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जब सूर्य सप्तम भाव में हो तो ? जानें इसके प्रभाव…

जब सूर्य सप्तम भाव में हो तो ? जानें इसके प्रभाव…

जब सूर्य सप्तम भाव में हो तो निम्लिखित बातों का ध्यान रखें-

 भोजन पकाने के बाद नित्य उसे खाने से पहले कुछ अंश आग में डाल दें।
 जब बच्चों एवं परिवार पर आर्थिक दुष्प्रभाव हो तो तांबे के चैकोर टुकड़े जमीन में गाड़े या काम पर जाने से पहले थोड़ा मीठा खाकर पानी पिएं। शुक्र की चीजें दही आदि मनहूस सिद्ध होंगी। काला रंग शुभ होगा।
 जब सब कुछ बुरा-ही-बुरा हो रहा हो तो बुध का उपाय करें।
 यदि शनि का लग्न में गोचर हो तो चंद्र निःसहाय हो जाता है। ऐसे में चूल्हे की आग दूध से बुझाएं। अगली सुबह से पहले दुबारा न जलाएं।
 सूर्य-बुध 9 में तथा बुध 3 या 5 में हो तो सूर्य दुष्फल देगा। ऐसी स्थिति में घर में पुराने बड़े-बड़े बर्तन रखने से क्षेम होगा।
 यदि सूर्य पर शनि की कुदृष्टि के कारण अशुभ फल बढ़ता हो तो जातक घर की दक्षिणी दीवार के पास पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पानी से भरा घड़ा दाएं हाथ की तरफ गाड़ दें। ध्यान रहे, वह 41-42 दिनों तक सूखने न पाए। यदि सूर्य के पूर्ववर्ती भावों में शनि हो तो अशुभ

निवारणार्थ शनि के उपाय करने चाहिए।
 चार बड़ों के पांव छूकर आर्शीवाद लेने से चंद्र के फलों में वृध्दि होगी। ऐसे में चंद्र की वस्तुओं-दूध, दही आदि को नहीं बेचना चाहिए। चांदी, चावल एवं मोती घर में रखना विशेष शुभकारक होगा।
 एकादश का सूर्य सात्विक प्रवृत्ति, शाकाहार एवं धार्मिक होने पर ही शुभदायी होगा, अन्यथा बहुत बुरे फल देता है। सूर्य के कुप्रभावों से बचने के लिए सोने के बजाय लाल तांबा पहनें। चंद्र की स्थिति में मोती धारण करें।
 जब सूर्य अन्य ग्रहो को पीड़ित करे तो सूर्य के मित्रों (चंद्र, मंगल, बुध) का उपाय करें। चूल्हे की आग बुझाने में दूध का उपयोग हितकारी होगा।
 जब सूर्य दूसरे घर में हो एवं आठवां घर खाली हो तो द्वितीय भाव तथा सूर्य की वस्तुएं लाभकारी होंगी। द्वितीय भावस्थ सूर्य घर की स्त्रियों (मां, बहन, भाभी, चाची) के लिए अशुभ फलदायी होता है। ऐसे में नारियल का तेल और अखरोट मंदिर में दान करें।
 यदि सूर्य 4 में, उसके मित्र 10 में और शत्रु 5 में हो तो अशुभ फल होगा । चाहे चंद्र ही 5 में क्यों न हो। ऐसे में मंगल के उपाय लाभ पहुंचाते हैं।
 जब षष्ठम में बैठकर सूर्य केतु सम्बन्धी रिश्तेदारों बच्चे, मामा को प्रभावित करे तो इसके लिए बन्दरों को गुड़, दीमकों को गेहूं या बाजरा देना हितकर होगा। सूर्य के दुष्प्रभाव से उन्हें बचाने के लिए घर में घोड़ा पालना, नदी-जल एवं चांदी रखना भी अति उत्तम होगा।
 सूर्य 6 में और 3 खाली हो तो नौकरी-व्यापार में बाधाएं आती हैं। ऐसे में कुत्तों को खाना खिलाना लाभकारी है।
 यदि मंगल 10 में तथा सूर्य 6 में हो तो बच्चों को कष्ट होता है। चंद्र से सम्बन्धित वस्तुएं रात में तकिये के नीचे रखें तथा सुबह गरीबों में बांट दें।
 यदि एकादश चंद्र जातक की मां को सताए तो मां अपना सिर और आंखे दूध से धोए या भैरव मंदिर में दूध चढ़ाए।
 अगर चंद्र 11 में हो और जातक की पत्नी बच्चे को जन्म देने वाली हो तो मां को घर छोडकर अन्यत्र चले जाना चाहिए। तत्पश्चात 43 दिन से पहले पोते का मुंह नही देखना चाहिए।
 यदि एकादश चंद्र जातक की मां का अनिष्ट कर रहा हो तो 121 बच्चों में बांटें। पेड़े लेने के लिए बच्चे न मिले तो उसे नदी-जल में प्रवाहित करें।
 यदि जन्मकुंडली का द्वादश चंद्र लग्न में गोचर करे या गोचर करता हुआ फिर द्वादश मे आए तो बहुत बुरे फल देता है। ऐसे में बृहस्पति के उपाय करने से लाभ होता है। कभी-कभी मंन्दिर जाना लाभकर होगा।

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