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करियर में आ रही है बाधा तो करें ये ज्योतिष उपाय

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करियर में आ रही है बाधा तो करें ये ज्योतिष उपाय

जिन लोगों की कुंडली के 10वें भाव में ग्रहण योग या चांडाल योग होता है तो उनको नौकरी या कारोबार में बार-बार परेशानी का सामना करना पड़ता है।कुछ लोगों को नौकरी मिलने में बाधा होती है तो कुछ को नौकरी मिलने के बाद कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार ऐसा कुंडली में मौजूद ग्रहों की गलत दशाओं के कारण होता है। कुंडली देखकर पता किया जा सकता जा सकता है लोगों को नौकरी में परेशानियां क्यों आती है। इससे बचने के लिए ज्योतिषी उपाय किये जा सकते हैं। वहीं कुछ लोगों को कारोबार में परेशानी का सामना करना पड़ता है। आइए जानते हैं किन वजहों से आती है नौकरी और कारोबार में बाधा-

– ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक व्यक्ति की कुंडली का 10वां भाग करियर का खाना होता है। जो करियर का नेतृत्व करता है। व्यक्ति कैसा करियर चुनेगा, उसे करियर में सफलता मिलेगा या नहीं यह कुंडली के 10वें भाव पर निर्भर करता है। वहीं नौकरी कैसे चलेगी इसके लिए कुंडली का 6वां भाव जिम्मेदार होता है। इससे जॉब में चल रही हर हलचल का पता लगाया जाता है।

– जिन लोगों की कुंडली के 10वें भाव में ग्रहण योग या चांडाल योग होता है तो उनको नौकरी या कारोबार में बार-बार परेशानी का सामना करना पड़ता है।

– जिन लोगों की कुंडली में पापी ग्रह होते हैं या जिन लोगों की कुंडली पापी ग्रह होते तो हैं लेकिन वह शांत रहते हैं जिस कारण से व्यक्ति को जॉब मिल जाती है लेकिन जब पापी ग्रह प्रभावी होते हैं तो व्यक्ति की नौकरी या कारोबार में परेशानी खड़ी कर देते हैं। जिसका नुकसान व्यक्ति को उठना पड़ता है।

– करियर का ग्रह स्वामी के अपने से बीच राशि में हो या उसकी युति मंगल , केतु या सूर्य के साथ हो तो ऐसा व्यक्ति अपनी नौकरी से संतुष्ट नहीं होता है।

– जिन लोगों की कुंडली में शनि 6वें, 8वें या 12वें भाव हो तो नौकरी-बिजनेस में परेशानी आती है।

उपाय –

1. जिन लोगों को नौकरी में किसी तरह का भय रहता है या ज्यादा परेशानी रहती है तो वह ॐ शम शनैश्चराय नमः” का नियमित जाप कर इस समस्या से बच सकता है।

2. शुक्ल पक्ष के पहले रविवार से रोजाना सूर्य देव को जल में लाल चंदन व लाल फूल डालकर सूर्य देवता को जल चढ़ाएं। ॐ घृणि सूर्याय नमः- मंत्र बोलें।

3. हर रविवार गाय को गुड़ और गेहूं खिलाएं। गेहूं और गुड़ किसी बर्तन में रखकर ही खिलाएं।