अहोई अष्टमी 2026: व्रत कथा, पूजा विधि, सामग्री, नियम और महत्व – संपूर्ण जानकारी
अहोई अष्टमी माताओं का एक पावन व्रत है, जिसमें वे अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए दिनभर उपवास रखती हैं। शाम को तारों के दर्शन करके व्रत खोला जाता है। इस लेख में आप अहोई अष्टमी से जुड़ी हर जरूरी जानकारी एक साथ पढ़ सकते हैं।
अहोई अष्टमी क्या है और कब है
अहोई अष्टमी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। यह करवा चौथ के कुछ दिन बाद और दिवाली से लगभग आठ दिन पहले आती है। इस दिन अहोई माता की पूजा की जाती है, जिन्हें माता पार्वती का ही एक रूप माना जाता है।
पंचांग के अनुसार 2026 में अहोई अष्टमी 1 नवंबर, रविवार को है। पूजा का शुभ मुहूर्त, तारों के निकलने का समय और चंद्रोदय का समय हर शहर में अलग होता है, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग से सही समय अवश्य जांच लें।
Want answers for your own kundli?
Chat or call experienced astrologers on the AstroShrine app, in Hindi and English.
यह व्रत मुख्य रूप से उत्तर भारत, खासकर उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और मध्य प्रदेश में बड़ी श्रद्धा से रखा जाता है।
अहोई अष्टमी 2026 का अनुमानित मुहूर्त
नीचे दिया गया समय केवल एक अनुमान है। यह पक्का समय नहीं है, और आपके शहर में यह कुछ मिनट से लेकर आधे घंटे तक आगे-पीछे हो सकता है।
| विवरण | अनुमानित समय |
|---|---|
| पूजा का संभावित मुहूर्त | शाम लगभग 5:30 से 7:00 बजे के बीच |
| तारे दिखने का संभावित समय | शाम लगभग 6:00 से 6:15 बजे के आसपास |
| चंद्रोदय का संभावित समय | देर रात, लगभग 11:30 बजे से मध्यरात्रि के बाद तक |
सही और सटीक मुहूर्त जानने के लिए अपने शहर का पंचांग, किसी विश्वसनीय पंचांग वेबसाइट या अपने पंडित जी से अवश्य पुष्टि करें।
अहोई अष्टमी का महत्व
अहोई अष्टमी का व्रत माताएं अपनी संतान की रक्षा, लंबी आयु और उन्नति के लिए रखती हैं। मान्यता है कि अहोई माता की कृपा से संतान पर आने वाले संकट दूर होते हैं। पहले यह व्रत मुख्य रूप से पुत्रों के लिए रखा जाता था, लेकिन आज माताएं बेटे और बेटी दोनों की भलाई के लिए यह व्रत रखती हैं।
जिन दंपतियों को संतान सुख नहीं मिला है, वे भी संतान प्राप्ति की कामना से यह व्रत रखते हैं। कुछ स्थानों पर इस दिन को “अहोई आठे” भी कहा जाता है।
राधा कुंड स्नान की परंपरा
मथुरा के पास गोवर्धन में स्थित राधा कुंड में अहोई अष्टमी की मध्यरात्रि को स्नान करने की विशेष परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन राधा कुंड में श्रद्धा से स्नान करने पर संतान सुख का आशीर्वाद मिलता है। इस अवसर पर देशभर से हजारों दंपति यहां पहुंचते हैं, और जिनकी मनोकामना पूरी होती है, वे भी आभार व्यक्त करने आते हैं।
अहोई माता की व्रत कथा
प्राचीन समय में एक नगर में एक साहूकार अपनी पत्नी और सात बेटों के साथ रहता था। दिवाली से कुछ दिन पहले साहूकार की पत्नी घर की लिपाई के लिए मिट्टी लेने जंगल गई। मिट्टी खोदते समय उसकी कुदाल गलती से एक साही (स्याहू) के बच्चे को लग गई, और वह बच्चा मर गया।
साहूकार की पत्नी को इसका बहुत दुख हुआ, लेकिन वह मिट्टी लेकर घर लौट आई। कुछ समय बाद एक-एक करके उसके सातों बेटों की मृत्यु हो गई। दुखी होकर उसने गांव की बुजुर्ग महिलाओं को अपनी गलती बताई।
बुजुर्ग महिलाओं ने उसे सलाह दी कि वह कार्तिक कृष्ण अष्टमी के दिन अहोई माता और साही के बच्चों का चित्र बनाकर पूरी श्रद्धा से व्रत और पूजा करे, और अपनी भूल के लिए क्षमा मांगे। साहूकार की पत्नी ने ऐसा ही किया। उसकी सच्ची भक्ति और पश्चाताप से प्रसन्न होकर अहोई माता ने उसके सातों बेटों को फिर से जीवनदान दिया।
तभी से माताएं अपनी संतान की रक्षा के लिए अहोई अष्टमी का व्रत रखती हैं। यही कारण है कि अहोई माता के चित्र में साही और उसके बच्चों को भी बनाया जाता है।
अहोई अष्टमी पूजा सामग्री
पूजा से पहले ये सारी सामग्री तैयार कर लें:
- अहोई माता का चित्र या कैलेंडर (या गेरू से दीवार पर बनाया गया चित्र)
- जल से भरा करवा या कलश (कई घरों में करवा चौथ वाला करवा ही उपयोग होता है)
- स्याऊ माला: चांदी के मोती और अहोई माता का लॉकेट, कलावे में पिरोया हुआ
- रोली, कुमकुम, हल्दी और अक्षत
- घी का दीया और धूप या अगरबत्ती
- फूल और फूलमाला
- सिंघाड़े, मूली और अन्य मौसमी फल
- भोग के लिए पूड़ी, हलवा, खीर या आठ पूए (मीठी पूड़ी)
- कच्चा दूध और चावल
- गेहूं या चावल के सात दाने (कथा सुनते समय हाथ में रखने के लिए)
- तारों को अर्घ्य देने के लिए जल का लोटा
- सास या घर की बड़ी महिला के लिए बायना (मिठाई, कपड़े या दक्षिणा)
अहोई अष्टमी पूजा विधि
अहोई माता की पूजा शाम को, सूर्यास्त के बाद शुभ मुहूर्त में की जाती है। परिवार और क्षेत्र के अनुसार रीति-रिवाज थोड़े अलग हो सकते हैं, लेकिन मूल विधि यह है:
You have read half of this article
Log in to keep reading. Creating an account is completely free – with Google or mobile OTP, in a minute.
Log in & read more New here? Create a free accountLog in to read more
You have read 50% of this article for free. Log in once to read the rest – and every astrology, Vastu and horoscope article on Future For You.
- Completely free – no charges
- One click with Google, or mobile OTP
- Straight back to this article after login