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ग्रह शांति के लिए कौन सा व्रत जरूरी है?

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ज्योतिष के अनुसार नवग्रह शांति के प्रभावी व्रत

भारतीय ज्योतिष में नवग्रहों का जीवन पर अत्यंत गहरा प्रभाव माना गया है। व्यक्ति का जन्म जिस समय, जिस ग्रह स्थिति में होता है, वही ग्रह आगे चलकर उसके सुख-दुःख, सफलता-असफलता, स्वास्थ्य, विवाह, धन, संतान और मानसिक शांति तक को प्रभावित करते हैं। जब कोई ग्रह कुंडली में अशुभ स्थिति में होता है या उसकी दशा-अंतरदशा चल रही होती है, तब जीवन में अनेक प्रकार की समस्याएँ उत्पन्न होने लगती हैं। ऐसी स्थिति में ग्रह शांति के उपाय किए जाते हैं, जिनमें व्रत का विशेष महत्व बताया गया है।

ज्योतिष में व्रत का महत्व

व्रत केवल उपवास नहीं होता, बल्कि यह शरीर, मन और आत्मा को शुद्ध करने की प्रक्रिया है। ज्योतिष के अनुसार जब व्यक्ति किसी विशेष दिन, विशेष नियम और श्रद्धा के साथ व्रत करता है, तो उसका सीधा संबंध उस दिन के स्वामी ग्रह से बनता है। इससे ग्रह की नकारात्मक ऊर्जा कम होती है और शुभ फल प्राप्त होने लगते हैं।

व्रत के माध्यम से व्यक्ति अपने कर्मों का शोधन करता है। ग्रहों को कर्मफल दाता माना गया है, इसलिए जब व्यक्ति संयम, अनुशासन और भक्ति के साथ व्रत करता है, तो ग्रह भी अनुकूल होने लगते हैं।

ग्रह शांति और व्रत का आपसी संबंध

प्रत्येक ग्रह का एक विशेष दिन, रंग, देवता, मंत्र और व्रत होता है। जब कोई ग्रह पीड़ित होता है, तब उसी ग्रह से संबंधित व्रत करने से उस ग्रह की शांति होती है। व्रत करने से ग्रह के दोष, जैसे—

  • ग्रह दोष
  • महादशा की बाधाएँ
  • साढ़ेसाती या ढैय्या
  • कालसर्प दोष का प्रभाव
  • विवाह, संतान, धन या स्वास्थ्य संबंधी बाधाएँ

धीरे-धीरे कम होने लगती हैं।

1. सूर्य ग्रह शांति के <strong>लिए</strong> व्रत

सूर्य आत्मा, मान-सम्मान, पिता, सरकारी कार्य और स्वास्थ्य का कारक ग्रह है। कुंडली में सूर्य कमजोर होने पर व्यक्ति को आत्मविश्वास की कमी, पिता से मतभेद, सरकारी कार्यों में बाधा और नेत्र संबंधी रोग हो सकते हैं।

सूर्य ग्रह शांति के लिए रविवार का व्रत

अत्यंत प्रभावी माना गया है। इस व्रत में सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान कर सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है और ॐ घृणि सूर्याय नमः का मंत्र जाप करे और दिन भर संयम का पालन किया जाता है। यह व्रत सूर्य की ऊर्जा को मजबूत करता है और व्यक्ति को तेज, यश और नेतृत्व क्षमता प्रदान करता है।

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2. चंद्र ग्रह शांति के लिए व्रत

चंद्रमा मन, माता, भावनाएँ और मानसिक शांति का कारक ग्रह है। चंद्र दोष होने पर व्यक्ति को मानसिक तनाव, चंचलता, अनिद्रा और पारिवारिक असंतुलन का सामना करना पड़ता है।

सोमवार का व्रत 

माना गया है। इस व्रत से मन शांत होता है, मानसिक स्थिरता आती है और माता से संबंधित कष्टों में कमी आती है। चंद्र शांति के लिए यह व्रत विशेष रूप से मानसिक परेशानियों से जूझ रहे लोगों के लिए लाभकारी होता है। ॐ सोमाय नमः  108 बार का मंत्र जाप करे

