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श‍िवजी पर हल्‍दी क्यों नहीं चढ़ाई जाती,जानिए वजह…

श‍िवजी पर हल्‍दी क्यों नहीं चढ़ाई जाती,जानिए वजह…

हल्‍दी भी नहीं चढ़ाते हैं श‍िवजी को

हल्‍दी को सनातन धर्म में अत्‍यंत ही शुद्ध और पव‍ित्र मानते हैं। लेक‍िन यह हैरानी की ही बात है क‍ि इसे कभी भी भोलेनाथ पर नहीं चढ़ाते। शास्त्रों के अनुसार शिवलिंग पुरुष तत्व का प्रतीक है और हल्दी स्त्रियों से संबंधित है। यही वजह है क‍ि भोलेनाथ को हल्दी नहीं चढ़ाई जाती है। कहा जाता है क‍ि अगर आप शिवजी की पूजा में हल्दी का प्रयोग करते हैं तो इससे आपकी पूजा बेकार हो जाती है और आपकी पूजा का फल नहीं मिल पाता है। इसलिए भूलकर भी शिवलिंग पर हल्दी नहीं चढ़ानी चाहिए।

श‍िवल‍िंग पर भूलकर भी शंख से जल न चढ़ाएं। हालांक‍ि प्रत्‍येक पूजा में इसका प्रयोग क‍िया जाता है। देवी-देवताओं को इससे जल भी चढ़ाया जाता है। लेक‍िन भोलेनाथ की पूजा में शंख का प्रयोग नहीं क‍िया जाता है। श‍िवपुराण के अनुसार शंखचूड़ एक महापराक्रमी दैत्‍य था। उसका वध श‍िवजी ने किया था तो इसल‍िए शंख का जल शिव पूजा में न‍िषेध है। यही वजह है क‍ि भोलेनाथ को शंख से जल नहीं चढ़ाया जाता है।

श‍िवलिंग पर कभी भी तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जालंधर नाम के असुर को अपनी पत्नी की पवित्रता और विष्णु जी के कवच की वजह से अमर होने का वरदान मिला हुआ था। अमर होने की वजह से वह पूरी दुनिया में आतंक मचा रहा था। ऐसे में उसके वध के लिए भगवान विष्णु और भगवान शिव ने उसे मारने की योजना बनाई। जब वृंदा को अपने पति जालंधर की मृत्यु का पता चला तो वह बहुत दुखी और क्रोध‍ित हो गई। इसी क्रोध में उसने भगवान शिव को शाप दिया कि उनके पूजन में तुलसी की पत्‍त‍ियां हमेशा वर्जित रहेंगी।

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