Know Today Plan Tomorrow Live Better
Home Articles Other Articles
Other Articles

कुंडली में शनि ग्रह क्या है जानें

shani के लिए चित्र परिणाम

अक्सर लोग शनि ग्रह का नाम सुनते ही डर जाते हैं, या फिर अगर किसी को कह दिया जाए कि उसकी कुंडली में शनि की साढे साती या ढैय्या चल रही है… तो उसकी हालत खराब दिखाई देती है…. ऐसे में शनि ग्रह से प्रभावित लोगों को डरने की जरुरत नहीं…. अगर आपकी कुंडली में सम्सया है तो उसका समाधान भी साथ ही मौजूद हैं… जरुरत है तो किसी विद्वान ज्योतिषी से सही सलाह लेकर उसके उपाय करने की…. यूं तो शनि ग्रह अच्छे बुरे कर्मों का फल देने वाला देवता है… और इसके प्रभाव से देवता तक नही बचे…. लेकिन जब शनि प्रस्न्न हो तो रंक को राजा बना देता है, इसी के विपरीत अगर शनिदेव रुष्ट हो जाएं तो राजा भी रंक हो जाते हैं…. कुंडली में शुभ स्थिति में बैठा शनि बडे बडे कारखानो या वाहनों का मालिक बना देता है…. शनिदेव जितना जल्दी नाराज होने वाले देवता हैं तो उनकी पूजा अर्चना करने वाले पर शनिदेव जल्द ही प्रसन्न हो जाते हैं…

नवग्रहों के मध्य शनि पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूरी पर स्थित है… शनि एक राशि पर ढाई साल तक भ्रमण करता है… परंतु शनि का संपूर्ण राशि चक्र का भ्रमण 29 साल 5 महीने 17 दिन और पांच घंटे में तय होता है.. गोचर वश शनि जब किसी राशि में प्रवेश करता है तो अपने से बारहवी राशि में ढाई साल कष्टकारी होता है… दूसरी एवं बारहवीं राशि पर लगभग साढे सात सालों तक शनि के कारण प्रभावित चक्र प्रक्रिया को शनि की साढे साती कहते हैं… शनि की साढे साती के प्रभाव से जातक को शारिरिक कष्ट, मानसिक तनाव, ग्रह क्लेश, धन संबंधी हानि और बनते कामों में बाधा आना शुरु हो जाता है… गोचरवश शनि जब चंद्र राशि से चौथे या आठवें स्थान पर बैठा होता है तो यह स्थिति शनि की ढैय्या कहलाती है… शनि की ढैय्या के फलस्वरुप जातक को रोग, भारी धन की हानि, भाई बंधुओं से मनमुटाव, विदेश में परेशानी और अपमान का सामना करना पडता है…

ALSO READ  🔱🚨 बड़ी खबर: श्री महाकाल धाम अमलेश्वर में पूजा-अनुष्ठान हुए शुरू! अब घर बैठे बुक करें वैदिक पूजा — संकल्प से लेकर अनुष्ठान तक पूरी व्यवस्था एक ही मंच पर

कुंडली में शनि का असर है तो भी डरने की जरुरत नहीं

पूजा अर्चना से जल्द ही प्रसन्न होते हैं शनिदेव

ज्योतिषी की सलाह से नीलम पहनने से हो सकता है फायदा

शनिवार को सूर्यास्त के बाद की जाती है शनि की पूजा

तेल का दीपक जलाना और भगवान शिव की पूजा करना फायदेमंद

पीपल के पेड पर कच्ची लस्सी में काले तिल डालकर चढाना चाहिए

कुंडली में शनि ग्रह की खराब स्थिति के अनुसार ज्योतिषी नीलम नाम का रत्न धारण करने की सलाह देते हैं…. लेकिन सभी को नीलम माफिक आ जाए, ये भी संभव नहीं है… किसी को भी नीलम धारण करवाने की बाकायदा एक पूरी विधी होती है…. क्योंकि नीलम का असर तीन चार घंटों में ही दिखाई देना शुरु हो जाता है… चाहे अच्छा असर हो या बुरा…. इसलिए नीलम धारण करने से पहले किसी विद्वान ज्योतिषी की सलाह जरुर लें….

शनि सदैव अनिष्टकारी ही हो, एसा भी नही है… यदि किसी जातक के नवमांश कुंडली में शनि वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर या कुंभ में शुभ स्थिति में हो तो शनि की दशा व्यवसाय एवं कैरियर की दृष्टि से विशेष शुभदायी रहती है… शनि प्राय दुख कष्ट देकर दुष्ट कर्मों का भुगतान करवाता है… इस स्थिति में जातक को अपने भी पराए हो जाते हैं… यदि किसी जातक की जन्म कुंडली में शनि कष्टकरार फल प्रदान कर रहा है तो शनि पूजन विधि पूर्वक करने से लाभ मिलता है… शनि पूजन की विधिवत पूजा सायं सूर्यास्त के बाद करनी चाहिए… हर शनिवार को शनि मंत्र का संकल्प पूर्वक शुद्द मन से पाठ करें और शनिवासरी अमावस्या हो तो उस दिन शाम सूर्यास्त के बाद शनि पूजन मंत्र जाप और स्त्रोत पाठ करना विशेष लाभकारी साबित होता है… शनि की साढे साती और ढेय्या से कष्ट भोग रहे जातकों के लिए रोजाना सुबह के समय भगवान शिव की पूजा, पीपल के पेड के समीप कच्ची लस्सी में काले तिल डालकर वृक्ष के मूल में चढाना तथा शाम के समय तेल का दीपक जलाकर श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करने से शनि अरिष्ठ की शांति होती है…

You have read half of this article

Log in to keep reading. Creating an account is completely free – with Google or mobile OTP, in a minute.

Log in & read more New here? Create a free account

Have a question about your life?

Get personal guidance on kundli, marriage, career and Vastu from experienced astrologers.

Consult Now