जिस तरह से कैलोरी के माध्यम से यह बता देते हैं कि कोई विशेष भोजन व्यक्ति के लिये शक्ति वर्धक है या नहीं। इसी प्रकार से हमारे ऋषि मुनियों ने भी अपनी खोजों से यह बता दिया था कि कौन सा अंक किसी व्यक्ति के लिये कैलोरी की भांति उसके जीवन के लिये शक्तिशाली है या नहीं। शुभ अंक से संबंधित नाम, कारोबार आदि अपना कर व्यक्ति अपने जीवन को सुखी व समृद्ध बना सकता है तथा यदि वह अशुभ अंकों का साथ रखता है तो दुर्घटनाओं को आमंत्रित कर सकता है।
भाग्यांक:
प्रत्येक व्यक्ति का एक शुभ अंक होता है जो उसके जीवन के लिये सुखदायी होता है, इसे भाग्यांक कहते हैं। इसी भाग्यांक को अगर व्यक्ति अपने जीवन मेंं पहचान कर उससे जुडी वस्तुओं को अपने जीवन मेंं स्थान देता है तो फिर उस व्यक्ति को प्रगति के पथ पर चलने से कोई नहीं रोक सकता।
जिस तरह से दाना डाल देने से कबूतर आते हैं, चीनी डाल देने से चींटियां आ जाती हैं, उसी तरह से किसी विशेष व्यक्ति के भाग्यांक से संबंधित वस्तुओं के प्रयोग से भाग्यशाली फल अपने आप ही उसे मिलने शुरू हो जाते हैं।
किसी भी व्यक्ति का भाग्यांक ज्ञात करने के लिये निम्न उदाहरण देखा जा सकता है – व्यक्ति की जन्म तिथि = 7/8/1966सभी अंको का जोड = 7+8+1+9+6+6= 37 पुन: जोड = 3+7 = 10 पुन: जोड = 1+0 = 1 अत: व्यक्ति का भाग्यांक 1 कहलायेगा।
निम्न तालिका से देखा जा सकता है कि 1 अंक के शत्रु अंक 4, 7 व 8हैं। यदि व्यक्ति 1 अंक से संबंधित वस्तुओं को अपनायेगा तो सुख व समृद्धि प्राप्त करेगा और यदि 4,7 या 8अंकों की वस्तुओं को अपनायेगा तो दुख व दुर्घटनाओं को प्राप्त कर सकता है। अंक शास्त्र के अनुसार कोई व्यक्ति अपने शत्रु अंकों के कारण ही आकस्मिक दुर्धटनाओं का शिकार होता है। ऐसी आकस्मिक दुर्घटनायें पांच प्रकार की हो सकती हैं जिनका विवरण उपरोक्त सारणी मेंं दिया जा रहा है। अत: अपने-अपने भाग्यांक को पहचान कर निम्नलिखित संभावित आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है –
1- भू-दुर्घटना:
इसमेंं सडक दुर्घटना, रेल दुर्घटना, सीढियों से गिरना व भू-स्खलन आदि को लिया जाता है। इस दुर्घटना का कारक अंक 5 है। अत: यदि किसी व्यक्ति के भाग्यांक की शत्रुता 5 अंक से है तो उसे भू- दुर्घटना के प्रति सावधान रहना चाहिये। 9 भाग्यांक वाले अक्सर इसी दुर्घटना से प्रभावित रहते हैं।
2- जल दुर्घटना:
इसमेंं पानी मेंं डूबना, बरसात मेंं अधिक भीग जाने पर न्यूमोनिया होना, डायरिया होना आदि को लिया जाता है। इस दुर्घटना के कारक अंक 2 व 6हैं। अत: 3,4,5,7 भाग्यांक वाले व्यक्तियों को जल दुर्घटना के प्रति सावधान रहना चाहिये।
3- अग्नि दुर्घटना:
इसमेंं अग्नि से जलकर मरना, प्रचण्ड गर्मी से मरना, लू लगना आदि दुर्घटनाओं को लिया जाता है। इस दुर्घटना के कारक अंक केवल 1 व 9 है। अत: 4, 6, 7, 8भाग्यांक वाले व्यक्तियों को अग्नि से होने वाली दुर्घटनाओं के प्रति सावधान रहना चाहिये।
4- वायु दुर्घटना:
इसमेंं वायु मेंं होनी वाली दुर्घटना, किसी ऊंचाई से गिरना, वात रोग से पीडित होना आदि को लिया जाता है। इस दुर्घटना के कारक अंक 3 व 8हैं। अत: 1, 2, 6, 9 भाग्यांक वाले व्यक्तियों को वायु दुर्घटना के प्रति सावधान रहना चाहिये।
5- अन्य दुर्घटनायें:
इसमेंं बिजली से होने वाली दुर्घटनायें, शोक व दुख से होने वाले निधन, प्राणाघात आदि को लिया जाता है। इसके कारक अंक 4 व 7 हैं। अत: 1, 2, 3, 9 भाग्यांक वाले व्यक्तियों को इस प्रकार की दुर्घटनाओं के प्रति सावधान रहना चाहिये।
अत: भाग्यांक से संबंधित ऊपरलिखित वस्तुओं को जीवन मेंं अपना कर तथा शत्रु अंक से संबंधित वस्तुओं का दानादि कर आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचा जा सकता है। जैसे कि ऊपर र्वणित उदाहरण के व्यक्ति को भाग्यांक 1 से संबंधित वस्तुओं जैसे कि सुनहरी रंग के वस्त्र पहनने चाहिये या पिता की सेवा करनी चाहिये या माणिक रत्न धारण करना चाहिये और शत्रु अंक 4, 7 व 8की वस्तुओं जैसे कि तिल, तेल व कंबल आदि का दान करना चाहिये और होने वाली आकस्मिक दुर्घटनाओं से बचाव करना चाहिये
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