3. मंगल ग्रह शांति के लिए व्रत

मंगल साहस, शक्ति, रक्त, भूमि और भाई-बहनों का कारक ग्रह है। मंगल के अशुभ होने पर क्रोध, दुर्घटना, विवाद, भूमि विवाद और विवाह में देरी जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। विशेष रूप से मांगलिक दोष इसी ग्रह से जुड़ा होता है।

 मंगलवार का व्रत

मंगल ग्रह की शांति के लिए मंगलवार का व्रत किया जाता है। यह व्रत मंगल के उग्र प्रभाव को शांत करता है और जीवन में धैर्य, साहस तथा स्थिरता लाता है। विवाह संबंधी बाधाओं में भी यह व्रत सहायक माना गया है। ॐ क्रां क्रीं क्रौं सःभौमाय नमः 108 बार मंत्र जाप किया जाता है।

4. बुध ग्रह शांति के लिए व्रत

बुध बुद्धि, वाणी, व्यापार, गणित और संचार का ग्रह है। बुध कमजोर होने पर व्यक्ति निर्णय लेने में असमर्थ रहता है, पढ़ाई या व्यापार में नुकसान होता है और वाणी दोष उत्पन्न हो सकता है।

 बुधवार का व्रत

बुध ग्रह शांति के लिए बुधवार का व्रत किया जाता है। यह व्रत विशेष रूप से छात्रों, व्यापारियों और लेखन या संचार क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए अत्यंत लाभकारी माना गया है। ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः 108 बार मंत्र जाप किया जाता है।

5. बृहस्पति ग्रह शांति के लिए व्रत

बृहस्पति ज्ञान, धर्म, गुरु, विवाह और संतान का कारक ग्रह है। गुरु ग्रह के अशुभ होने पर विवाह में देरी, संतान सुख में बाधा, आर्थिक समस्या और धर्म से विमुखता देखी जाती है।

गुरुवार का व्रत

गुरुवार का व्रत सबसे अधिक प्रभावशाली माना गया है। इस व्रत से जीवन में ज्ञान, सद्बुद्धि, सम्मान और सौभाग्य की वृद्धि होती है, ॐ बृं बृहस्पतये नमः  108 बार मंत्र जाप करे।

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6. शुक्र ग्रह शांति के लिए व्रत

शुक्र भोग, विलास, प्रेम, विवाह, सौंदर्य और भौतिक सुखों का कारक ग्रह है। शुक्र दोष होने पर दांपत्य जीवन में तनाव, प्रेम संबंधों में असफलता और आर्थिक अस्थिरता उत्पन्न हो सकती है।

 शुक्रवार का व्रत

शुक्र शांति के लिए शुक्रवार का व्रत किया जाता है। यह व्रत जीवन में सुख-समृद्धि, प्रेम और ऐश्वर्य बढ़ाने वाला माना गया है, ॐ द्रां द्रीं द्रौं सः शुक्राय नमः 108 बार मंत्र जाप किया जाता है।

7. शनि ग्रह शांति के लिए व्रत

शनि कर्म, न्याय, संघर्ष और दीर्घकालिक फल का ग्रह है। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा के दौरान व्यक्ति को जीवन में अत्यधिक संघर्ष, देरी और मानसिक दबाव का सामना करना पड़ता है।

शनिवार का व्रत

शनि ग्रह शांति के लिए शनिवार का व्रत अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। यह व्रत शनि के कठोर प्रभाव को कम करता है और व्यक्ति को धैर्य, स्थिरता और कर्मशीलता प्रदान करता है, ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः  108 बार  मंत्र जाप किया जाता है।

8. राहु ग्रह शांति के लिए व्रत

राहु छाया ग्रह है और भ्रम, अचानक परिवर्तन, भय और विदेश से जुड़ा हुआ माना जाता है। राहु दोष होने पर व्यक्ति गलत निर्णय, भय, नशे की लत या अचानक नुकसान का शिकार हो सकता है।

  बुधवार को विशेष व्रत

राहु ग्रह की शांति के लिए शनिवार का व्रत  किया जाता है। राहु शांति से जीवन में स्थिरता और सही दिशा मिलती है, ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः 108 बार मंत्र जाप किया जाता है।

