व्यवसाय/आजीविका
किसी भी जातक के व्यवसाय का फलादेश जन्मांग के दशम भाव द्वारा ही किया जाता है।व्यवसाय अथवा नौकरी के चयन हेतु, लग्नेश का स्वभाव तथा लग्न, चन्द्रमा की स्थिति और षष्ठ भाव की प्रबलता, पर विचार करना चाहिए। शुभ ग्रह षष्ठ भावगत हों या लग्नेश अथवा दशमेश षष्ठ भावगत हों, तो जातक मुख्य रूप् से नौकरी करता है।
श्रेष्ठ व उत्तम नौकरी हेतु लग्नेश तथा दशमेश दोनों में षष्ठेश के साथ मित्रता होनी चाहिए, नही तो जातक की कार्य कुशलता व क्षमता को उसके अधिकारी महत्व नही प्रदान करते हैं। पुनः दशम भावगत ग्रह या दशमेश पर शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो जातक को प्रशासनिक और प्रबन्ध से सम्बन्धित व्यवसाय में सफलता प्राप्त होती है। बुध, बुद्धिमत्ता तथा बृहस्पति अन्तर्मन की ध्वनि को प्रदर्शित करता है। जब ये दोनो ग्रह जन्मांग में शुभ भाव में स्थित हो, तो जातक बुद्धिमान तथा योग्य होता है।
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