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ऐसे करें दरिद्रता दूर,बरसेगा लक्ष्मी माँ की कृपा

ऐसे करें दरिद्रता दूर,बरसेगा लक्ष्मी माँ की कृपा

ऐसे करें दरिद्रता दूर,बरसेगा लक्ष्मी माँ की कृपा

Mahalakshmi Blessings: सबसे पहले दुर्भाग्य को दूर करना आवश्यक है। माना जाता है कि यह महाप्रयोग दरिद्रता के साथ कम से इस जन्म के दुर्भाग्य को दूर कर ही देगा।

– सोमवार रात्रि 9 बजे से यह उपाय आरम्भ करना है।

आज क दौर में हर कोई मां लक्ष्मी की कृपा जल्द से जल्द पाना चाहता है, इसका कारण ये है कि आज के दौर में बिना पैसा सुख संपन्नता को छोड़े इज्जत भी लोगों को प्राप्त नहीं होती है। और माता लक्ष्मी को धन धान्य की देवी माना जाता है। ऐसे में ही हर कोई देवी माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के भरसक प्रयास करता है। माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के संबंध में पंडित एसके उपाध्याय के अनुसार कई ऐसे तरीके हैं, जो कभी निश्फल नहीं होते। जिसके संबंध में मान्यता है कि यह जन्मों की दरिद्रता को जड़ से समाप्त कर देगा।

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इस प्रयोग को आप स्वयं करने मे अक्षम हों, तो किसी अन्य से भी करवा सकते हैं।इस महाप्रयोग के संबंध में कहा जाता है कि सर्वप्रथम दरिद्रता तभी होगी जब दुर्भाग्य होगा, इसलिए दरिद्रता दूर करने के लिए सबसे पहले दुर्भाग्य को दूर करना आवश्यक है। यह भी माना जाता है किमहाप्रयोग दरिद्रता के साथ कम से इस जन्म के दुर्भाग्य को तो दूर कर ही देगा।

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यह उपाय आपको रात्रि 9 बजे सोमवार से शुरु करना है। अगर आपके जीवन में दरिद्रता बनी हुई है। और आप किसी बड़े कर्ज में डूबे हैं। धन हाथ में नहीं रुकता है तो मान्यता के अनुसार महालक्ष्मी के इन 11 मंत्रों का नियमित जाप करने से आपके जीवन की ये सभी मुश्किल दूर जाएंगी। लेकिन, ध्यान रहे कि साधक को पूर्ण रुप से शुद्ध होकर पवित्र मन के साथ इन मंत्रों को जाप करना है।

महा लक्ष्मी जी के 11 कल्याणकारी मंत्र…
|| ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मयै नम: ||

|| ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभयो नमः ||

|| ॐ श्रीं महालक्ष्मै नमः ||

|| ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्मै नमः ||

|| ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं महालक्ष्मै नमः ||

|| ॐ श्री लक्ष्मी नारायणाभ्याम् नमः ||

| ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ ||

|| ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम: ||

|| ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं त्रिभुवन महालक्ष्म्यै अस्मांक दारिद्र्य नाशय प्रचुर धन देहि देहि क्लीं ह्रीं श्रीं ॐ ||

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