Know Today • Plan Tomorrow • Live Better
Home Articles Palmistry
Palmistry

कालसर्प योग और हस्तरेखा

कालसर्प योग और हस्तरेखा

काल सर्प योग और हस्तरेखा, में कालसर्प योग के मुखयकारक ग्रह राहु और केतु हैंऔर उनमें भी राहु मुखयहै। कालसर्प योग के जो भी बुरे प्रभावमनुष्य के जीवन पर पड़ते हैं वे सभीमुखय रूप से राहु के दोष और बुरेप्रभाव ही हैं। इसी प्रकार हाथ से भीराहु और केतु की स्थिति को देखाजाता है और राहु तथा केतु के बुरेप्रभाव को आंका जाता है। कालसर्पयोग में जो सर्प है वह राहु ही है।हस्तरेखा के जितने भी पाश्चात्य विद्वानहुए हैं उन्होंने हाथ पर राहु और केतुकी उपस्थिति का वर्णन नहीं कियाहै। भारतीय विद्वानों ने जो हस्तरेखापर पुस्तकें लिखी हैं उनमें हाथ परराहु और केतु का स्थान तो दिखायागया है परंतु वह अपने आप में पूरीजानकारी नहीं देता।वस्तुतः जीवन रेखा का शुरू का भागराहु का स्थान है। अगर इस भाग परकाले धब्बे हों पिन प्वाइंट जैसेछोटे-छोटे बिंदु हों, जंजीर जैसी रेखाहो, रेखाओं के गुच्छे बने हुए हों तोराहु खराब होता है और राहु के बुरेप्रभाव मनुष्य को भुगतने पड़ते हैं।राहु का दूसरा नाम धोखा है। ऐसाव्यक्ति धोखों का शिकार होता है।व्यापार में धोखा मिलता है, अपनों सेधोखा मिलता है, मां, पिता भाई, बहन,दोस्त, पत्नी तथा भागीदार या किसीसे भी धोखा मिलता है। उसका रुपयामारा जाता है। इसी क्रम में वह कर्जदार बन जाता है। जब हाथ में राहु ज्यादाखराब हो तो वह व्यक्ति को इतनाअधिक कर्जदार बना देता है कि व्यक्तिआत्महत्या करने की स्थिति में आजाता है या उसे शहर छोड़ कर भागनापड़ता है। खराब राहु व्यक्ति के प्रत्येककाम में टांग अड़ाता है। बना बनायाकाम खराब करता है। शादी में रूकावटडाल देता है। लगी लगाई नौकरी मेंबाधा डाल देता है। व्यक्ति पर केसबनवा देता है, नौकरी में निलंबितकरवा देता है। राहु झूठे मुकदमें मेंफंसवा देता है। हमारे जीवन में राहु2, 11, 20, 29, 38, 47, 56, 65, 74, 83, वर्षों में आता है। यदि राहु खराबहै तो इन वर्षों में अपनी खराबी दिखाताहै और जो खराबी इन वर्षों में आजाती है वह आगे भी चलती रहतीहै। शनि और राहु भी आपस में मित्रहैं। जब शनि का समय चल रहाहोता है तो उसमें भी खराब राहु अपनापूरा प्रभाव दिखाता है। हमारे जीवनमें 4, 13, 22, 31, 40, 49, 58, 67,76, 85 आदि शनि के वर्ष हैं। खराबराहु इन वर्षों में भी अपनी खराबीकरता है।यदि हाथ में राहु और केतु खराब हैतो वह व्यक्ति काल सर्प दोष सेपीड़ित है।कालसर्प योग का दूसरा कारक ग्रहकेतु है जो चंद्र पर्वत और शुक्र पर्वतके बीच स्थित हैं और मणिबंध रेखाको छूता है। अगर यह स्थान धंसाहुआ हो या इस पर ग् क्रॉस का चिन्हहो तो केतु खराब होता है। ज्योतिषशास्त्रों में केतु को देवताओं का नगरकोतवाल कहा गया है। जिसका केतुखराब होता है वह पुलिस के चक्करमें फंस जाता है। केतु जेल औरकचहरी का भी कारक है। खराब केतुव्यक्ति को मुकदमों में उलझा देता हैऔर जेल भी भिजवा देता है।

You have read half of this article

Log in to keep reading. Creating an account is completely free – with Google or mobile OTP, in a minute.

Log in & read more New here? Create a free account

Have a question about your life?

Get personal guidance on kundli, marriage, career and Vastu from experienced astrologers.

Consult Now