9. केतु ग्रह शांति के लिए व्रत

केतु मोक्ष, वैराग्य और आध्यात्मिकता का कारक ग्रह है। केतु के अशुभ प्रभाव से व्यक्ति जीवन में उद्देश्यहीनता, अचानक नुकसान और मानसिक उलझन महसूस करता है।

  गुरुवार का व्रत

केतु ग्रह शांति के लिए मंगलवार किया जाता है। इससे आध्यात्मिक उन्नति और मानसिक स्पष्टता प्राप्त होती है, ॐ स्रां स्रीं स्रौं सः केतवे नमः 108 बार मंत्र जाप किया जाता है

नवग्रह शांति के लिए संयुक्त व्रत

यदि कुंडली में एक से अधिक ग्रह पीड़ित हों, तो नवग्रह शांति व्रत किया जाता है। इसमें सभी ग्रहों की शांति के लिए नियमपूर्वक व्रत और पूजा की जाती है। यह व्रत विशेष रूप से लंबे समय से चल रही समस्याओं के समाधान में सहायक माना गया है।

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ग्रह को प्रिय वस्तुओं का अर्पण

  • सूर्य को जल, लाल फूल
  • चंद्र को दूध, सफेद फूल
  • मंगल को लाल वस्त्र, मसूर
  • बुध को हरी मूंग
  • गुरु को पीली वस्तुएँ
  • शुक्र को सफेद मिठाई
  • शनि को तिल, तेल
  • राहु-केतु को काले तिल, नारियल

 

ग्रह शांति पूजा से पहले की तैयारी

पूजा तभी फलदायी होती है जब शरीर, मन और वातावरण शुद्ध हो।

  • पूजा वाले दिन प्रातः ब्रह्ममुहूर्त में उठें
  • स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें
  • काले या बहुत गहरे वस्त्रों से बचें
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें
  • पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें

ग्रह शांति पूजा की आवश्यक सामग्री

  • चौकी या आसन
  • लाल/पीला/सफेद कपड़ा (ग्रह अनुसार)
  • दीपक, घी या तिल का तेल
  • धूप, अगरबत्ती
  • पुष्प, अक्षत (चावल)
  • जल से भरा कलश
  • सुपारी, पान, नारियल
  • गुड़, मिठाई या फल
  • संबंधित ग्रह की वस्तु (जैसे तिल, चंदन, दूध, दही, फूल आदि)
  • ग्रह विशेष की मूर्ति/चित्र या नवग्रह यंत्र

क्या सभी ग्रहों के लिए अलग-अलग व्रत जरूरी हैं?

यह आवश्यक नहीं कि व्यक्ति सभी ग्रहों के लिए व्रत करे। कुंडली में जो ग्रह अधिक पीड़ित हो, उसी ग्रह के अनुसार व्रत करना पर्याप्त होता है। कई बार एक ही व्रत कई ग्रहों को शांत कर देता है, जैसे शनिवार का व्रत शनि के साथ राहु को भी शांत करता है, वहीं सोमवार का व्रत चंद्र के साथ मन के दोषों को भी दूर करता है।

ग्रह शांति व्रत करते समय आवश्यक सावधानियाँ

ग्रह शांति के लिए व्रत तभी प्रभावी होता है जब उसे श्रद्धा, नियम और संयम के साथ किया जाए। व्रत के दौरान नकारात्मक विचार, क्रोध, असत्य और हिंसा से दूर रहना आवश्यक माना गया है। साथ ही, व्रत को दिखावे के लिए नहीं बल्कि आत्मशुद्धि और ग्रह शांति के उद्देश्य से करना चाहिए।

निष्कर्ष
ज्योतिष के अनुसार ग्रह शांति के लिए व्रत एक अत्यंत सरल, प्रभावी और आध्यात्मिक उपाय है। सही ग्रह के लिए सही दिन का व्रत करने से न केवल ग्रहों की अशुभता कम होती है, बल्कि व्यक्ति का आत्मबल, मानसिक शांति और जीवन की दिशा भी सकारात्मक बनती है।
यदि कुंडली में ग्रह दोष या दशा-दोष चल रहा हो, तो योग्य ज्योतिषी की सलाह लेकर संबंधित ग्रह का व्रत करना जीवन में आश्चर्यजनक परिवर्तन ला सकता है।