Home Articles अन्य लेख
अन्य लेख

भाई दूज 2026: यमराज और यमुना की कथा, तिलक विधि, मुहूर्त और महत्व

भाई दूज 2026: यमराज और यमुना की कथा, तिलक विधि, मुहूर्त और महत्व

भाई दूज 2026: यमराज और यमुना की कथा, तिलक विधि, मुहूर्त और महत्व

भाई दूज कब है

भाई दूज कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाया जाता है, जो दिवाली के दो दिन बाद आती है। इसे “यम द्वितीया” भी कहा जाता है।

पंचांग के अनुसार 2026 में भाई दूज 10 नवंबर, मंगलवार के आसपास पड़ने की संभावना है। द्वितीया तिथि कभी-कभी दो दिनों में बंटी होती है, इसलिए सही तारीख अपने स्थानीय पंचांग से अवश्य जांच लें।

भाई दूज 2026 का अनुमानित मुहूर्त

नीचे दिया गया समय केवल एक अनुमान है। यह पक्का समय नहीं है, और आपके शहर में यह आगे-पीछे हो सकता है।

अपनी कुंडली पर जवाब चाहिए?

AstroShrine ऐप पर अनुभवी ज्योतिषियों से चैट या कॉल करें — हिंदी और English में।

ऐप डाउनलोड करें
विवरण अनुमानित समय
तिलक का संभावित शुभ समय दोपहर लगभग 1:00 से 3:30 बजे के बीच (अपराह्न काल)
यमुना स्नान का संभावित समय सुबह, सूर्योदय के बाद

सही और सटीक मुहूर्त जानने के लिए अपने शहर का पंचांग या अपने पंडित जी से अवश्य पुष्टि करें।

यमराज और यमुना की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्य देव और उनकी पत्नी संज्ञा की दो संतानें थीं – पुत्र यमराज और पुत्री यमुना। दोनों भाई-बहन में बहुत प्रेम था। समय के साथ यमराज मृत्यु के देवता बने और यमलोक का कार्यभार संभालने लगे, जबकि यमुना पृथ्वी पर नदी के रूप में बहने लगीं।

यमुना अपने भाई से बहुत प्रेम करती थीं और बार-बार उन्हें अपने घर भोजन के लिए बुलाती थीं। लेकिन यमराज अपने काम में इतने व्यस्त रहते थे कि वे बहन के निमंत्रण को टालते रहे।

एक दिन, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को, यमुना ने फिर से भाई को आने का आग्रह किया। इस बार यमराज ने सोचा कि मैं तो सबके प्राण हरने वाला हूं, मुझे कोई अपने घर नहीं बुलाता, लेकिन मेरी बहन इतने प्रेम से बुला रही है। उसका मान रखना मेरा कर्तव्य है।

यमराज अपनी बहन के घर पहुंचे। भाई को देखकर यमुना की खुशी का ठिकाना न रहा। उन्होंने स्नान करके भाई का स्वागत किया, उनके माथे पर तिलक लगाया, आरती उतारी और उन्हें तरह-तरह के स्वादिष्ट व्यंजन खिलाए।

बहन के प्रेम और सत्कार से यमराज बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने यमुना से वरदान मांगने को कहा। यमुना ने कहा, “भैया, आप हर साल इसी दिन मेरे घर आया करें। और इस दिन जो भी भाई अपनी बहन के घर जाकर उससे तिलक करवाए और उसके हाथ का भोजन करे, उसे आपका भय न रहे।”

ALSO READ  नवरात्रि: मां दुर्गा की भक्ति और शक्ति का पावन पर्व

यमराज ने “तथास्तु” कहकर यह वरदान दे दिया और बहन को उपहार देकर यमलोक लौट गए। तभी से इस दिन को “यम द्वितीया” या “भाई दूज” के रूप में मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भाई-बहन के साथ यमुना नदी में स्नान करने का भी विशेष महत्व है।

