शंख का पूजा में महत्व
शंखों का हिंदू धर्म संस्कृति में प्राचीनकाल से ही विशेष महत्व रहा है। अष्टसिद्धियों एवं नवनिधियों में शंख का महत्वपूर्ण स्थान है। श्री विष्णु के चार आयुधों में शंख को भी स्थान प्राप्त है। शंख पूजन से दरिद्रता निवारण, आर्थिक उन्नति, व्यापारिक वृद्धि और भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। पूजा, यज्ञ एवं अन्य विशिष्ट अवसरों पर शंखनाद हमारी परंपरा में है। शंख-ध्वनि के बिना कोई पूजा संपन्न नहीं मानी जाती। मंदिरों में नियमित रूप से और घरों में पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठान, व्रत, कथाओं, जन्मोत्सव के अवसरों पर शंख बजाया जाता है। शंख से निकलने वाली वाली ध्वनितरंगों में हानिकारक वायरस को नष्ट करने की क्षमता होती है। शंखनाद से आपके आसपास की नकारात्मक ऊर्जा का नाश तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे आशा, आत्मबल, शक्ति व दृढ़ता बढ़ती है व भय दूर होता है।
दक्षिणावर्ती शंख की उपयोगिता
दक्षिणावर्ती शंख से लक्ष्मी जी की पूजा की जाती है- इसके बिना लक्ष्मी जी की पूजा-आराधना सफल नहीं मानी जाती। दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर गर्भवती स्त्री को सेवन कराने से संतान स्वस्थ व रोग मुक्त होती है। दक्षिणावर्ती शंख से पितृ तर्पण करने पर पितरो की शांति होती है। दक्षिणावर्ती शंख से शालिग्राम व स्फटिक श्रीयंत्र को स्नान कराने से व्यवहायिक जीवन सुखमय और लक्ष्मी का चिरस्थायी वास होता है। चंद्र ग्रह की प्रतिकूलता से होने वाले श्वास व हृदय रोगो की शांति के लिए इसकी नित्य पूजा करे | दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना से वास्तु दोषों का निवारण होता है।
पूजा में शंख क्यूँ बजाया जाता है
समुद्र मंथन के समय मिले 14 रत्नों में से एक रत्न शंख भी है। शंख में ओम की ध्वनि प्रतिध्वनित होती है, इसलिए ओम् से ही वेद बने और वेद से ज्ञान का प्रसार हुआ। शंख चंद्रमा और सूर्य के समान ही देव स्वरूप है। इसके मध्य में वरुण, पृष्ठ भाग में ब्रह्मा और अग्र भाग में गंगा व सरस्वती का निवास है। शंख से शिवलिंग, कृष्ण या लक्ष्मी विग्रह पर जल या पंचामृत अभिषेक करने पर देवता प्रसन्न होते हैं। शंख की ध्वनि से भक्तों को पूजा-अर्चना के समय की सूचना मिलती है। आरती के समापन के बाद इसकी ध्वनि से मन को शांति मिलती है। ऐसा माना जाता है कि ब्रह्मांड एवं शंख की आकृति समान है शंख के अंदर का घेरा ब्रह्मांड की कुंडली की तरह होता है। शंख में गूंजने वाला स्वर ब्रह्मांड की गूंज के समान है। ऊँ शब्द की गूंज भी शंख के द्वारा गूंजायमान ध्वनि जैसी ही होती है।
शंखों की आयुर्वेद में उपयोगिता
वैज्ञानिकों का मानना है कि इसके प्रभाव से सूर्य की हानिकारक किरणें बाधित होती हैं। शंख नाद करने पर जहां तक इसकी ध्वनि जाती है, वहां तक व्याप्त बीमारियों के कीटाणु नष्ट हो जाते हैं। शंख में गंधक, फास्फोरस और कैल्शियम जैसे उपयोगी पदार्थ मौजूद होते हैं। इससे मौजूद जल सुवासित और रोगाणुरहित हो जाता है। इसी लिए शास्त्रों में इसे महाऔषधि माना जाता है। बच्चों के शरीर पर छोटे-छोटे शंख बांधने व उन्हें शंख-जल पिलाने से वाणी-दोष दूर होते हैं। मूक व श्वास रोगी हमेशा शंख बजाए, तो वे बोलने की शक्ति पा सकते हैं आयुर्वेद के अनुसार हकलाने वाले व्यक्ति यदि नित्य शंख-जल पिएं तो वे ठीक हो जाएंगे। शंख जल स्वास्थ्य, हड्डियों व दांतों के लिए लाभदायक है।
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