राशियों द्वारा वास्तु भविष्य प्रत्येक राशि के भी 4 चरण निर्धारित किये गये हैं। कहीं-कहीं इन चरणों को पाद या वर्ग कहकर पुकारा गया है। प्रत्येक राशि के चरणों में वास्तु का विचार एवं वास्तु के भविष्य का फलकथन निम्नलिखित रूप से किया गया है।
मेष
प्रथम चरण : मकान गली में होगा। गली दक्षिण से उत्तर दिशा वाली होगी। मकान का खुला भाग (ब्रह्म स्थान) घर में पश्चिम दिशा की ओर होगा। मकान के दक्षिण दिशा की ओर मंदिर (पूजा स्थल) होगा, परंतु वहां नियमित पूजा नहीं होगी। गली में गणेश जी की मूर्ति ऊंचे स्थान या खुले मैदान में होगी, जहां आसपास कुआं या जल संग्रह का स्थान होगा।
द्वितीय चरण : मकान की गली पश्चिम से पूर्व की ओर होती हुई उत्तर दिशा को जाएगी। गली के दक्षिण-पश्चिम (र्नैत्य) में एक मंदिर या तालाब होगा। उत्तरी दिशा की ओर बड़ा जल संग्रह होगा जिस कारण मकान जल्द ही खण्डहर में परिवर्तित हो जाएगा।
तृतीय चरण : मकान गली में होगा जो उत्तर से दक्षिण की ओर जा रही होगी। मकान का खुला भाग (ब्रह्म स्थान) पश्चिम दिशा की ओर होगा। मकान के दोनों ओर खुली जगह होगी। मकान के पास ही शिव मंदिर होगा। सिंह एवं वृश्चिक राशि की दिशा में ऐसा मंदिर होगा, जहां छोटे देवताओं की पूजा होती होगी। वहीं पर एक कुआं (जल संग्रह स्थान) होना भी संभव है।
चतुर्थ चरण : मकान ऐसा होगा, जिसकी गली पूर्व से पश्चिम की ओर होगी तथा मकान दक्षिणोन्मुखी होगा। मकान के दक्षिण में तालाब होगा। मकान के सिंह और मकर राशि के स्थान में एक मंदिर का बगीचा होगा। तुला एवं मेष के स्थन पर पूजा का छोटा सा स्थल होगा, जहां शिव के गणों की पूजा होगी।
वृष :
प्रथम चरण : मकान पुर्वोन्मुखी हेगा तथा मकान के सामने दक्षिण में उत्तर की ओर गली होगी। जातक के मकान से तीसरा मकान टूटा-फूटा एवं त्रुटिपूर्ण होगा। उस स्थान में जगह-जगह से पानी टपकता होगा। मकान के आग्नेय में जल संग्रह होगा। वृष एवं वृश्चिक राशि के स्थान में देवी का मंदिर (पूजा स्थल) होगा।
द्वितीय चरण : मकान दक्षिणोन्मुखी होगा एवं मकान के सामने पश्चिम से पूर्व की ओर मार्ग होगा। मकान के पश्चिम भाग में गणेश जी का मंदिर होगा। तुला, मिथुन एवं कुंभ के स्थान में मॉ दुर्गा का मंदिर होगा, जहां देवियों की पूजा होगी। मकान के पिछले हिस्से में गृहदेवता (पितृश्वरों) का वास होगा, जो घर की रक्षा करते रहेंगे।
तृतीय चरण : मकान पश्चिमोन्मुखी होगा तथा मकान के सामने दक्षिण से उत्तर की तरफ मार्ग होगा। मकान के मार्ग में गणपति का मंदिर होगा।
चतुर्थ चरण : मका उत्तरोमुन्खी होगा तथा मकान के सामने का मार्ग पश्चिम से पूर्व की ओर होगा। मकान में दो परिवारों का निवास होगा। उत्तर दिशा में मंदिर होगा, जहां काली एवं शक्ति की उपासना होगाी। पूर्वी भाग में गणपति का मंदिर होगा।
मिथुन :
प्रथम चरण : मकान के सामने का मार्ग दक्षिण से उत्तर की ओर होगा। मकान का खाली भाग (ब्रह्मस्थान) पूर्व की ओर होगा। मार्ग में गणपति का मंदिर होगा। मकान के बाहर कार रखने का स्थान (पार्किग) होगा। मकान में पुरुष प्रधान देवता का पूजा होगा।
द्वितीय चरण : मकान ऐसा होगा जिसके सामने पूर्व से पश्चिम की ओर मार्ग होगा। दक्षिण में कोई फव्वारा या झरना होगा। यहीं पर ईशान में मॉ दुर्गा का मंदिर होगा। मकान में शक्ति के रूप में देवी की पूजा होगी।
तृतीय चरण : मकान के सामने दक्षिण से उत्तर की ओर राजमार्ग होगा। मकान में खुली जगह (ब्रह्म स्थान) पश्चिम में होगी। जातक ऐसे मकान में रहेगा जो उसके पिता या दादा द्वारा बनवाया गया होगा। वृष राशि के स्थान में शिव मंदिर तथा आग्नेय में देवी का मंदिर होगा। दक्षिण में छोटा-सा झरना या फव्वारा होगा।
चतुर्थ चरण : मकान के सामने का मार्ग पूर्व से पश्चिम की ओर होगा। जातक जिस मकान में रह रहा होगा, वह उसके दादा का होगा। जातक के जन्म के बाद परिवार के खर्च में असाधारण वृद्धि होगी। मकान में अनेक प्रकार के छोटे देवताओं का पूजन होगा।
