प्राय: हथेली पर अंगुलियों के मूल में कलाई के ऊपर, अंगूठे के नीचे, कुछ उभरी हुई मांसपेशियां दिखायी देती हैं, हस्तरेखा विज्ञान में इन्हें पर्वत कहा जाता है। संरचना के अनुसार ये फु सफु से मांस पिण्ड होते हैं जिनमें रक्त और नाडिय़ों की कोशिकाओं का सूक्ष्म, सघन समूह विखरा होता है। प्रत्येक पर्वत मस्तिष्क के अलग-2 भागों से नाडिय़ों द्वारा सम्बन्धित रहता है, इस प्रकार वह अलग-2 मानसिक शक्तियों को प्रकट करता है।
सूर्य पर्वत- अनामिका के नीचे
चन्द्र पर्वत- कनिष्ठा के नीचे कलाई के ऊपर हथेली के भाग में
मंगल पर्वत- इसके दो स्थान है, प्रथम, शुक्र और गुरु के बीच, और दूसरा चन्द्र और बुध के बीच
बुध पर्वत- कनिष्ठा के नीचे गुरु पर्वत- तर्जनी के नीचे
शुक्र पर्वत- अंगूठे के नीचे
शनि पर्वत- मध्यमा के नीचे हथेली के बीच का भाग जो कि चारों ओर पर्वतों से घिरा होता है, इन पर्वतों के नाम विभिन्न ग्रहों के नाम पर सुविधा के दृष्टिकोण से रखे गये हैं, ये पर्वत सात हैं। हथेली में इनके विकसित अथवा अविकसित या किसी एक पूर्ण विकास के आधार पर भी कुछ विद्वान इन्हें सात वर्गों में विभाविजत करते हैं।
बुध पर्वत- कनिष्ठा के निम्न भाग में यह क्षेत्र स्थित होता है जिससे रोमांस, बौद्धिक क्षमता, प्रेम, परिवर्तन, यात्रा, आदि से सम्बन्धी विचार किये जाते हैं। हाथ अगर अनुकूल हो तो ये गुण शुभ फल देते हैं, अगर प्रतिकूल हो तो अशुभ फल को जानना चाहिए।
चन्द्र पर्वत- मंगल पर्वत के नीचे और शुक्र पर्वत के विपरीत दिशा में चंद्र पर्वत होता है। यह कल्पना, आदर्श, कला साहित्य के प्रति लगाव आदि को प्रदर्शित करता है।
मंगल पर्वत- यह युद्ध में शौर्य की भावना, सक्रियता, साहस, भावना आदि प्रदान करता है। यदि यह क्षेत्र ज्यादा उन्नत युक्त होगा तो व्यक्ति में लड़ाई, झगड़े की भावना उत्पन्न करता है यह शुक्र पर्वत के बगल में होता है। दूसरा चन्द्र और बुध के मध्य पाया जाता है जो कि निश्चित साहस, आत्मनियन्त्रण, निराशा और गलती के विरोध की क्षमता का सूचक है।
चन्द्र पर्वत- कनिष्ठा के नीचे कलाई के ऊपर हथेली के भाग में
मंगल पर्वत- इसके दो स्थान है, प्रथम, शुक्र और गुरु के बीच, और दूसरा चन्द्र और बुध के बीच
बुध पर्वत- कनिष्ठा के नीचे गुरु पर्वत- तर्जनी के नीचे
शुक्र पर्वत- अंगूठे के नीचे
शनि पर्वत- मध्यमा के नीचे हथेली के बीच का भाग जो कि चारों ओर पर्वतों से घिरा होता है, इन पर्वतों के नाम विभिन्न ग्रहों के नाम पर सुविधा के दृष्टिकोण से रखे गये हैं, ये पर्वत सात हैं। हथेली में इनके विकसित अथवा अविकसित या किसी एक पूर्ण विकास के आधार पर भी कुछ विद्वान इन्हें सात वर्गों में विभाविजत करते हैं।
बुध पर्वत- कनिष्ठा के निम्न भाग में यह क्षेत्र स्थित होता है जिससे रोमांस, बौद्धिक क्षमता, प्रेम, परिवर्तन, यात्रा, आदि से सम्बन्धी विचार किये जाते हैं। हाथ अगर अनुकूल हो तो ये गुण शुभ फल देते हैं, अगर प्रतिकूल हो तो अशुभ फल को जानना चाहिए।
चन्द्र पर्वत- मंगल पर्वत के नीचे और शुक्र पर्वत के विपरीत दिशा में चंद्र पर्वत होता है। यह कल्पना, आदर्श, कला साहित्य के प्रति लगाव आदि को प्रदर्शित करता है।
मंगल पर्वत- यह युद्ध में शौर्य की भावना, सक्रियता, साहस, भावना आदि प्रदान करता है। यदि यह क्षेत्र ज्यादा उन्नत युक्त होगा तो व्यक्ति में लड़ाई, झगड़े की भावना उत्पन्न करता है यह शुक्र पर्वत के बगल में होता है। दूसरा चन्द्र और बुध के मध्य पाया जाता है जो कि निश्चित साहस, आत्मनियन्त्रण, निराशा और गलती के विरोध की क्षमता का सूचक है।
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