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ग्रह विशेष

जानें,संयुक्त ग्रहों का फल…

जानें,संयुक्त ग्रहों का फल…

संयुक्त ग्रहों का फल

यदि दो या दो से अधिक ग्रह अपनी चाल के अनुसार चलते-चलते एक ही घर में पहुंच जाते हैं तो उनका अच्छा या बुरा प्रभाव जातक पर अवश्य पड़ता है। ऐसी स्थिति तब भी उत्पन्न होती है, जब दो ग्रहों की दृष्टि एक साथ किसी खाने पर पड़ती है। विभिन्न ग्रहों का संयुक्त प्रभाव ग्रहवार निम्नवत् है-
सूर्य

  • सूर्य स्वास्थ्य एवं व्यक्तित्व का मालिक होता है। यदि सूर्य बृहस्पति के साथ पांचवें खाने में हो तो मान-सम्मान देता है।
  •  केतु के साथ 8 वें खाने में सूर्य के होने पर जातक अपनी पसन्द को प्राप्त करने में समर्थ होता है।
  • यदि सूर्य बृहस्पति के साथ खाना नं. 9 में हो तो व्यक्ति मूर्ख होता है।
  •  यदि पांचवें खाने में सूर्य के साथ कोई अच्छा ग्रह आ जाए तो जातक काफी प्रभावशाली व्यक्ति होता है।
  •  यदि सूर्य केतु के साथ छठवें खाने में हो तो जातक पर सदा उदासी का आलम छाया रहता है।
  •  सूर्य और शनि के सातवें खाने में होने पर जातक दोहरे व्यक्तित्व वाला होता है।
  • शनि के साथ आठवें घर में सूर्य के होने से जातक दोगली प्रवृत्ति का, मुंह पर वाहवाही तथा पीठ पीछे गाली देने वाला होता है।
    मंगल
  • यदि मंगल चंद्र के साथ नं. 4 में हो तो व्यक्ति को प्रभावशाली बनाता है।
  • सूर्य के साथ खाना नं. 5 में मंगल के होने पर जातक मानवता के प्रति दयालु एवं नम्र स्वभाव का होता है।
  • बुध के साथ छठे घर में मंगल के होने पर जातक नकलची प्रवृत्ति का होता है।
  • शनि के साथ आठवें घर में मित्र ग्रह के आने पर मंगल व्यक्ति की यश-कीर्ति बढ़ाने वाला सिद्ध होता है।
  • शनि के साथ नं. 1 में मंगल के होने पर जातक संगीतप्रेमी होता है।
  • बृहस्पति के साथ दूसरे खाने में मंगल के होने पर जातक कत्र्तव्यनिष्ठ एवं जिम्मेदार प्रवृत्ति का होता है।
  • मंगल के साथ तीसरे खाने में शुक्र के होने पर जातक में किसी घटना की वास्तविकता ज्ञात करने की शक्ति आ जाती है।
  • सूर्य के साथ पहले खाने मे मंगल के होने पर जातक में विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की शक्ति होती है तथा वह ओजवान बनता है।
  • मंगल और बृहस्पति के तीसरे खाने में होने से व्यक्ति न्यायप्रिय होता है।
  • यदि मंगल बद के साथ चैथे खाने में राहु हो तो जातक को काफी मान-सम्मान प्राप्त होता है।

बृहस्पति

बृहस्पति के साथ सूर्य पांचवें खाने में होने पर जातक दुर्लभ कार्य सम्पन्न कराने वाला होता है।

बुध के साथ बृहस्पति छठे खाने में होने पर व्यक्ति मिथ्या आशावादी तथा तबाही फैलाने वाला होता है।

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