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कुंडली मे विवाह के योग

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आज के digital दौर में तकनीक की लहरों पर सवार युवा वैज्ञानिकता, आधुनिकता और खुद को अतिविकसित होने का तर्क चाहे जो भी दें, लेकिन वे jyotish विज्ञान को नकार नहीं सकते हैं, सच तो यह भी है कि ज्योतिषीय दृष्टिकोण अपनाकर ही वैवाहिक जीवन में प्रेम, सौहार्द्र, संस्कार और संवेदनशीलता की सुखद स्थितियों के संचार की उम्मीद की जा सकती है, प्रत्येक व्यक्ति के जीवन को प्रभावित करने वाले ग्रहों की दिशा और दशा के अनुसार विवाह योग बनते-बगड़ते हैं, जिन्हें समय रहते संतुलित किया जा सकता है, तो जन्म तिथि, समय व जन्म स्थान आधारित Kundaliyon का मिलान कर वैवाहिक जीवन की सफलता की कामना की जा सकती है।

कुंडली मे विवाह के योग-

  • ज्योतिष शास्त्र  के अनुसार बेहतर विवाह योग के लिए कुंडली के दूसरे, पांचवें, सातवें, आठवें और बारहवें घरों में बनी ग्रहों की स्थिति पर ध्यान दिय जाता है, इनमें मंगल, शनी, सूर्य, राहू और केतु ग्रहों की स्थिति का विशेष तौर पर परिणामी आकलन किया जाता है, इस आधार पर ही विवाह के उपयुक्त समय का निर्धारण भी संभव हो पाता है, पुरुष के लिए विवाह का कारक ग्रह जहां शुक्र है, वहीं स्त्री के लिए बृहस्पति होता है।
  • ये दूसरे ग्रहों के प्रभाव में आकर ही विवाह की अनुकूल या प्रतिकूल स्थितियां पैदा करते हैं, स्त्री की kundli का आठवां घर उसके भाग्य को दर्शाता है, तो स्त्री व पुरुष की कुंडली का बारहवां घर शैया-सुख अर्थात सुखद यौन-संबंध के बारे में बताता है इसी अनुसार विपरीत लिंग के बीच लैंगिक आकर्षण बनता है और उनमें एक-दूसरे के प्रति अनुभूति प्रदान करने वाली भावनाएं जागृत होती हैं।
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  • विवाह तय होने, वैवाहिक जीवन की मधुरता और पति-पत्नी की चारित्रिक विशेषताओं का आकलन करने, संतान-सुख मिलने तथा तलाक की नौबत आने तक की बातों का विश्लेषण काफी जटिलता लिए होता है, वैसे कोई भी व्यक्ति चाहे तो अपनी कुंडली के सातवें घर को देखकर अपने विवाह के साथ-साथ जीवनसाथी संबंधी संभावनाएं जान सकता है, इस स्थान का कारक ग्रह शुक्र है, लेकिन यहां शनि की स्थिति मजबूत बनने और बृहस्पति के कमजोर पड़ जाने के कारण कुशल विवाह योग प्रभावित हो जाता है, सूर्य के प्रभाव में आने से तलाक जैसी परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, तो मंगल के आने से मांगलिक योग बन जाता है।
  • ज्यादातर लोग मंगल को ही विवाह के लिए बाधक मानते हैं, इसे मंगल योग कहा गया है, यह योग kundali के पहले, चैथे, सातवें और बारहवें घर में मंगल के होने से बनता है, यह विवाह में विलंब, विवाह के बाद दांपत्य में कलह, दंपति के स्वास्थ्य में गिरावट, दंपति के संबंध-विच्छेद यानि तलाक, या फिर जीवनसाथी की मृत्यु तक की आशंकाओं को भी जन्म देता है, मंगल योग के प्रभाव वाले व्यक्तियों का विवाह 27, 29, 31, 33, 35 या 37 वर्ष की उम्र में ही संभव हो पाता है।
  • इसके अतिरिक्त सातवें स्थान पर बुध की शक्ति भी कम हो जाती है, Rahu or Ketu के आने से जीवनसाथी से अलगाव की स्थितियां पैदा हो जाती हैं, राहू के सातवें घर में होने की स्थिति में पति-पत्नी के बीच नहीं चाहते हुए भी दूरी बढ़ने लगती है, दोनें में से किसी एक के मन में विरक्ती के भाव या वैसी अप्रत्याशित परिस्थितियां पैदा होने से अलगाव सुनिश्चित हो जात है, यह कहें कि पत्नी अगर पति से दूर भागती है, तो पति मजबूरन पत्नी से दूरी बनाए रहता है, दोनों की kundli के सातवें घर में राहू या केतु के होने की स्थिति में विवाह के सालभर के भीतर ही तलाक की नौबत आ जाती है।
  • इसी तरह से केतु के होने की स्थिति में दंपति आजीवन अलग-अलग जीवन व्यतीत करने को विवश होते हैं या फिर पति-पत्नी न तो एक-दूसरे को पसंद करते हैं, और न ही वे वैचारिक स्तर पर मधुरता कायम कर पाते हैं, हालांकि इसे ज्योतीषिया गणना के अनुसार धार्मिक अनुष्ठानों से ग्रहों की स्थिति को सही करवाया जा सकता है, अब सातवें घर का स्वामी कुंडली के सातवें घर में ही होने पर ऐसा व्यक्ति सफल वैवाहिक जीवन व्यतीत करता है, उन्नति की राह में कोई बाधा नहीं आती है और पति-पत्नी के आपसी संबंध मधुर बने रहते हैं।
  • Jyotish की भाषा में विवाह की स्थिति सप्तमेश यानि लग्नेश की महाअंतर्दशा या सिर्फ अंतर्दशा के बनने पर आती है, यानि कि सातवें घर की ग्रहीय स्थिति के साथ बृहस्पति अर्थात गुरु की महादशा और शुक्र की अंतर्दशा से विवाह योग की संभावना प्रबल हो जाती है, यह कहें कि सातवें या उससे संबंध रखने वाले ग्रह की महादशा या अंतर्दशा में विवाह योग बन पाता है, जिस किसी की कुंडली में बृहस्पति सातवें घर में होता है, उसके शीघ्र विवाह होने की संभावन बनती है, संभव है उनका विवाह 21-22 वर्ष की उम्र में ही हो जाए।
  • इसी तरह से कुंडली के सातवें घर में शुक्र के होने की स्थिति में व्यक्ति का vivah युवावस्था में ही संभव है, दूसरी तरफ बेमेल विवाह के योग कुंडली में चंद्रमा के उच्च स्थिति में होने के कारण बन सकते हैं, विवाह में देरी का मुख्य कारण मंगल के छठे घर में होना है।
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