ज्योतिष में राहु ग्रह को एक पापी ग्रह माना जाता है। वैदिक ज्योतिष में राहु ग्रह को कठोर वाणी, जुआ, यात्राएँ, चोरी, दुष्ट कर्म, त्वचा के रोग, धार्मिक यात्राओं आदि का कारक माना जाता है। जिस व्यक्ति की जन्मकुंडली में राहु अशुभ स्थान पर बैठा हो, अथवा पीड़ित हो तो यह जातक को इसके नकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं। ज्योतिष में राहु ग्रह को किसी भी राशि का स्वामित्व प्राप्त नहीं है। लेकिन मिथुन राशि में यह उच्च होता है और धनु राशि में यह नीच भाव में होता है। 27 नक्षत्रों में राहु आर्द्रा, स्वाति और शतभिषा नक्षत्रों का स्वामी है। ज्योतिष के अनुसार राहु छाया ग्रह होने के बाद भी जन्म कुण्डली में अपना प्रभाव बनाए रखता है। हमारी जन्म कुण्डली में राहु के ख़राब होने पर अनेक बाधाएं तथा जीवन में बहुत प्रकार की बिमारियों के होने के भी संकेत मिलते है। जन्मकुण्डली में राहु की खराबी जातक को जेल भेजने तक के योग भी निर्मित कर देती है।
ज्योतिष के अनुसार जन्म कुण्डली में राहु और केतु की एक ऐसी भी स्थिति बनती है, जिससे एक कुयोग का निर्माण होता है, जिसका नाम है कालसर्प दोष। जब जन्म कुण्डली के सभी ग्रह राहु और केतु के अंदर आ जाये अर्थात दोनो ग्रह किनारे में हो और बाकी के ग्रह बीचों बीच हो तो ऐसी स्थिति में यह दोनों ग्रह काल सर्प दोष का निर्माण करते हैं। राहु के द्वारा जातक को हमेशा बुरे प्रभाव नहीं मिलते हैं, परंतु यदि जातक की जन्म कुण्डली में राहु अशुभ कारक स्थिति में है, तो फिर बुरे फल प्राप्त होने लगते हैं। राहु ग्रह के बुरे प्रभावों के अंतर्गत स्वास्थ्य संबंधित परेशानियां मिलना, सही निर्णन न ले पाना, याददाश्त में कमजोरी आना, बुद्धि का सही दिशा में न लग पाना, मन का इधर-उधर भटकना इन सभी प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
जब जन्म कुण्डली में राहु की दशा या महादशा का काल प्रारंभ होता है, तथा जन्म कुण्डली में राहु की स्थिति नाजुक है तो भी हमे कठिन समय से होकर गुजरना पड़ता है, क्योंकि किसी भी ग्रह की दशा या महादशा का उचित फल तभी प्राप्त होता जब वह ग्रह हमारी जन्म कुण्डली के अनुकुल हो और दशा या महादशा के पूर्व भी उस ग्रह से हमें अच्छे फल प्राप्त हो रहे हैं, तब हमें किसी भी ग्रह की महादशा का पूर्ण रुप से फल प्राप्त होता है। जन्म कुण्डली में राहु के खराब होने से हम मानसिक रुप से बहुत ही कमजोर हो जाते हैं, जिससे हम अपने भविष्य की योजना बनाने में असमर्थ हो जाते है। राहु के खराब होने से आर्थिक संकट का सामना भी करना पड़ सकता है। खुद की कार्य क्षमता में संदेह होने लगता है,कि क्या यह मै कर पाउंगा या नही। घर-परिवार, समाज तथा रिश्तेदारों के प्रति गलतफहमी की भावना उत्पन्न होने लगती हैं। अपनी जुबान पर से नियंत्रण उठ जाता है तथा किसी को भी बिना सोचे समझे कुछ भी बोल देते हैं, जिसका बुरा असर हमारे ऊपर पड़ता है।
राहु ग्रह का संबंध-
ज्योतिष के अनुसार, राहु ग्रह का संबंध ख़ुफ़िया पुलिस, ख़ुफ़िया महकमा, जेल, ससुराल, भूचाल, जौं, सरसों, चालबाज़, कच्चा कोयला, काला कुत्ता, गंदी नाली, लोहे में लगने वाली जंग, काना, लंगड़ा, प्लेग, बुखार, भय आदि चीज़ों का संबंध राहु ग्रह से दर्शाया जाता है। राहु का संबंध गोमेद रत्न, आठ मुखी रुद्राक्ष और नागरमोथा की जड़ी से है।
राहु ग्रह का प्रभाव-
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