Govardhan Parvat Parikrama 2019: आज खासतौर पर मथुरा, वृंदावन और गोकुल समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में गोवर्धन पूजा मनाया जा रहा है। इस दिन गौ माता और गोवर्धन की पूजा का विधान है। गोवर्धन पूजा हर वर्ष दिवाली के अगले दिन मनाया जाता है। हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, गोवर्धन पूजा हर साल कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा को होता है। इस दिन खासतौर पर गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा की जाती है, जिससे विशेष फल की प्राप्ति होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
गिरिराज हैं गोवर्धन पर्वत, लेकिन हर दिन घटती है ऊंचाई
गोवर्धन पर्वत मथुरा से 26 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। हिन्दू धर्म में इसका विशेष महत्व है। द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का यह साक्षी रहा है। इसके कण-कण भगवान श्रीकृष्ण का वास समझा जाता है। गोवर्धन पर्वत को गिरिराज की उपाधि प्राप्त है। ऐसी मान्यता है कि गोवर्धन पर्वत 30 हजार मीटर ऊंचा था लेकिन अब संभवत: 30 मीटर ही रह गया है। पुलस्त्य ऋषि के श्राप के कारण यह हर दिन एक मुट्ठी घट जाता है।
आइए जानते हैं कि गोवर्धन पूजा के दिन गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करने के समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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