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कुंडली के विभिन्न भावों में केतु का फल

कुंडली के विभिन्न भावों में केतु का फल

प्रथम भाव केतु यदि प्रथम भाव में हो तो व्यक्ति रोगी, चिन्ताग्रस्त, कमजोर, भयानक पशुओं से परेशान तथा पीठ के कष्ट का भागी होता है। वह अपने द्वारा पैदा की गई समस्याओं से लड़ने वाला, लोभी, कंजूस तथा गलत लोगों का चयन करने के कारण चिंतित रहता है। परिवार सुख का अभाव और जीवन साथी की चिन्ता सदा रहती है। उसे गिरने से चोट लगने का भय रहता है। किन्तु केतु के बली होने अथवा लाभदायक अवस्था में होने पर व्यक्ति जीवन में अच्छी प्रगति करता है तथा सभी प्रकार के सुख पाता है।

द्वितीय भाव केतु के द्वितीय भाव में होने पर जातक गले के कष्ट से पीड़ित तथा संसार के विरूद्ध जाने वाला होता है। परिवार से सुख में कमी तथा शासन द्वारा दंड का भय रहता है। वह सत्य को छिपाने वाला और अपनी बातों से दूसरों को चोट पहुंचाने वाला होता है। यदि केतु शुभ राशि में हो या उच्च का होकर किसी शुभ ग्रह से युति में हो तो वह सुख – सुविधा पूर्ण जीवन, अधिक आय, आज्ञाकारी परिवार तथा हृदय से संन्यासी वृत्ति का होता है।

तृतीय भाव तृतीय भाव में केतु जातक को बुद्धि मान, धनी तथा विरोधियों का सर्वनाश करने वाला बनाता है। वह बलशाली, शास्त्रों का ज्ञाता, विवाद में रूचि रखने वाला, परोपकारी तथा उद्यम से भरा पूरा होता है। वह खुली वृत्ति वाला, प्रसिद्ध, भाग्यवान, अपने लोगों से निकटता और स्नेह रखने वाला होता है। जीवन साथी से सुख तथा तीर्थ यात्राओं का शौकीन होता है। बाधित केतु बहरा, हृदय रोगी, बातूनी, दुखी, लिप्त तथा अपयश का भागी होता है।

चतुर्थ भाव चतुर्थ भाव में केतु व्यक्ति को निकट संबंधी से सुख का अभाव देता है। माता से सुख में कमी व मित्रों द्वारा अपमानित भी होता है। वह दूसरों पर विश्वास का सुख नहीं पाता तथा पारिवारिक धन की हानि पाता है। यदि केतु बाधित हो तो जीवन में आसानी से स्थिरता नहीं आती। भाई – बहनों के कारण दुख का भागी कुंडली के विभिन्न भावों में केतु का फल होता है। केतु के लाभदायक होने पर विजयी, ईमानदार, मृदुभाषी, धनी, प्रसन्न, दीर्घायु, माता – पिता से सुख तथा उत्तम वाहन पाता है।

पंचम भाव पंचम भाव में केतु जातक को कपटी, भयभीत, जल से भय रखने वाला, रोगी, निर्धन, निष्पक्ष, उदासीन तथा विभिन्न प्रकार के कष्टों का भागी बनाता है। वह ईश्वर से डरने वाला, पुत्र से सुख की कमी वाला तथा शासन से दंड का भय रखने वाला होता है। समस्याएं सदा मुंह बाए रहती हैं। कम संतान परन्तु अधिक पुत्रियों वाला हो सकता है। अपव्ययी, अकृतज्ञ तथा पेट के रोगों से ग्रस्त हो सकता है। उच्च का केतु होने पर संन्यासी, प्राचीन शास्त्रों और तीर्थाटन में रूचि वाला तथा किसी संस्था का उच्चाधिकारी हो सकता है। वह ज्ञानवान, भ्रमणशील, नौकरी से लाभ पाने वाला किन्तु व्यवसाय बदलते रहने वाला होता है।

षष्ठम भाव षष्ठम् भाव में केतु जातक को दयावान, संबंध स्नेही, ज्ञानी तथा लोक प्रसिद्धि पाने वाला होता है। वह अच्छे पद, विद्वानों का संग पसन्द करने वाला, शत्रुओं, विरोधियों को भयभीत रखने वाला होता है। वह रोग मुक्त, पशु प्रेमी, लोगों के सम्मान का भागी किन्तु माता के पूर्ण स्नेह में कमी वाला होता है। यदि केतु लाभदायक स्थिति में हो तो वह दूसरों की चिन्ता न करने वाला तथा अपने प्रभाव से उन्हें दबाकर अपनी सत्ता बनाने वाला होता है। किन्तु यदि केतु नीच का हो तो पेट के रोग, मिथ्याहंकारी, अलाभकारी कार्यों में लगा हुआ तथा दूसरों से ईमानदार न रहते हुए भी लाभ उठाने का प्रयास करने वाला होता है।

सप्तम भाव केतु जब सप्तम् भाव में स्थित होता है तो जातक को अस्थिर बुद्धि वाला, जीवन साथी से सुख में कमी तथा उसके साथ न चलने वाला बनाता है। केतु के बाधित होने पर विवाह में देरी, गलत कामों में रूचि तथा अतिरिक्त वैवाहिक सम्बन्ध बनाने वाला हो सकता है। शुभ केतु सदा चिन्ताग्रस्त परन्तु जीवन में सुख सुविधा से पूर्ण होता है।

अष्टम भाव अष्टम् भाव में केतु जातक को चरित्रहीन, व्यभिचारी, दूसरों की संपत्ति पर दृष्टि रखने वाला तथा लोभी प्रकृति का बनाता है। वह वाहन चलाने से भय रखने वाला होता है। उसके स्वभाव का बुरा पक्ष जल्दी सामने आ जाता है। वह नेत्र रोग से पीड़ित होता है। लाभकारी केतु उसे अच्छी धन संपदा प्रदान करता है। वह विदेश में वास करने वाला तथा व्यापार से अच्छी आय करने वाला होता है।

नवम भाव नवम् भाव में केतु जातक को क्रोधी, ईष्र्यालु, निंदक तथा धर्म में अस्थिर आस्था रखने वाला बनाता है। वह सुखों में विशेष रूचि रखता है तथा इस कारण नीच लोगों से मित्रता रखने में भी नहीं हिचकता। निकट संबंधियों से सुख प्राप्ति में कमी हो सकती है। बाजुओं में कष्ट व पिता से सम्बन्धों में तनाव का भागी हो सकता है। बाधित केतु बहुत बुरे परिणाम देता है किन्तु विदेश से अच्छी आय का भी कारक होता है। यदि केतु शुभ हो तो जातक साहसी, दयावान, दानी, बुद्धिमान तथा ईश्वर से डरने वाला होता है।

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