चौघड़िया क्या होता है?
चौघड़िया हिंदू पंचांग में समय देखने की एक पारंपरिक पद्धति है। इसमें दिन और रात को अलग-अलग आठ भागों में बांटा जाता है। प्रत्येक भाग को लगभग एक चौघड़िया कहा जाता है।
एक चौघड़िया की अवधि सामान्य रूप से लगभग 1 घंटा 30 मिनट होती है, लेकिन इसकी वास्तविक अवधि सूर्योदय और सूर्यास्त के समय के अनुसार बदलती रहती है।
चौघड़िया के सात प्रकार
चौघड़िया में कुल सात नाम होते हैं, जिनमें से कुछ शुभ और कुछ अशुभ माने जाते हैं।
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| चौघड़िया | मान्यता |
|---|---|
| अमृत | अत्यंत शुभ |
| शुभ | शुभ |
| लाभ | शुभ |
| चर | सामान्यतः शुभ |
| रोग | अशुभ |
| काल | अशुभ |
| उद्वेग | अशुभ |
अमृत, शुभ और लाभ को विशेष रूप से अच्छे समय के रूप में देखा जाता है। चर को यात्रा और गतिशील कार्यों के लिए अनुकूल माना जाता है।
2. राहुकाल क्या होता है?
राहुकाल को ज्योतिष शास्त्र में अशुभ समय माना जाता है। पारंपरिक मान्यता के अनुसार इस अवधि में नए और महत्वपूर्ण शुभ कार्य शुरू करने से बचना चाहिए।
राहुकाल हर दिन अलग-अलग समय पर आता है। यह सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच के समय को आठ बराबर भागों में बांटकर निकाला जाता है।
सप्ताह के अनुसार राहुकाल
| दिन | राहुकाल का आठ भागों में क्रम |
|---|---|
| सोमवार | दूसरा भाग |
| मंगलवार | सातवां भाग |
| बुधवार | पांचवां भाग |
| गुरुवार | छठा भाग |
| शुक्रवार | चौथा भाग |
| शनिवार | तीसरा भाग |
| रविवार | आठवां भाग |
ध्यान दें: राहुकाल का वास्तविक समय हर स्थान पर सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार बदलता है।
3. राहुकाल कैसे निकालें?
राहुकाल निकालने का तरीका बहुत आसान है।
- अपने शहर में सूर्योदय का समय पता करें।
- सूर्यास्त का समय पता करें।
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक के कुल समय को आठ बराबर भागों में बांटें।
- सप्ताह के दिन के अनुसार राहुकाल का निर्धारित भाग चुनें।
उदाहरण: यदि सूर्योदय सुबह 6 बजे और सूर्यास्त शाम 6 बजे है, तो दिन की कुल अवधि 12 घंटे होगी।
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