अनिष्ट ग्रह से बचाव के उपाय
क्रिया के विपरीत प्रतिक्रिया होना एक वैज्ञानिक सिद्धांत है अर्थात् कोई भी क्रिया निष्फल नही जाती। उसका कोई-न-कोई प्रतिफल अवश्य ही होता है। ठीक उसी प्रकार, जैसे ढ़ोल पर थाप मारने से आवाज उत्पन्न होती है। लेकिन यदि वही थाप एक निश्चित तारतम्य में लगाई जाए तो उसमें से संगीत के सुर बोल पड़ते हैं। इसी प्रकार ज्योतिष विज्ञान में उपाय या टोटकों का प्रभाव निश्चित होता है, बशर्ते उन्हे बिना नागा निरन्तर एक निश्चित समय पर क्रमबद्ध तरीके से किया जाए।
ऐसा करने पर शत-प्रतिशत फल प्राप्त होता है। यह एक वैज्ञानिक रहस्य है।भारत की धरती पर इनका प्रयोग न जाने कितने समय से होता चला आ रहा है। नियमबद्ध तरीके से करने पर ही ये सफल होते देखे गए है। जिस प्रकार रेडियो या टी.वी. की सर्किट में छोेटे से तार का संपर्क हट जाने प रवह काम करना बंद कर देता है और घरघराहट की आवाजे आने लगती है, वही स्थिति इनकी भी है। वर्तमान खोजें बताती हैं कि यथेष्ट ग्रहों द्वारा आवेशित वस्तुओं में उनका प्रभाव होता है जिससे उनकी कमी दूर होकर रोग का निदान हो जाता है।
टोटकों के विषय में दूसरा अति महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इनकी गोपनीयता कभी भंग न होने पाए, तभी पूर्ण सफलता मिलती है। उदाहरणार्थ-धरती के गर्भ में पड़ा बीज गहन अन्धकार में लुप्त होकर ही नए पौधे की उत्पत्ति करता है। यदि उसे प्रतिदिन कुछ समय के लिए बाहर निकाल लिया जाए तो उसके जमने की गति धीमी पड़ जाती है या बिल्कुल नहीं होती। अतः पाठकों को इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए इस विद्या का अमल करना चाहिए।
जब सूर्य सप्तम भाव में हो तो निम्लिखित बातों का ध्यान रखें-
भोजन पकाने के बाद नित्य उसे खाने से पहले कुछ अंश आग में डाल दें।
जब बच्चों एवं परिवार पर आर्थिक दुष्प्रभाव हो तो तांबे के चैकोर टुकड़े जमीन में गाड़े या काम पर जाने से पहले थोड़ा मीठा खाकर पानी पिएं। शुक्र की चीजें दही आदि मनहूस सिद्ध होंगी। काला रंग शुभ होगा।
जब सब कुछ बुरा-ही-बुरा हो रहा हो तो बुध का उपाय करें।
यदि शनि का लग्न में गोचर हो तो चंद्र निःसहाय हो जाता है। ऐसे में चूल्हे की आग दूध से बुझाएं। अगली सुबह से पहले दुबारा न जलाएं।
सूर्य-बुध 9 में तथा बुध 3 या 5 में हो तो सूर्य दुष्फल देगा। ऐसी स्थिति में घर में पुराने बड़े-बड़े बर्तन रखने से क्षेम होगा।
यदि सूर्य पर शनि की कुदृष्टि के कारण अशुभ फल बढ़ता हो तो जातक घर की दक्षिणी दीवार के पास पूर्व दिशा की ओर मुंह करके पानी से भरा घड़ा दाएं हाथ की तरफ गाड़ दें। ध्यान रहे, वह 41-42 दिनों तक सूखने न पाए। यदि सूर्य के पूर्ववर्ती भावों में शनि हो तो अशुभ
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