मन के कारक चंद्र से पूरा का पूरा व्यक्तित्व निर्मित होता है। कुण्डली में मुख्य रूप से लग्न और तृतीय भाव के स्वामी इंसानी चरित्र और व्यवहार के लिए जिम्मेदार होते हैं किंतु चंद्रमा जो कि चतुर्थ भाव का स्वामी ग्रह है, उससे मन की दृढ़ता या उसकी कमजोरी निश्चित होती है। यहां आज हम मन के स्वामी ग्रह चंद्रमा का व्यक्तित्व पर पडऩे वाले प्रभाव की चर्चा करेंगे।
चंद्रमा की मजबूती या कमजोरी उसके पक्ष बल से निर्धारित होती है। यदि किसी जातक का जन्म अमावस्या या कृष्ण पक्ष की किसी तिथि में हुआ हो तो ऐसे समय में उसका चंद्रमा प्रताडि़त होता है किंतु यदि उसका जन्म शुक्ल पक्ष की किसी तिथि या पूर्णिमा को हुआ हो तो चंद्रमा को पक्ष बल प्राप्त हो जाता है। इसी प्रकार से उस जातक विशेष की कुण्डली में चंद्रमा यदि भाव बली हो, केंद्राधिपत्य आदि दोषों से रहित हो, केमुद्रम आदि दुर्योग नहींं निर्मित हो रहे हों और साथ ही उसे पक्ष बल भी प्राप्त हो तो फिर सोने पर सुहागा जैसी बात हो जाएगी। ऐसा जातक मानसिक रूप से सक्षम, सुदृढ़ और विवेकपूर्ण त्वरित निर्णय लेने वाला होता है। ऐसा इंसान जनता में लोकप्रियता प्राप्त करने में समर्थ होता है क्योंकि उसके द्वारा लिए गए फैसले दूरगामी सोच वाले सिद्ध होते हैं। इसके साथ ही उनकी चिंतन शक्ति भी बेहद कल्पनाशील होती है, जिसका लाभ ये मिलता है कि वे शोधपरक अनुसंधान कार्यों में सफल सिद्ध हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त मजबूत और पक्षबली चंद्रमा के कारण ऐसे लोग मानसिक रूप से सुदृढ़ होते हैं, उन पर अवसादग्रस्त करने वाली घटनाएं न्यूनतम प्रभाव डाल पाती हैं। इसी वजह से दु:ख की घड़ी भी उनके लिए नए अनुभव और नई सीख की एक महान घटना बन जाती है।
इसके ठीक विपरीत कमजोर और पक्ष बल से हीन चंद्रमा वाला जातक मानसिक तौर पर कमजोर होता है। उसकी संवेदनशीलता इतनी अधिक होती है कि बात-बात पर उसे पीड़ा का अनुभव होने लगता है। खुशियां ऐसे इंसान से कोसों दूर रहती हैं। काल्पनिकता का अतिरेक ऐसे व्यक्ति को सामान्य जीवन से विमुख कर देता है। ऐसे इंसान का चंद्रमा क्रमश: और पीडि़त होने पर उसे पागल तक बना सकता है। इसीलिए इस प्रकार के बलहीन और प्रताडि़त चंद्र के स्वामी जातक की समस्या को कम करने के लिए शास्त्रीय और ज्योतिषीय उपायों को अवश्य आजमाना चाहिए।
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