
वास्तु में बहुत से पेड़ पौधों के बारे में वर्णन किया गया है। जिन्हें घर में लगाने से बहुत लाभ मिलता है। तो वहीं इसमें उन पेड़-पौधों के बारे में भी वर्णव किया गया है जिन्हें घर में लगाना कई बार व्यक्ति पर हावी पड़ जाता है। आज हम आपको बताने जा रहे हैं आंवले के पेड़ के बारे में। इस जानकारी में हम आपको बताएंगे कि क्या घर में आंवले का पेड़ लगाना चाहिए अगर हां तो इस पेड़ को घर में कहां लगाना चाहिए और धार्मिक दृष्टि से ये पेड़ इतना खास क्यों है।मान्यता है कि आंवले के पेड़ की जड़ में भगवान विष्णु जी का वास होता है। वास्तु की मानें तो आंवले का पेड़ घर में उत्तर या पूर्व दिशा में लगाना चाहिए।
आंवले की उत्पत्ति-
एक मान्यता के मुताबिक ब्रह्मा जी के आंसूओं से आंवले के पेड़ की उत्पत्ति हुई. इस बारे में पद्म पुराण और स्कंद पुराण में भी जिक्र मिलता है. पौराणिक कथा के मुताबिक, जब पूरी पृथ्वी जलमग्न हो गई थी तब ब्रह्मा जी के मन में सृष्टि दोबारा शुरू करने का विचार आया और कमल पुष्प पर बैठकर ब्रह्मा जी परब्रम्हा की तपस्या करने लगे। ब्रह्मा जी की तपस्या से खुश होकर परब्रम्हा भगवान विष्णु प्रकट हुए जिन्हें देखकर ब्रह्मा जी खुशी से रोने लगे और उनके आंसू भगवान विष्णु के चरणों पर गिरने लगे और ब्रह्मा जी के आंसूओं से आमलकी यानी आंवले का वृक्ष उत्पन्न हुआ।
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