श्रीकृष्ण और सुभद्रा की कथा

एक अन्य कथा के अनुसार, नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्रीकृष्ण इसी दिन अपनी बहन सुभद्रा से मिलने पहुंचे। सुभद्रा ने दीप जलाकर, फूलों और मिठाइयों से उनका स्वागत किया और उनके माथे पर तिलक लगाकर उनकी लंबी आयु की कामना की। कई जगहों पर इसी कथा से भी भाई दूज की परंपरा को जोड़ा जाता है।

भाई दूज का महत्व

भाई दूज भाई-बहन के रिश्ते की मिठास और एक-दूसरे के प्रति ज़िम्मेदारी का प्रतीक है। रक्षाबंधन पर जहां बहन भाई की कलाई पर राखी बांधती है, वहीं भाई दूज पर वह भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी आयु की प्रार्थना करती है। मान्यता है कि इस दिन बहन के हाथ से तिलक लगवाने और भोजन करने से भाई को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।

इसी दिन कई परिवारों, विशेषकर कायस्थ समाज में, भगवान चित्रगुप्त की पूजा भी की जाती है, जिन्हें यमराज का लेखाकार माना जाता है। इस दिन कलम-दवात की पूजा की परंपरा भी है।

देश भर में भाई दूज के अलग-अलग नाम

  • भाई दूज / यम द्वितीया: उत्तर भारत
  • भाऊ बीज: महाराष्ट्र, गोवा और कर्नाटक
  • भाई फोंटा: पश्चिम बंगाल
  • भाई टीका: नेपाल
  • भतरु द्वितीया या भ्रातृ द्वितीया: कई अन्य क्षेत्र

भाई दूज पूजा सामग्री

  • रोली या कुमकुम और अक्षत (साबुत चावल)
  • घी का दीया
  • कलावा (मौली)
  • मिठाई और सूखा नारियल (गोला)
  • फूल और फूलमाला
  • पान, सुपारी और बताशे
  • चौक बनाने के लिए चावल का आटा
  • भाई के लिए आसन या चौकी
  • भोजन के लिए भाई के पसंदीदा पकवान

भाई दूज पर तिलक करने की विधि

  1. सुबह स्नान करके साफ वस्त्र पहनें। हो सके तो भाई-बहन साथ में यमुना या किसी पवित्र नदी में स्नान करें।
  2. घर में चावल के आटे से एक चौक (रंगोली) बनाएं और उस पर भाई के बैठने के लिए आसन रखें।
  3. पूजा की थाली में रोली, अक्षत, दीया, मिठाई, नारियल और कलावा सजाएं।
  4. शुभ मुहूर्त में भाई को आसन पर बिठाएं। मान्यता के अनुसार भाई का मुख उत्तर या पूर्व दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है।
  5. बहन भाई के माथे पर रोली का तिलक लगाए और उस पर अक्षत लगाए।
  6. भाई की कलाई पर कलावा बांधें और उसके हाथ में सूखा नारियल, पान और सुपारी दें।
  7. दीया जलाकर भाई की आरती उतारें और उसकी लंबी आयु, सुख और सफलता की प्रार्थना करें।
  8. भाई को अपने हाथ से मिठाई खिलाएं।
  9. भाई बहन को उपहार दे और उसकी रक्षा का वचन दे। परिवार की परंपरा के अनुसार छोटे, बड़ों का आशीर्वाद लें।
  10. इसके बाद भाई बहन के घर भोजन करे, जो इस पर्व की सबसे प्यारी परंपरा है।

आप इस लेख का आधा भाग पढ़ चुके हैं

आगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें। खाता बनाना पूरी तरह निःशुल्क है – Google या मोबाइल OTP से, एक मिनट में।

लॉगिन करें और आगे पढ़ें नया यूज़र? निःशुल्क खाता बनाएँ

क्या आपके जीवन में कोई प्रश्न है?

अनुभवी ज्योतिषियों से कुंडली, विवाह, करियर और वास्तु पर व्यक्तिगत परामर्श लें।

अभी परामर्श लें