Shani dev ko khush karne ke tarike : कई लोग शनि की साढ़ेसाती, ढैया या महादशा के लगने पर डर जाते हैं लेकिन शनिदेव से डरने की जरूरत नहीं है बल्कि उन्हें समझने की जरूरत है। शनिदेव इन 25 आदतों से प्रसन्न होते हैं।
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शनि की दृष्टि (shani ki drishti) : शनि जब किसी राशि पर भ्रमण करता है, उस वक्त वह अपनी वर्तमान राशि, पिछली राशि, अगली राशि, तीसरी राशि, दसवीं राशि, बारहवी राशि और शनि स्वयं की राशि मकर और कुंभ राशि को पूर्ण दृष्टि से देखता है। जन्म पत्रिका के बारह घर में से दो-तीन को छोड़ सभी घर शनि की दृष्टि से प्रभावित रहती हैं।
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शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव (effect of shani sade sati) : शनि अपना प्रभाव तीन चरणों में देता है। पहला चरण साढ़े 7 सप्ताह से साढ़े 7 वर्ष तक रहता है। पहले चरण में शनि जातक की आर्थिक स्थिति पर, दूसरे चरण में पारिवारिक जीवन और तीसरे चरण में सेहत पर सबसे ज्यादा असर डालता है। ढाई-ढाई साल के इन 3 चरणों में से दूसरा चरण सबसे भारी पड़ता है। पहला चरण धनु, वृ्षभ, सिंह राशियों वाले जातकों के लिए कष्टकारी, दूसरा चरण सिंह, मकर, मेष, कर्क, वृश्चिक राशियों के लिए कष्टकारी और आखिरी चरण मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, मीन राशि के लिए कष्टकारी माना गया है। अर्थात यदि मान लो कि धनु राशि जातकों को शनि की साढ़े साती लगी है तो उनके लिए पहले चरण कष्टकारी होती है। इसी तरह सिंह के लिए दूसरा चरण और मिथुन के लिए तीसरा चरण कष्टकारी होता है। शनि की साढ़े साती का सबसे बुरा प्रभाव छठे, आठवें और बारहवें भाव में माना गया है। मकर, कुंभ, धनु और मीन लग्न में साढ़ेसाती का प्रभाव उतना बुरा नहीं होता जितना कि अन्य लग्नों में होता है।
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शनि की साढ़ेसाती का प्रभाव (effect of shani sade sati) : शनि अपना प्रभाव तीन चरणों में देता है। पहला चरण साढ़े 7 सप्ताह से साढ़े 7 वर्ष तक रहता है। पहले चरण में शनि जातक की आर्थिक स्थिति पर, दूसरे चरण में पारिवारिक जीवन और तीसरे चरण में सेहत पर सबसे ज्यादा असर डालता है। ढाई-ढाई साल के इन 3 चरणों में से दूसरा चरण सबसे भारी पड़ता है। पहला चरण धनु, वृ्षभ, सिंह राशियों वाले जातकों के लिए कष्टकारी, दूसरा चरण सिंह, मकर, मेष, कर्क, वृश्चिक राशियों के लिए कष्टकारी और आखिरी चरण मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, मीन राशि के लिए कष्टकारी माना गया है।
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अर्थात यदि मान लो कि धनु राशि जातकों को शनि की साढ़े साती लगी है तो उनके लिए पहले चरण कष्टकारी होती है। इसी तरह सिंह के लिए दूसरा चरण और मिथुन के लिए तीसरा चरण कष्टकारी होता है। शनि की साढ़े साती का सबसे बुरा प्रभाव छठे, आठवें और बारहवें भाव में माना गया है। मकर, कुंभ, धनु और मीन लग्न में साढ़ेसाती का प्रभाव उतना बुरा नहीं होता जितना कि अन्य लग्नों में होता है।
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