Home Articles अन्य लेख
अन्य लेख

नागों की कृपा, बाधाओं के निवारण, कालसर्प दोष की शांति, सुरक्षा एवं रहस्यमय प्रगति के लिए


7

॥ नाग स्तोत्रम् पुरश्चरण साधना विधि ॥

(नागों की कृपा, बाधा निवारण, कालसर्प दोष शांति, रक्षा व रहस्यमय उन्नति हेतु)

🔱 1. पुरश्चरण क्या है?

“पुरश्चरण” का अर्थ होता है — मंत्र/स्तोत्र की पूर्व साधना, जिसमें विशेष संख्या में पाठ, जप, हवन, तर्पण, मार्जन, ब्राह्मण भोजन आदि करके उस स्तोत्र/मंत्र की पूर्ण शक्ति प्राप्त की जाती है। यह साधना विशेष उद्देश्य, भक्ति या सिद्धि हेतु की जाती है।


🐍 2. नाग स्तोत्र पुरश्चरण कब करें?

उत्तम समय:

  • श्रावण मास (विशेषकर नाग पंचमी पर आरंभ करें)
  • शुक्ल पक्ष में किसी पंचमी, सोमवार, बुधवार को
  • राहुकाल में न करें (क्योंकि नागों का काल नियंत्रण से जुड़ा पक्ष है)
  • सिद्ध योग, अमृत योग, पुष्य नक्षत्र, शतभिषा, अनुराधा उत्तम

🔥 3. क्यों करें? (लाभ)

उद्देश्य लाभ
कालसर्प दोष निवारण कुण्डलीगत बाधा से मुक्ति
भय, व्याधि, संतान बाधा नागों की कृपा व रक्षा
तांत्रिक बाधा/सर्पदोष रक्षा कवच निर्माण
गुप्त विद्याओं की सिद्धि नाग शक्ति का आह्वान

🧘‍♂️ 4. कहाँ करें? (स्थान)

  • शिव मंदिर या नागदेवता की प्रतिमा के समीप
  • घर में पूर्व या उत्तर दिशा में स्वच्छ स्थान
  • नाग पाताल चित्र/मूर्ति (सांकेतिक नाग) स्थापित करें
  • तांत्रिक साधक पीपल, बिल्व वृक्ष के पास रात्रिकाल में भी कर सकते हैं
ALSO READ  🔱🚨 बड़ी खबर: श्री महाकाल धाम अमलेश्वर में पूजा-अनुष्ठान हुए शुरू! अब घर बैठे बुक करें वैदिक पूजा — संकल्प से लेकर अनुष्ठान तक पूरी व्यवस्था एक ही मंच पर

🪔 5. कैसे करें? (विधि)

पूजन सामग्री:

  • नाग चित्र/मूर्ति
  • दुग्ध, कर्पूर, चंदन, बिल्वपत्र
  • तांबे का लोटा (जल से भरा)
  • कुशा आसन
  • दीपक, धूप, नैवेद्य
  • रुद्राक्ष माला (108 बीजों वाली)

साधना विधि (विस्तार से):

✅ (1) संकल्प:
“ॐ नमो नागराजाय। आज मैं [अपना नाम] अमुक संख्या में नाग स्तोत्र का पुरश्चरण कर रहा हूँ… [उद्देश्य बताएं]… कृपया सिद्धि प्रदान करें।”

✅ (2) न्यास एवं ध्यान:
ध्यान करें —
“त्रिनेत्रं, नीलवर्णं, सर्पलिप्तं महाबलम्।
नागेश्वरं नमाम्यद्य, सर्वदोष विनाशकम्॥”

✅ (3) स्तोत्र पाठ
प्रत्येक दिन कम से कम 11, 21, 108 बार नाग स्तोत्र का पाठ करें।
(स्तोत्र नीचे दिया जा रहा है)

✅ (4) जप के बाद तर्पण (तुलसी जल या दुग्ध से), दीप दान करें
✅ (5) समापन पर हवन, तर्पण, ब्राह्मण भोजन आवश्यक


📿 6. कितनी बार करें?

पुरश्चरण संख्या (नियम):

  • सरल: 11 पाठ प्रतिदिन × 9 दिन
  • मध्यम: 108 पाठ प्रतिदिन × 21 दिन
  • पूर्ण: 1000 पाठ कुल, + 10% हवन, तर्पण, मार्जन, भोजन

आप इस लेख का आधा भाग पढ़ चुके हैं

आगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें। खाता बनाना पूरी तरह निःशुल्क है – Google या मोबाइल OTP से, एक मिनट में।

लॉगिन करें और आगे पढ़ें नया यूज़र? निःशुल्क खाता बनाएँ

क्या आपके जीवन में कोई प्रश्न है?

अनुभवी ज्योतिषियों से कुंडली, विवाह, करियर और वास्तु पर व्यक्तिगत परामर्श लें।

अभी परामर्श लें