कर्क :
प्रथम चरण : मकान ऐसी गली में होगा जो दक्षिण से उत्तर की ओर जा रही होगी। मकान का खुला स्थान पश्चिम की ओर होगा। मकान के पास सुंदर बगीचा, पुल तथा हरियाली होगी। मकान के मार्ग में गणपति का मंदिर होगा। तुला, कुंभ और मेष के स्थान में जल-स्थान अथवा मां दुर्गा का मंदिर होगा।
द्वितीय चरण : मकान की गली पूर्व से पश्चिम की ओर होगी। मकान की खुली जमीन दक्षिण दिशा में होगी, जहां मोड़ होगा। मकान के सामने कोई अन्य मकान नहीं होगा। मकान में एक अन्य परिवार भी रह रहा होगा। मेष एवं तुला के स्थान में मंदिर होगा। कुंभ राशि के स्थान में मंदिर तथा मकान के मार्ग में प्रतिष्ठित साधु-संतों का स्थान होगा।
तृतीय चरण : मकान ऐसी गली में होगा जो दक्षिण से उत्तर की ओर होगी। मकान का खुला भाग पूर्व दिशा में होगा। मकान में मेष, तुला एवं मीन स्थान में मंदिर होगा। मकान के कर्क एवं वृश्चिक स्थान की ओर बाजार होगा। परिवार में छोटे देवता इत्यादि की पूजा होगी।
चतुर्थ चरण : पूर्व से पश्चिम गली वाला मकान होगा। मकान का खुला आंगन उत्तर दिशा में होगा। मकान के र्नैत्य (दक्षिण-पश्चिम) में विष्णु का मंदिर, पूर्व में शिव का मंदिर, उत्तर में दुर्गा का मंदिर या तालाब होगा।
सिंह :
प्रथम चरण : मकान पूर्व से पश्चिम गली वाला होगा। मकान का खुला भाग (प्रांगण) दक्षिण की ओर होगा। मकान में तीन परिवारों का आवास होगा। मकान के दोनों ओर मोड़ होगा। इस मकान में रहने वाला व्यक्ति सुख-सम्पन्न एवं कीर्तिवान होगा।
द्वितीय चरण : मकान ऐसी जगह होगा, जहां का मार्ग दक्षिण से उत्तर की ओर होगा। खुला आंगन पूर्व में होगा। वृष, कन्या मकर के स्थान में शिव मंदिर होगा। गृहस्वामी के पांच भाई-बहन होंगे। उसके पिता के दो भाई होंगे।
तृतीय चरण : मकान पूर्व से पश्चिम दिशा की ओर वाली गली में होगी। मकान के अग्रिम भाग में उत्तर की ओर खुला प्रांगण होगा। इस मकान के पास वाला मकान ध्वस्त हो जाएगा। मकान के मेष, धनु, मकर एवं मीन के स्थान में देवी का मंदिर होगा गृहस्वामी मां काली का उपासक होगा।
चतुर्थ चरण : मकान ऐसी गली में होगा जो दक्षिण से उत्तर की ओर होगी। मकान का खुाला स्थान पश्चिम में होगा मकान दो भागों में विभक्त होगा। मकान के मेष, तुला एवं मकर स्थान में पानी का तालाव, कुंआ या मंदिर होगा। गृहस्वामी शिव भक्त होगा।
कन्या :
प्रथम चरण : मकान दक्षिण से उत्तर राजमार्ग पर होगा। मकान का खुला आंगन उत्तर में होगा। पश्चिम की ओर गहरा तालाब होगा। दक्षिण की ओर सुंदर पार्क तथा पूर्व दिशा की ओर खुला तालाब होगा। मकान के खुले भाग में वृक्ष व गमले होंगे। उत्तर दिशा की ओर शिव जी का मंदिर होगा।
द्वितीय चरण : मकान ऐसा होगा जिसका राजमार्ग दक्षिण से उत्तर की तरफ होगा। मकान का खुला भाग पूर्व की ओर होगा। मकान के दोनों और सुंदर मकान होंगे। मकान के पश्चिम की ओर तालाब होगा। मकान के मेष, कर्क एवं धनु राशि वाले हिस्से में देवी का मंदिर होगा। गृहस्वामी पुरुष देवता का उपासक होगा।
तृतीय चरण : मकान पूर्व और पश्चिम की ओर गली में होगा। खुली जमीन अथवा आंगन दक्षिण में होगा। वहां वृक्ष, पौधे व गमलों का संग्रह होगा। मकान में वृश्चिक, मीन एवं मिथुन राशि के स्थान में शिव मंदिर होगा। मेष, तुला और मकर राशि के स्थान में तालाब या कुआं होगा। जातक गृह देवता के रूप में मां काली की उपासना करेगा।
चतुर्थ चरण : मकान दक्षिण से उत्तर जाने वाले मार्ग पर होगा। खुली जमीन पश्चिम में होगी। मकान के पूर्वी भाग में बगीचा या कुआं होगा। घर के पास बाहर एक मोड़ होगा। गली में सप्त कन्या पीठ का एक मंदिर होगा। गृह देवता के रूप में व्यक्ति पुरुष प्रधान देवता का पूजन करेगा।
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