Know Today • Plan Tomorrow • Live Better
Home Articles Other Articles
Other Articles

छींक आते समय आंखें अपने आप बंद क्यों हो जाती हैं? जानिए इसके पीछे का विज्ञान

छींक आते समय आंखें अपने आप बंद क्यों हो जाती हैं? जानिए इसके पीछे का विज्ञान

छींक आते समय आंखें अपने आप बंद क्यों हो जाती हैं? जानिए इसके पीछे का विज्ञान

छींक हमारे शरीर की एक सुरक्षा प्रणाली है। जब धूल, पराग कण, धुआं, तेज़ गंध या कीटाणु हमारी नाक में पहुंचते हैं, तो शरीर उन्हें तेज़ हवा के झोंके से बाहर निकाल देता है। इसी को छींक कहते हैं। यह एक “रिफ्लेक्स” यानी अनैच्छिक क्रिया है, जिसे हम सोच-समझकर नहीं करते, बल्कि यह अपने आप होती है।

छींक कैसे आती है

  1. नाक के अंदर की संवेदनशील नसें किसी बाहरी कण या जलन को महसूस करती हैं।
  2. ये नसें, जिनमें मुख्य रूप से ट्राइजेमिनल नर्व शामिल है, दिमाग के निचले हिस्से (ब्रेनस्टेम) तक संदेश भेजती हैं, जहां छींक का केंद्र माना जाता है।
  3. दिमाग एक साथ कई मांसपेशियों को आदेश देता है: हम गहरी सांस लेते हैं, छाती और पेट की मांसपेशियां कसती हैं, और गला कुछ पल के लिए बंद होता है।
  4. फिर अचानक हवा तेज़ी से नाक और मुंह से बाहर निकलती है, और साथ में वे कण भी बाहर निकल जाते हैं।
  5. इसी पूरी प्रक्रिया के दौरान आंखें भी अपने आप बंद हो जाती हैं।

छींक आते समय आंखें बंद क्यों होती हैं

वैज्ञानिकों के अनुसार आंखों का बंद होना छींक के रिफ्लेक्स का ही एक हिस्सा है। जब दिमाग छींक का आदेश देता है, तो वह केवल सांस की मांसपेशियों को ही नहीं, बल्कि चेहरे की कई मांसपेशियों को भी एक साथ संकेत भेजता है। इनमें आंखों के चारों ओर की वह मांसपेशी भी शामिल है जो पलकें बंद करती है। इसलिए छींक और आंखों का बंद होना लगभग हमेशा साथ-साथ होते हैं।

लेकिन ऐसा होता क्यों है, इसके पीछे कोई एक पक्का कारण अभी तक साबित नहीं हुआ है। वैज्ञानिक इसके कुछ संभावित कारण बताते हैं:

Want answers for your own kundli?

Chat or call experienced astrologers on the AstroShrine app, in Hindi and English.

Get the App

1. आंखों को कीटाणुओं से बचाना: छींक के साथ नाक और मुंह से लार और बलगम की बहुत छोटी-छोटी बूंदें तेज़ी से बाहर निकलती हैं, जिनमें कीटाणु हो सकते हैं। आंखें बंद होने से ये बूंदें और कण आंखों में नहीं जा पाते।

ALSO READ  गोचर क्या होता है? जीवन पर ग्रह गोचर का प्रभाव

2. नसों का आपस में जुड़ा होना: नाक और आंखों की नसें आपस में काफी करीब से जुड़ी हैं। जिस ट्राइजेमिनल नर्व से छींक का संकेत जाता है, वही आंखों के आसपास के हिस्से से भी जुड़ी है। इसलिए जब यह नस सक्रिय होती है, तो आंखों से जुड़ी प्रतिक्रिया भी साथ में हो जाती है। यही कारण है कि छींक के समय अक्सर आंखों में पानी भी आ जाता है।

3. एक साथ होने वाली क्रियाओं का पैटर्न: हमारा दिमाग छींक को एक “पैकेज” की तरह चलाता है, जिसमें सांस लेना, मांसपेशियों का कसना, हवा का बाहर निकलना और आंखों का बंद होना सब एक तय क्रम में होता है। यह पैटर्न लाखों वर्षों के विकास में बना है।

क्या खुली आंखों से छींकने पर आंखें बाहर निकल सकती हैं?

यह सबसे मशहूर मिथक है, जो बचपन से हम सुनते आ रहे हैं। लेकिन विज्ञान के अनुसार यह सच नहीं है।

छींक के समय छाती और फेफड़ों में दबाव ज़रूर बढ़ता है, लेकिन आंखें इस दबाव से सीधे नहीं जुड़ी होतीं। आंखें मज़बूत मांसपेशियों और ऊतकों से अपनी जगह पर टिकी रहती हैं। इसलिए अगर कोई खुली आंखों से छींक भी ले, तो आंखें बाहर नहीं निकलेंगी।

क्या खुली आंखों से छींकना संभव है? हां, लेकिन बहुत मुश्किल है। ज़्यादातर लोगों के लिए यह रिफ्लेक्स इतना मज़बूत होता है कि आंखें अपने आप बंद हो जाती हैं। कुछ लोग कोशिश करके आंखें खुली रख पाते हैं, और इससे उन्हें कोई नुकसान नहीं होता। फिर भी, ऐसा करने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि आंखें बंद होना उन्हें छींक की बूंदों से बचाता है।

छींक से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

धूप देखकर छींक आना: कुछ लोगों को तेज़ धूप या रोशनी की ओर देखते ही छींक आ जाती है। इसे “फोटिक स्नीज़ रिफ्लेक्स” कहते हैं, और अनुमान है कि यह काफी लोगों में पाया जाता है। माना जाता है कि यह गुण माता-पिता से बच्चों में आ सकता है। इसका कारण भी आंख और नाक की नसों का आपस में जुड़ा होना माना जाता है।

You have read half of this article

Log in to keep reading. Creating an account is completely free – with Google or mobile OTP, in a minute.

Log in & read more New here? Create a free account

Have a question about your life?

Get personal guidance on kundli, marriage, career and Vastu from experienced astrologers.

Consult Now