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चरावेती-चरावेती प्रचलाम्ह निरंतरम् – केतु के अधीन पौरूष्र्य –

निरंतर चलायमान रहने अर्थात् किसी जातक को अपने जीवन में निरंतर उन्नति करने हेतु प्रेरित करने तथा बदलाव हेतु तैयार…

admin3 मार्च 20162 मिनट

बच्चे को सामथ्र्यवान बनाने हेतु बचपन में ही कुंडली का विश्लेषण करायें-

आज बच्चे का सर्वगुण संपन्न होना अनिवार्य आवश्यकता हो गई है। बच्चे को यदि एक क्षेत्र में महारत हासिल है…

admin2 मार्च 20161 मिनट

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