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वैशाख मास शुरू हो रहा है, वैशाख मास का महत्व, तुलसी पूजन, स्नान-दान के साथ ये काम करना होगा शुभ

वैशाख मास शुरू हो रहा है, वैशाख मास का महत्व, तुलसी पूजन, स्नान-दान के साथ ये काम करना होगा शुभ

आज से वैशाख मास शुरू हो रहा है। आज वैशाख कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि और शनिवार का दिन है। साथ ही आज शाम 05 बजकर 58 मिनट तक स्वाति नक्षत्र रहेगा। आपको बता दूं कि हमारी संस्कृति में वैशाख मास का बहुत महत्व है। शास्त्रों में वैशाख मास के दौरान किये जाने वाले बहुत-से यम-नियम आदि का जिक्र भी किया गया है, यानी आज से शुरू होकर वैशाख मास की पूर्णिमा तक ये यम-नियम आदि चलेंगे। अतः वैशाख मास का क्या महत्व है, इस दौरान किन नियमों का पालन करना चाहिए और उन नियमों का पालन करने से आपको कौन-से शुभ फलों की प्राप्ति होगी। जाने आचार्य इंदु प्रकाश से।

शास्त्रों में वैशाख पूर्णिमा का भी बड़ा ही महत्व है। विशाखा नक्षत्र से युक्त होने के कारण इसे वैशाख पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। माना जाता है कि वैशाख मास की पूर्णिमा को ही ब्रह्मा जी ने काले और सफेद तिल उत्पन्न किये थे, जिसके उपलक्ष्य में वैशाख पूर्णिमा को तिल युक्त जल से स्नान करने, अग्नि में तिलों की आहुति देने और तिल तथा मधु, यानी शहद का दान करने का विधान है। इस दिन ये सब कार्य करने से व्यक्ति के जीवन में खुशियां ही खुशियां आती हैं और आस-पास सब लोगों के साथ प्रेम भाव बना रहता है। आपको बता दूं कि वैशाख पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस बार वैशाख मास की पूर्णिमा 18 मई को है।

वैशाख मास के दौरान भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। इस दौरान भगवान विष्णु की माधव नाम से पूजा की जाती है। जानकारी के लिये बता दें कि वैशाख मास का एक नाम माधव मास भी है। स्कन्द पुराण के वैष्णव खण्ड में भी आया है-

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न माधवसमो मासो न कृतेन युगं समम्।
न च वेदसमं शास्त्रं न तीर्थं गंगया समम्।।   

अर्थात् माधवमास, यानी वैशाख मास के समान कोई मास नहीं है, सतयुग के समान कोई युग नहीं है, वेदों के समान कोई शास्त्र नहीं है और गंगाजी के समान कोई तीर्थ नहीं है। अतः माधव मास का बड़ा ही महत्व है। इस माह के दौरान आपको ऊँ माधवाय नमः.. मंत्र का नित्य ही कम से कम 11 बार जप करना चाहिए।

वैशाख मास के दिनों में जरुर करें ये काम

  • वैशाख मास के दौरान किये जाने वाले कार्यों में सबसे महत्वपूर्ण है – तुलसीपत्र से श्री विष्णु पूजा। जी हां, आज से लेकर पूरे 30 दिनों तक तुलसी की पत्तियों से भगवान विष्णु का पूजन किया जाना चाहिए। इससे व्यक्ति को करियर में तरक्की के साथ ही अच्छा स्वास्थ्य भी प्राप्त होता है। इसके अलावा उस व्यक्ति के घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
  • तुलसी पूजन के साथ ही इस दौरान घर आंगन में तुलसी का पौधा लगाना भी शुभ होता है। इस दौरान घर, मन्दिर या कार्यस्थल पर तुलसी का पौधा लगाने से और उचित प्रकार से पौधे की देखभाल करने से व्यक्ति की सफलता सुनिश्चित होती है, लिहाजा आप जीवन में लगातार आगे बढ़ते जायेंगे।
  • वैशाख या माधवमास के दौरान जप, तप, हवन के अलावा स्नान और दान का भी विशेष महत्व है। इस दौरान जो व्यक्ति श्रद्धाभाव से जप, तप, हवन, स्नान, दान आदि शुभकार्य करता है, उसका अक्षयफल उस व्यक्ति को प्राप्त होता है। जिस प्रकार कार्तिक मास के दौरान सुबह जल्दी उठकर स्नान के बाद भगवान की पूजा की जाती है, ठीक उसी प्रकार वैशाख मास के दौरान भी  सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। ऐसा करने से व्यक्ति को अश्वमेघ यज्ञ के समान फल मिलता है, यानी उसे जीवन में तरक्की ही तरक्की मिलती है।
  • वैशाख मास के दौरान घट दान, यानी मिट्टी का घड़ा दान करने का भी विधान है। इस दौरान अगर आप किसी मन्दिर में, बाग-बगीचे में, स्कूल में या किसी सार्वजनिक स्थान पर पानी से भरा मिट्टी का घड़ा रखेंगे, तो आपको बहुत ही पुण्य फल प्राप्त होंगे। इससे आपके जीवन में खुशहाली बनी रहेगी।
  • शास्त्रों के अनुसार वैशाख मास के दौरान अगर कुछ विशेष तिथियों में महत्वपूर्ण कार्यों की बात करें, तो वैशाख शुक्ल पक्ष की सप्तमी को गंगाजी का पूजन करना चाहिए। माना जाता है कि इस तिथि को महर्षि जह्नु ने अपने दाहिने कान से गंगा जी को बाहर निकाला था। इस दिन मध्याह्न के समय गंगा जी की पूजा की जाती है। जानकारी के लिये बता दूं कि इस बार गंगा सप्तमी 11 मई को शनिवार के दिन मनायी जायेगी।
  • वैशाख शुक्ल सप्तमी के बाद अष्टमी तिथि को, जो कि इस बार 12 मई को पड़ रही है, उस दिन मां दुर्गा के अपराजिता स्वरूप की प्रतिमा को कपूर और जटामासी से युक्त जल से स्नान कराना चाहिए तथा स्वयं आम्ररस से, यानी आम के रस से स्नान करना चाहिए। आपको बता दूं कि श्री बगलामुखी जयंती भी 12 मई को ही मनायी जायेगी। इस दिन दस महाविद्याओं में से एक देवी बगलामुखी की उपासना की जाती है, जबकि दस महाविद्याओं में से ही एक देवी छिन्नमस्ता की जयंती इसी महीने में 17 मई शुक्रवार के दिन मनायी जायेगी और उसी दिन नृसिंह चतुर्दशी व्रत भी किया जायेगा।

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