जिस प्रकार चंद्रमा के कारण ज्वार-भाटा समुद्र में आता है, वनस्पतियों में रस चंद्रमा के कारण ही आता। ठीक उसी प्रकार सौर-मंडल के ग्रह हमें अलग-अलग रूप से प्रभावित करते हैं। अतः सावधानीपूर्वक कुंडली मिलान करके ही विवाह करना चाहिए। कहने को मंगल बड़ा क्रूर ग्रह माना गया है जबकि मंगल क्रूर नहीं, वह तो मंगलकर्ता, दुखहर्ता, ऋणहर्ता व कल्याणकारी है। मंगल दोषपूर्ण होने पर मनुष्य को अलग-अलग तरह के कष्ट होते हैं। मंगल को अनुकूल बनाने के उपाय भी अलग-अलग हैं।
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