपक, भेंट सामग्री इत्यादी सामने की ओर रखें।
•दीपावली पूजन के पश्चात सभी सामग्री देवि एवं देवताओ की स्थापना को सारी रात यथा स्थान रहने दे। विसर्जन अगले दिन करे । ध्यान रहे कि गणेश लक्ष्मी जी की मूर्ति को विसर्जन नहीं करना है, एक वर्ष रखना होता है अगले वर्ष नई मूर्तियो के पूजन के बाद ही पुराने वर्ष की मूर्ति को विसर्जन करना चहिये ।
•चढ़ाई हुइ दक्षिणा किसी ब्राह्मण को दे या मंदिर में दान करे ।
सावधानी –
- गणपति पर तुलसी दल ना चढ़ायें ।
• श्री लक्ष्मी जी को कमल का फूल बहुत प्रिय है ।
• जमीन पर गिरा हुआ ,बासी ,कीड़ा खाया हुआ फूल न चढ़ायें ।
• टूटी फूटी मुर्तियों को नदी मे, मंदिर में या पीपल के नीचे विसर्जित करे ।
• लक्ष्मी प्राप्ति के लिये लक्ष्मी मंत्र कमलगट्टे की माला पर जपना अधिक उत्तम होता है।
• धन प्राप्ति के लिये लाल आसन उत्तम रह्ता है ।
• ध्यान रहे कि पूजा करते समय या मंत्र उच्चारण के समय हाथ कभी भी खाली ना रहे । हाथ मे फूल या चावल अवश्य रखें ।
• रक्षा सूत्र (मौली) बांधते समय हाथ मे पैसा एवं अक्षत ले खाली हाथ रक्षा सूत्र ना बांधे ।
• यदि पूजा करते समय कोइ भी चीज़ कम पड़ जाये तो आप उसकी जगह साबुत लाल चावल चढ़ा सकते है ।
माता लक्ष्मीजी के पूजन की सामग्री अपने सामर्थ्य के अनुसार होना चाहिए। इसमें लक्ष्मीजी को कुछ वस्तुएँ विशेष प्रिय हैं। इनका उपयोग अवश्य करना चाहिए।
वस्त्र में इनका प्रिय वस्त्र लाल-गुलाबी या पीले रंग का रेशमी वस्त्र है।
माताजी को पुष्प में कमल व गुलाब प्रिय है।
फल में श्रीफल, सीताफल, बेर, अनार व सिंघाड़े प्रिय हैं।
सुगंध में केवड़ा, गुलाब, चंदन के इत्र का प्रयोग इनकी पूजा में अवश्य करें।
अनाज में चावल तथा
मिठाई में केसर की मिठाई या हलवा, शिरा का नैवेद्य शुद्धता पूर्ण उपयुक्त है।
प्रकाश के लिए गाय का घी, तेल इनको शीघ्र प्रसन्न करता है।
अन्य सामग्री में गन्ना, कमल गट्टा, खड़ी हल्दी, बिल्वपत्र, पंचामृत, गंगाजल, ऊन का आसन, रत्न आभूषण, गाय का गोबर, सिंदूर, भोजपत्र का पूजन में उपयोग करना चाहिए।
लक्ष्मी पूजन विधि :-
मूर्ति कहाँ स्थापित करें :–
– लक्ष्मी पूजन में जो व्यक्ति पूजा कर रहे हैं उनका मुख पूर्व अथवा उत्तर दिशा में होना चाहिये।
– वह लाल आसन या कम्बल या कुश के आसन पर पत्नी तथा परिवार के साथ बैठे ।
– पूजा करते समय पत्नी हमेशा पति के दाईं ओर बैठे । यदि ब्राह्मण पूजा करा रहे हो तो उनका मुख उत्तर की ओर होना चाहिये।
पवित्रीकरण करें –
पंच–पात्र में से फूल अथवा चम्मच द्वारा थोड़ा जल अपने बाएं हाथ मे लेकर दाएं हाथ की चारों अंगुलियों से पूजा की सारी सामग्री व उपस्थित सभी व्यक्तियों पर जल छिड़कते हुए लिखे हुए मंत्र का उच्चारण कर,सभी सामग्री और उपस्थित जन–समूह के साथ अपने आप को पवित्र कर लें।
ॐ अपवित्रः पवित्रो वा सर्व अवस्थांगत: अपिवा।
यः स्मरेत् पुण्डरीकाक्षं स वाह्य अभ्यन्तर: शुचिः॥
ॐ पुण्डरीकाक्ष: पुनातु, ॐ पुण्डरीकाक्ष: पुनातु,
ॐ पुण्डरीकाक्ष: पुनातु।
आचमन विधि :-
पुष्प या चम्मच से दाएँ हाथ में जल लें। अब “ॐ केशवाय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
फिर पुष्प या चम्मच से दाएँ हाथ में जल लें। अब “ॐ नारायणाय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
फिर पुष्प या चम्मच से दाएँ हाथ में जल लें। अब “ॐ वासुदेवाय नमः” मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पी लें।
फिर “ॐ हृषिकेशाय नमः” कहते हुए दाएँ हाथ के अंगूठे के मूल से होंठों को दो बार पोंछकर हाथों को धो लें।
पृथ्वी पूजन
अपने दाएँ हाथ मे पुन: थोड़ा जल लेकर लिखे हुए मंत्र का उच्चारण करते हुए जल को पृथ्वी पर छिड़कें तथा पृथ्वी पर सफेद और लाल,चंदन,पुष्प व चावल छोड़ें ।
ॐ पृथ्वी त्वया धृता लोका देवि त्वं विष्णुना धृता।
त्वं च धारय मां देवि पवित्रं कुरु च आसनम्॥
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