कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ पूजा का पर्व मनाया जाता है जो इस बार 20 नवंबर को है। छठ पूजा का चार दिवसीय व्रत संतान की खुशहाली और अच्छे जीवन की कामना के लिए किया जाता है। यह अनुपम व्रत सूर्योपासना का है। इस दौरान सूर्यदव की पूजा की जाती है। से किया जाता है। सूर्योपासना का यह अनुपम पर्व है। यह व्रत केवल महिला ही नहीं बल्कि पुरुष द्वारा भी किया जाता है। आइए जानते हैं छठ पर्व का इतिहास और उसका महत्व।
छठ पूजा का महत्व:
छठ पूजा का महत्व बहुत ज्यादा है। यह व्रत सूर्य भगवान, उषा, प्रकृति, जल, वायु आदि को समर्पित है। इस त्यौहार को मुख्यत: बिहार में मनाया जाता है। इस व्रत को करने से नि:संतान दंपत्तियों को संतान सुख प्राप्त होता है। कहा जाता है कि यह व्रत संतान की रक्षा और उनके जीवन की खुशहाली के लिए किया जाता है। इस व्रत का फल सैकड़ों यज्ञों के फल की प्राप्ति से भी ज्यादा होता है। सिर्फ संतान ही नहीं बल्कि परिवार में सुख समृद्धि की प्राप्ति के लिए भी यह व्रत किया जाता है।
छठ पूजा का इतिहास:
पौराणिक कथा के अनुसार, एक राजा था जिसका नाम प्रियंवद था। राजा की कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति के लिए राजा ने यज्ञ करवाया। यह यज्ञ महर्षि कश्यप ने संपन्न कराया और यज्ञ करने के बाद महर्षि ने प्रियंवद की पत्नी मालिनी को आहुति के लिए बनाई गई खीर प्रसाद के रुप में ग्रहण करने के लिए दी। यह खीर खाने से उन्हें पुत्र प्राप्ति हुई लेकिन उनका पुत्र मरा हुआ पैदा हुआ। यह देख राजा बेहद व्याकुल और दुखी हो गए। राजा प्रियंवद अपने मरे हुए पुत्र को लेकर शमशान गए और पुत्र वियोग में अपने प्राण त्यागने लगे।
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